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कुपोषण जंग मंद, 76 का ही साल भर में उपचार

Sun, 27 Feb 2022 11:16 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 11:16 PM IST
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Malnutrition battle turned blunt, only 76 treated in a year
गाजीपुर। जिला अस्पताल में अति कुपोषित बच्चों के लिए स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में दवाओं और भोजन की बेहतर व्यवस्थाएं हैं। हालांकि अभी बेड खाली चल रहे हैं। वजह कोरोना संक्रमण के कारण स्थितियां सामान्य नहीं होने से उन्हें भर्ती नहीं कराया गया था। अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को चिन्हित कर रिपोर्ट सीएचसी को भेज रही हैं, जहां से उन्हें भर्ती करने के लिए एनआरसी भेजा जाएगा। वर्तमान समय में एक चिकित्सक और चार पैरामेडिकल स्टाफ की वहां तैनाती की गई है। बीते वर्ष 76 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार किया गया। जबकि जनवरी में एक और फरवरी माह में आंकड़ा शून्य रहा।
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बच्चों के कुपोषण को कम करने का काम स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग के तालमेल से होता है। जिले में करीब 80 हजार कुपोषित बच्चें और अतिकुपोषित बच्चों की संख्या करीब नौ हजार के आस-पास है। इन अतिकुपोषित बच्चों की देखभाल और इलाज के लिए जिला अस्पताल में दस बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित कराया गया है। यहां भर्ती बच्चों के इलाज को लेकर एक चिकित्सक और चार पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती है। विभाग के बीते वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जनवरी में छह, फरवरी छह, मार्च नौ, जुलाई छह, अगस्त छह, सितंबर 11, अक्टूबर सात, नवंबर सात और दिसंबर में 18 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार करने के साथ देखभाल किया गया था। हालांकि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते अप्रैल, मई और जून माह में शून्य रही। वहीं इस वर्ष जनवरी माह में मात्र एक अतिकुपोषित बच्चा ही भर्ती हो पाया था। वहीं फरवरी माह में शुरू हुए कोरोना के तीसरी लहर के मद्देनजर इसमें भी आंकड़ा शून्य रहा।जबकि विभाग अतिकुपोषित बच्चों का पता लगाने के लिए प्रशासन पूरे वर्ष अभियान चलाने का दावा करता है, लेकिन स्थिति यह है कि अगर कोरोना संक्रमण काल को छोड़ दिया जाए तो एक वर्ष में मात्र 76 अतिकुपोषित बच्चों को ही भर्ती कराकर उपचार मुहैया कराया जा सका है। इस संबंध में जिला अस्पताल सीएमएस डा. राजेश सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते एनआरसी में अतिकुपोषित बच्चे भर्ती नहीं हो पाए थे। अब संक्रमण का प्रभाव घटने के बाद इन्हें भर्ती कराकर उपचार मुहैया कराया जाएगा।
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