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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Mahahar Dham Special Story of Ghazipur associated with Raja Dasharatha and Shravan Kumar

महाहर धाम: राजा दशरथ और श्रवण कुमार से जुड़ा है गाजीपुर के इस मंदिर का नाता, यहां स्थापित है तेरह मुखी शिवलिंग

Wed, 03 Jan 2024 01:31 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 03 Jan 2024 01:31 PM IST
सार

गाजीपुर का महाहर धाम पूर्वांचल के भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां राजा दशरथ ने ब्रह्मा के आर्शीवाद से श्राप मुक्ति और संतान प्राप्ति के लिए शिवलिंग की स्थापना और मंदिर का निर्माण कराया था। श्रद्धालुओं की भीड़ यहां पूरे साल लगी रहती है। 

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Mahahar Dham Special Story of Ghazipur associated with Raja Dasharatha and Shravan Kumar
Mahahar Dham ghazipur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

त्रेतायुग से मरदह स्थित महाहर धाम का पुराना नाता है। यहां प्राचीन तेरह मुखी शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि राजा दशरथ ने ब्रह्मा के आर्शीवाद से श्राप मुक्ति और संतान प्राप्ति के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना और मंदिर का निर्माण कराया था। जहां महाशिवरात्रि पर भक्तों का रेला उमड़ता है तो वहीं पूरे सावन माह मंदिर परिसर घंटों की आवाज से गुंजायमान रहता है। ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व के कारण यह धाम आस्था और विश्वास का केंद्र है। पूरे पूर्वांचल सहित पड़ोसी राज्य के भी श्रद्धालु इस धाम पर पहुंचकर दुर्लभ शिवलिंग का दर्शन पूजन कर बाबा से मनचाही मुराद मांगते हैं।

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ऐसा माना जाता है कि अयोध्या के महाराजा दशरथ शिकार खेलने के क्रम में महाहर धाम के पास जंगल में पहुंचे थे। उसी समय श्रवण कुमार अपने दृष्टिहीन माता-पिता को कांवर पर बैठाकर तीर्थयात्रा कराने के लिए उसी जंगल से गुजर रहे थे।
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माता-पिता को प्यास लगने पर श्रवण कुमार उन्हें जंगल में एक स्थान पर बैठाकर पानी की तलाश में चले गए। वह सरोवर में पानी ले रहे थे तभी महाराजा दशरथ का शब्द भेदी बाण उन्हें लगा था।

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यहां धाम परिसर में एक पोखरा है, जिसके बारे में कहा जाता है यह वही पोखरा है जहां श्रवण कुमार जल लेने गए थे। तब श्रवण के माता-पिता ने दशरथ को श्राप दिया था। इसके बाद ब्रह्मा के आर्शीवाद से राजा दशरथ ने श्राप मुक्ति और संतान प्राप्ति के लिए शिवलिंग की स्थापना कर पूजन किया। यह महल दशरथ की गढ़ी के नाम से विख्यात है। धाम के दक्षिण तरफ श्रवणडीह नाम का गांव है। जहां पहले से बनाया गया श्रवण कुमार का मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। 

मंदिर के अध्यक्ष जितेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि धाम परिसर में शिव मंदिर के अलावा भगवान हनुमान, भैरव बाबा, संत रविदास, भगवान ब्रम्हा की चार मुखी प्रतिमा, मां दुर्गा, राधा-कृष्ण, राम-लक्ष्मण-जानकी सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

मंदिर प्रशासन के मुताबिक धाम में तेरहमुखी शिवलिंग के साथ ही शिव-पार्वती की युगल मूर्ति भी अद्भुत एवं पूजनीय हैं। कहा जाता है कि मंदिर के सामने उत्तर से दक्षिण तरफ दिशा में एक किलोमीटर तक लंबा सरोवर है, जहां हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर मां गंगा का प्रवाह था।

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