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हत्यारे को आजीवन कारावास, 50 हजार रुपये अर्थदंड
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गाजीपुर। जिला जज प्रशांत मिश्रा की अदालत ने सोमवार को फावड़े से प्रहार करके जान लेने के मामले में संजय यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 50 हजार जुर्माना भी लगाया, जिसकी आधी रकम मारे गए युवक की मां को दी जाएगी।
शादियाबाद थाना क्षेत्र के सिधार खुर्द गांव निवासी हीरामनी देवी ने शादियाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 13 अप्रैल 2018 की सुबह साढ़े नौ बजे उनका पुत्र अर्जुन यादव घर के सामने बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर मोबाइल पर कुछ देख रहा था। तभी भूूमि विवाद के मामले में रंजिश मानने वाले संजय यादव ने कुछ लोगों के ललकारने पर उस पर हमला कर दिया। उसने फावड़े से उसके सिर पर प्रहार किया, जिससे अर्जुन अचेत होकर गिर पड़ा। उसे पहले जिला अस्पताल ले जाया गया लेकिन हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सक ने वाराणसी रेफर कर दिया। वाराणसी ले जाते समय अर्जुन की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में आरोपी संजय यादव, महेंद्र यादव, कैलाश यादव और उर्मिला देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाशंकर राय और वादी के अधिवक्ता सुमित कुमार श्रीवास्तव ने 11 गवाहों को पेश किया। सभी ने घटना का समर्थन करते हुए अपना बयान न्यायालय में दर्ज कराया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी महेंद्र यादव, कैलाश यादव और उर्मिला देवी को दोषमुक्त कर दिया जबकि संजय यादव को दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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शादियाबाद थाना क्षेत्र के सिधार खुर्द गांव निवासी हीरामनी देवी ने शादियाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 13 अप्रैल 2018 की सुबह साढ़े नौ बजे उनका पुत्र अर्जुन यादव घर के सामने बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर मोबाइल पर कुछ देख रहा था। तभी भूूमि विवाद के मामले में रंजिश मानने वाले संजय यादव ने कुछ लोगों के ललकारने पर उस पर हमला कर दिया। उसने फावड़े से उसके सिर पर प्रहार किया, जिससे अर्जुन अचेत होकर गिर पड़ा। उसे पहले जिला अस्पताल ले जाया गया लेकिन हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सक ने वाराणसी रेफर कर दिया। वाराणसी ले जाते समय अर्जुन की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में आरोपी संजय यादव, महेंद्र यादव, कैलाश यादव और उर्मिला देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाशंकर राय और वादी के अधिवक्ता सुमित कुमार श्रीवास्तव ने 11 गवाहों को पेश किया। सभी ने घटना का समर्थन करते हुए अपना बयान न्यायालय में दर्ज कराया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी महेंद्र यादव, कैलाश यादव और उर्मिला देवी को दोषमुक्त कर दिया जबकि संजय यादव को दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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