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Ghazipur News: नम आंखों से याद किए गए शहीदाने करबला
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बहरियाबाद। चेहल्लुम की पूर्व संध्या पर रविवार को कई स्थानों से जुलूस निकाले गए। इससे पूर्व हुई मजलिस में उलेमा ने करबला के मंजर बयान किए तो वहीं अंजुमनों ने नौहा मातम कर शहीदाने करबला को खिराजे अकीदत पेश की।
स्थानीय कस्बा स्थिति मुन्तजिर इमाम के आवास पर हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कामरान अब्बास अंबेडकर नगर ने कहा कि इमाम ने अपने साथ ही कुनबे की कुर्बानी कुबूल की लेकिन यजीद की बैयत कुबूल न की। आज कुछ लोग मुसलमानो की मुशाबहत लेकर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि इस्लाम में दहशतगर्दी के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि यह यजीदियत की पहचान है। इसके बाद ताजिया और अलम के साथ जुलूस निकाला गया जो दक्षिण से उत्तर मुहल्ला पहुंचा जहां शमीमुलवरा के सहन में गोपालपुर बिहार से आए सैयद वजीह हैदर गोपालपुर ने मसाएब बयान किए। जुलूस पुनः बाजार पहुंचा यहां आफताब आलम के सहन में जुलूस को खेताब करते अंबेडकर नगर से आए मौलाना मीसम अब्बास ने कहा कि कर्बला आलमे इंसानियत को अम्न और भाईचारे का पैगाम देता है। यह कौम हुसैन की अजादारी और मुल्क की वफादारी कभी नहीं भूलती। इमाम हुसैन हिन्दुस्तान की मेहमान नवाजी को जानते थे। इसलिए उन्होंने अंतिम समय में हिन्दुस्तान आने की मंशा जाहिर की किंतु यजीद ने उन्हें आने नहीं दिया।
जुलूस के दौरान अंजुमन मुन्तजरीने मेंहदी के साथ ही अंजुमन गुलामे ख्वाजा पहेतिया, अंजुमन जाफरिया मित्तूपुर आजमगढ़, अंजुमन अलमदारे हुसैनी मुबारकपुर आजमगढ़, अंजुमन मोहिब्बाने हुसैन समंदपुर आदि ने नौहा मातम किया।
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स्थानीय कस्बा स्थिति मुन्तजिर इमाम के आवास पर हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कामरान अब्बास अंबेडकर नगर ने कहा कि इमाम ने अपने साथ ही कुनबे की कुर्बानी कुबूल की लेकिन यजीद की बैयत कुबूल न की। आज कुछ लोग मुसलमानो की मुशाबहत लेकर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि इस्लाम में दहशतगर्दी के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि यह यजीदियत की पहचान है। इसके बाद ताजिया और अलम के साथ जुलूस निकाला गया जो दक्षिण से उत्तर मुहल्ला पहुंचा जहां शमीमुलवरा के सहन में गोपालपुर बिहार से आए सैयद वजीह हैदर गोपालपुर ने मसाएब बयान किए। जुलूस पुनः बाजार पहुंचा यहां आफताब आलम के सहन में जुलूस को खेताब करते अंबेडकर नगर से आए मौलाना मीसम अब्बास ने कहा कि कर्बला आलमे इंसानियत को अम्न और भाईचारे का पैगाम देता है। यह कौम हुसैन की अजादारी और मुल्क की वफादारी कभी नहीं भूलती। इमाम हुसैन हिन्दुस्तान की मेहमान नवाजी को जानते थे। इसलिए उन्होंने अंतिम समय में हिन्दुस्तान आने की मंशा जाहिर की किंतु यजीद ने उन्हें आने नहीं दिया।
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जुलूस के दौरान अंजुमन मुन्तजरीने मेंहदी के साथ ही अंजुमन गुलामे ख्वाजा पहेतिया, अंजुमन जाफरिया मित्तूपुर आजमगढ़, अंजुमन अलमदारे हुसैनी मुबारकपुर आजमगढ़, अंजुमन मोहिब्बाने हुसैन समंदपुर आदि ने नौहा मातम किया।
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