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सम्मान से अभिभूत हूं : डा. केदारनाथ
ब्यूरो/ अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:38 PM IST
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ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर प्रख्यात कवि केदार नाथ सिंह को गुरुवार को सत्यदेव डिग्री कालेज फदनपुद में सम्मानित किया गया।
इस दौरान डा. केदारनाथ सिंह ने कहा कि मुझे राष्ट्रपति से मिला ज्ञानपीठ सम्मान और उसके भारी महत्व का पूरा बोध है। मुझे यह भी पता है कि लोक सम्मान का क्या अर्थ होता है। उन्होंने कहा कि इस कालेज में मुझे जिस आत्मीयता से
सम्मानित किया गया है उसकी सुगंध मैं कभी भी भूल नहीं पाऊंगा। मैं सचमुच अभिभूत हूं। कालेज के मैनेजिंग डायरेक्टर डा. सानंद सिंह डा. केदार नाथ सिंह को अंग् वस्त्रम एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर
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उन्होंने प्रो. सदानन्द साही काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, डा. अशोक कुमार उपाध्याय प्राचार्य सतीश चन्द्र कालेज बलिया, डा. एमडी सिंह चिकित्सक और कवि गाजीपुर तथा डा. एमपी सिंह उदय प्रताप कालेज वाराणसी को भी सम्मानित किया।
स्वागत भाषण में सानंद सिंह ने कहा कि डा. केदार नाथ सिंह की कविताएं सामाजिक सरोकारों से भरीपूरी हैं। डॉ. आनंद सिंह ने मुख्य अतिथि का सविस्तार से परिचय दिया।
समालोचक डा. पीनएन सिंह ने कहा कि आज की दुनिया में लोगों ने पढ़ना छोड़ दिया है, जबकि साहित्य का काम पढ़ने- लिखने के बिना नहीं चल सकता। एक साहित्कार सम्मान पाने की इच्छा लेकर रचना नहीं करता। लिखना तो उसका
स्वभाव होता है। कार्यक्रम में डा. एमडी सिंह के गजल संग्रह खुन्नस और डा. उमाशंकर तिवारी की कृति असहमत समय को विमोचन भी किया गया। इस मौके पर जिले के 21 लोगों में पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा, उमाशंकर पथिक, डा.
के.एन. लाल, डा. मारकण्डेय सिंह, कमला शंकर यादव, डा. देवेन्द्र सिंह, रामानुज सिंह, देवेन्द्र सिंह, रामअवतार, उदय नारायण सिंह, डा. अनिल प्रताप सिंह, व्यासमुनि राम, फौजदार सिंह, इन्द्रासन राय, वासुदेव पाण्डेय, डा. अवधेश सिंह,
बब्बन यादव, डा. अखण्ड प्रताप सिंह, संजय यादव, विपिन बिहारी राय, डा. धनंजय सिंह को को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डा. दिग्विजय उपाध्याय, अमित रघुवंशी, अशोक सिंह, डा. सुनील सिंह, डा. धीरेन्द्र
कुमार मिश्र, आदि उपस्थित रहे। संचालन हरिनारायण हरीश जी ने किया।
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इस दौरान डा. केदारनाथ सिंह ने कहा कि मुझे राष्ट्रपति से मिला ज्ञानपीठ सम्मान और उसके भारी महत्व का पूरा बोध है। मुझे यह भी पता है कि लोक सम्मान का क्या अर्थ होता है। उन्होंने कहा कि इस कालेज में मुझे जिस आत्मीयता से
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सम्मानित किया गया है उसकी सुगंध मैं कभी भी भूल नहीं पाऊंगा। मैं सचमुच अभिभूत हूं। कालेज के मैनेजिंग डायरेक्टर डा. सानंद सिंह डा. केदार नाथ सिंह को अंग् वस्त्रम एवं प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर
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उन्होंने प्रो. सदानन्द साही काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, डा. अशोक कुमार उपाध्याय प्राचार्य सतीश चन्द्र कालेज बलिया, डा. एमडी सिंह चिकित्सक और कवि गाजीपुर तथा डा. एमपी सिंह उदय प्रताप कालेज वाराणसी को भी सम्मानित किया।
स्वागत भाषण में सानंद सिंह ने कहा कि डा. केदार नाथ सिंह की कविताएं सामाजिक सरोकारों से भरीपूरी हैं। डॉ. आनंद सिंह ने मुख्य अतिथि का सविस्तार से परिचय दिया।
समालोचक डा. पीनएन सिंह ने कहा कि आज की दुनिया में लोगों ने पढ़ना छोड़ दिया है, जबकि साहित्य का काम पढ़ने- लिखने के बिना नहीं चल सकता। एक साहित्कार सम्मान पाने की इच्छा लेकर रचना नहीं करता। लिखना तो उसका
स्वभाव होता है। कार्यक्रम में डा. एमडी सिंह के गजल संग्रह खुन्नस और डा. उमाशंकर तिवारी की कृति असहमत समय को विमोचन भी किया गया। इस मौके पर जिले के 21 लोगों में पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा, उमाशंकर पथिक, डा.
के.एन. लाल, डा. मारकण्डेय सिंह, कमला शंकर यादव, डा. देवेन्द्र सिंह, रामानुज सिंह, देवेन्द्र सिंह, रामअवतार, उदय नारायण सिंह, डा. अनिल प्रताप सिंह, व्यासमुनि राम, फौजदार सिंह, इन्द्रासन राय, वासुदेव पाण्डेय, डा. अवधेश सिंह,
बब्बन यादव, डा. अखण्ड प्रताप सिंह, संजय यादव, विपिन बिहारी राय, डा. धनंजय सिंह को को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डा. दिग्विजय उपाध्याय, अमित रघुवंशी, अशोक सिंह, डा. सुनील सिंह, डा. धीरेन्द्र
कुमार मिश्र, आदि उपस्थित रहे। संचालन हरिनारायण हरीश जी ने किया।