गहमर। शारदीय नवरात्र में कामाख्या धाम मंदिर परिसर में निराश्रित पशु घूम रहे हैं। इससे मेला में आने वाले दर्शनार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। वहीं, जिम्मेदार निराश्रित पशुओं को गो-आश्रय केंद्र पहुंचने के बजाय चुप्पी साधे हैं। जिलाधिकारी ने पूर्व में ही आदेश दिया था कि किसी भी दशा में निराश्रित पशु सार्वजनिक स्थानों पर नजर नहीं आने चाहिए। गांव, सड़क, खेत, गली, हाईवे के बाद अब इन निराश्रित पशुओं का नया ठिकाना मेला क्षेत्र व धार्मिक परिसर बन गया है। कामाख्या देवी मंदिर परिसर में इन दोनों झुंड में निराश्रित पशु नजर आ रहे हैं जबकि वहां शारदीय नवरात्र का मेला चल रहा है।रोज हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चों और बुजुर्ग भी हैं। निराश्रित पशुओं को लेकर दर्शनार्थी सशंकित रहते हैं। पशुओं के आपस में लड़ने तथा भीड़ भरे इलाके में अचानक दौड़ने से आए दिन परिसर मे दुर्घटनाएं हो रही हैं। बावजूद, जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। मंदिर परिसर में क्षेत्रीय राजस्वकर्मी तैनात है। बावजूद सभी मूकदर्शक बने हैं। मंदिर पर प्रतिदिन तहसील से लेकर जिले के उच्चाधिकारियों का दौरा लगा रहता है, लेकिन किसी का निगाह इन निराश्रित पशुओं पर नहीं जाती है। वहीं, बीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि निराश्रित पशुओं को पकड़ कर पशु आश्रय स्थल भेजा जाएगा। इसके लिए संबंधितों को आवश्यक निर्देश दिया गया है।