{"_id":"5f01fc918ebc3e42fb10ad0d","slug":"guru-purnima-ghazipur-news-vns5341268186","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरु पूर्णिमा: घरों में ही रह कर भक्तों ने लिया आशीर्वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरु पूर्णिमा: घरों में ही रह कर भक्तों ने लिया आशीर्वाद
विज्ञापन
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वराह घाट पर स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : GHAZIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। गुरु पूजन का पावन पर्व गुरु पूर्णिमा रविवार को जिले भर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। हालांकि इस दौरान मठों, आश्रमों तथा गुरु स्थानों पर कोई विशेष कार्यक्रम नहीं हुए लेकिन वहां के महंथों तथा महात्माओं ने पंरपरा का निर्वहन किया। सभी पंथों और गुरुओं से जुड़े अनुयायी और भक्तों ने घर में ही रहकर गुरू पूजन किया। इस दौरान कुछ ने अपने गुरुओं से फोन से या ऑनलाइन दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
शहर के हंसयोग आश्रम में कोई खास कार्यक्रम नहीं हुआ। महात्मा सुकर्मानंदजी ने सद्गुरु सतपाल जी महाराज की आरती की। इस दौरान घरों में मौजूद भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि सद्गुरु के जीवन में आने से सद्मार्ग मिल जाता है। जीवन का उद्देश्य मोक्ष है और हर परिस्थिति में रहते हुए इसे ही पाने का प्रयास करना चाहिए। कोरोना काल में सभी घर में रहें तथा स्वस्थ रहें। पोस्ताघाट स्थित प्राचीन मठ पर भी महंत बासुदेवानंद ने भी अपने गुरु कृष्णानंदजी महाराज का पूजन-अर्चन किया। भक्तों को हमेशा सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। मठ से जुड़े कुलदीप ने बताया कि कोरोना के चलते यहां सभी कार्यक्रम स्थगित हैं। जखनिया संवाददाता के अनुसार, सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज ने सिद्धेश्वर मंदिर महादेव मंदिर परिसर में बने गुरु स्मृति स्थल पर जाकर बालकृष्ण यति के चित्र पर माल्यार्पण कर विधि-विधान से गुरु पूजन किया। उन्होंने कहा कि गुरु वह होता है जो हमें गलत मार्ग से हटाकर सही मार्ग पर लाने का काम करता है। इस दिन सभी शिष्यों को अपने-अपने गुरूओं का आशीर्वाद लेने के साथ ही उन्होंने अब तक जो कुछ भी दिया है उसके लिए धन्यवाद करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को महान बनाने में गुरु का विशेष योगदान रहा है। इस दिन को मनाने के पीछे का एक कारण ये भी माना जाता है कि इस दिन महान गुरु महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था जिन्होंने ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसी अद्भुत साहित्यों की रचना की। इसी क्रम में सिद्धपीठ भुड़कुड़ा मठ पर भी सांकेतिक रूप से ही गुरु पूर्णिमा मनाई गई। पीठाधीश्वर शत्रुघ्न दास महाराज द्वारा सिद्धपीठ में स्थित भीखा साहब, गुलाल साहब सहित सभी सिद्ध संतों की समाधि पर विधिविधान से दर्शन-पूजन, आरती वंदन किया गया। इधर, शिष्यों ने अपने-अपने घरों में ही चित्र आदि के माध्यम से गुरु पूजाकर आशीर्वाद लिया। दिलदारनगर संवाददाता के अनुसार, अघोर सेवा मंडल की ओर से संचालित गिरनार आश्रम में गुरु पूर्णिमा का पर्व सादगी से मनाया गया। आश्रम के आचार्य डा. चंद्रभूषण शुक्ला ने साधु ओमराम से बाबा शावक राम और तुकाराम बाबा के समाधि स्थल, काली मंदिर एवं पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के आसन के पास विधिपूर्वक पूजन-अर्चन कराया। इस मौके पर उपाध्यक्ष रणजीत सिंह, अरविंद सिंह, सुरेश सिंह, भरत लाल, कमला, सुरेश कश्यप आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
शहर के हंसयोग आश्रम में कोई खास कार्यक्रम नहीं हुआ। महात्मा सुकर्मानंदजी ने सद्गुरु सतपाल जी महाराज की आरती की। इस दौरान घरों में मौजूद भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि सद्गुरु के जीवन में आने से सद्मार्ग मिल जाता है। जीवन का उद्देश्य मोक्ष है और हर परिस्थिति में रहते हुए इसे ही पाने का प्रयास करना चाहिए। कोरोना काल में सभी घर में रहें तथा स्वस्थ रहें। पोस्ताघाट स्थित प्राचीन मठ पर भी महंत बासुदेवानंद ने भी अपने गुरु कृष्णानंदजी महाराज का पूजन-अर्चन किया। भक्तों को हमेशा सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। मठ से जुड़े कुलदीप ने बताया कि कोरोना के चलते यहां सभी कार्यक्रम स्थगित हैं। जखनिया संवाददाता के अनुसार, सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज ने सिद्धेश्वर मंदिर महादेव मंदिर परिसर में बने गुरु स्मृति स्थल पर जाकर बालकृष्ण यति के चित्र पर माल्यार्पण कर विधि-विधान से गुरु पूजन किया। उन्होंने कहा कि गुरु वह होता है जो हमें गलत मार्ग से हटाकर सही मार्ग पर लाने का काम करता है। इस दिन सभी शिष्यों को अपने-अपने गुरूओं का आशीर्वाद लेने के साथ ही उन्होंने अब तक जो कुछ भी दिया है उसके लिए धन्यवाद करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को महान बनाने में गुरु का विशेष योगदान रहा है। इस दिन को मनाने के पीछे का एक कारण ये भी माना जाता है कि इस दिन महान गुरु महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था जिन्होंने ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसी अद्भुत साहित्यों की रचना की। इसी क्रम में सिद्धपीठ भुड़कुड़ा मठ पर भी सांकेतिक रूप से ही गुरु पूर्णिमा मनाई गई। पीठाधीश्वर शत्रुघ्न दास महाराज द्वारा सिद्धपीठ में स्थित भीखा साहब, गुलाल साहब सहित सभी सिद्ध संतों की समाधि पर विधिविधान से दर्शन-पूजन, आरती वंदन किया गया। इधर, शिष्यों ने अपने-अपने घरों में ही चित्र आदि के माध्यम से गुरु पूजाकर आशीर्वाद लिया। दिलदारनगर संवाददाता के अनुसार, अघोर सेवा मंडल की ओर से संचालित गिरनार आश्रम में गुरु पूर्णिमा का पर्व सादगी से मनाया गया। आश्रम के आचार्य डा. चंद्रभूषण शुक्ला ने साधु ओमराम से बाबा शावक राम और तुकाराम बाबा के समाधि स्थल, काली मंदिर एवं पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के आसन के पास विधिपूर्वक पूजन-अर्चन कराया। इस मौके पर उपाध्यक्ष रणजीत सिंह, अरविंद सिंह, सुरेश सिंह, भरत लाल, कमला, सुरेश कश्यप आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन