{"_id":"a0639d90bb9c7bfd2869306cf2e90f86","slug":"girls-offer-food-by-devotee-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांव पखार कन्याओं को कराया भोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांव पखार कन्याओं को कराया भोजन
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Sat, 28 Mar 2015 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुख शांति और शक्ति की कामना को लेकर किया गया नवरात्र का व्रत शनिवार को
विज्ञापन
संपन्न हुआ। इस मौके पर कई व्रती महिलाओं ने कुंवारी कन्याओं को भोजन करा
व्रत का पारण किया। कई मंदिरों में भी कुंवारी कन्याओं का पांव पखार उन्हें
भोजन कराया गया।
नवरात्र में कुंवारी कन्याओं का पूजन देवी के रूप में किया जाता है। इन्हें भोजन, फल, कपड़ा तथा मुद्रा आदि देकर प्रसन्न किया जाता है। दुर्गा तथा लक्ष्मी के रूप में कन्याओं का पूजन करने वालों के घर धन, सुख तथा समृद्धि बनी रहती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए व्रती महिलाओं तथा पुरुषों ने कन्या भोज का आयोजन किया।
शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में घरों में कलश स्थापित कर नवरात्र का व्रत करने के बाद इस परंपरा को निभाया गया। कन्या भोज के बाद व्रतियों ने खुद भी अन्न ग्रहण किया। इस मौके पर मां दुर्गा के नवम रूप सिद्धिदात्री की पूजा एवं आरती की गई।
गोड़ा देहाती स्थित गायत्री शक्तिपीठ और लंका स्थित राम-जानकी मंदिर में रामनवमी के मौके पर हवन-पूजन के बाद कुंआरी कन्याओं को भोजन कराया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर के महंत अखिलेश्वर दास, राजेश चौरसिया, राजेश विश्वकर्मा, सीता यादव, वंशलोचन, अशोक, संजय गुप्ता आदि का सहयोग रहा।
शहर के लंका मैदान में स्थित मां काली मंदिर पर नवरात्र के पहले दिन से ही पूजन-अर्चन का कार्यक्रम चल रहा था। रामनवमी के दिन शनिवार को कीर्तन-भजन का आयोजन किया गया। पूरे दिन श्रद्धालु मां काली का पूजन-अर्चन करते रहे। भक्तों की ओर से शाम को भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जो देर रात तक चला।
यहां पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संजय गुप्ता, नीरज त्रिपाठी, ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, मंटू चौरसिया, ओमकार, सुनीलदत्त त्रिपाठी, जयप्रकाश प्रजापति, दीपक प्रजापति, कैलाश प्रजापति, नागेंद्रनाथ पांडेय आदि का योगदान रहा।
नवरात्र में कुंवारी कन्याओं का पूजन देवी के रूप में किया जाता है। इन्हें भोजन, फल, कपड़ा तथा मुद्रा आदि देकर प्रसन्न किया जाता है। दुर्गा तथा लक्ष्मी के रूप में कन्याओं का पूजन करने वालों के घर धन, सुख तथा समृद्धि बनी रहती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए व्रती महिलाओं तथा पुरुषों ने कन्या भोज का आयोजन किया।
शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में घरों में कलश स्थापित कर नवरात्र का व्रत करने के बाद इस परंपरा को निभाया गया। कन्या भोज के बाद व्रतियों ने खुद भी अन्न ग्रहण किया। इस मौके पर मां दुर्गा के नवम रूप सिद्धिदात्री की पूजा एवं आरती की गई।
गोड़ा देहाती स्थित गायत्री शक्तिपीठ और लंका स्थित राम-जानकी मंदिर में रामनवमी के मौके पर हवन-पूजन के बाद कुंआरी कन्याओं को भोजन कराया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर के महंत अखिलेश्वर दास, राजेश चौरसिया, राजेश विश्वकर्मा, सीता यादव, वंशलोचन, अशोक, संजय गुप्ता आदि का सहयोग रहा।
शहर के लंका मैदान में स्थित मां काली मंदिर पर नवरात्र के पहले दिन से ही पूजन-अर्चन का कार्यक्रम चल रहा था। रामनवमी के दिन शनिवार को कीर्तन-भजन का आयोजन किया गया। पूरे दिन श्रद्धालु मां काली का पूजन-अर्चन करते रहे। भक्तों की ओर से शाम को भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जो देर रात तक चला।
यहां पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संजय गुप्ता, नीरज त्रिपाठी, ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, मंटू चौरसिया, ओमकार, सुनीलदत्त त्रिपाठी, जयप्रकाश प्रजापति, दीपक प्रजापति, कैलाश प्रजापति, नागेंद्रनाथ पांडेय आदि का योगदान रहा।