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भू-मंडलीकरण का दौर, राष्ट्रवाद तर्क गौण
गाजीपुर
Updated Sat, 17 Dec 2016 10:40 PM IST
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जीवनोदय शिक्षा समिति द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेते ई. राघव शरण शर्मा आैर अन्य वक्ता।
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जीवनोदय शिक्षा समिति की ओर से रोडवेज स्थित पैलेस में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं लोक कला प्रदर्शन का शुभारंभ शनिवार को राघवशरण शर्मा ने किया। पहले सत्र का बीज वक्तव्य काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. संजय कुमार ने देते हुए राष्ट्रवाद की अवधारणा को यूरोप जनित बताया। कहा कि यूरोपीय कसौटी पर देखा जाए तो भारत कोई राष्ट्र नहीं है यह कई राष्ट्रों का एक समूह है।
प्रो. संजय कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में भू-मंडलीकरण पूंजीवाद का एक तर्क है। इसी तरह राष्ट्रवाद पूंजीवाद का राजनैतिक तर्क है। आधुनिकता पूंजीवाद का एक सांस्कृतिक तर्क है। वर्तमान संदर्भ में उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन का बनना राष्ट्रवाद की धारणा को तोड़ता है। अब यह दौर भू-मंडलीकरण का है। इसमें राष्ट्रवाद का तर्क गौण होता जा रहा है। प्रो. सानंद सिंह ने राष्ट्रवाद की समाजवादी दृष्टिकोण से व्याख्या की। कहा कि राष्ट्र को केवल भौगोलिक सीमा में नहीं बांधा जा सकता। अध्यक्षता कर रहे राघवशरण शर्मा ने कहा कि भारत एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में अनादि काल से संगठित रहा है। सांस्कृतिक प्रतीकों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा, आचार, व्यवहार आदि भिन्न होते हुुए भी लोक सांस्कृतिक राग उत्तर और दक्षिण, पूरब एवं पश्चिम एक समान था। राष्ट्रबोध के नाम पर अंग्रेजों ने बड़ी चतुराई से गुटबंदी को बढ़ावा दिया, जिससे हमारे सांस्कृतिक राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद दोनों कमजोर हुए। सत्र के समापन पर डा. पीएन सिंह ने आशीर्वचन दिया। द्वितीय सत्र में डा. यू कुंडला, डा. गोपाल ठाकुर, प्रो, संजीता वर्मा, डा. अविनाश पंकज, प्रो. ओंकारनाथ उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। पहले सत्र का संचालन रविंद्र श्रीवास्तव एवं दूसरे का अतुल ठाकुर ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री विजय मिश्र ने किया। उन्होंने संस्था की तरफ से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। लोककला कार्यक्रम में चंदन तिवारी, देवेंद्र धर्मेंद्र ओझा, विजय प्रसाद एवं दयाशंकर शास्त्री ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पुस्तक मेला एवं कला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इस अवसर पर डा. संजय चतुर्वेदी, डा. रामनारायण तिवारी, डा. जितेंद्रनाथ राय, डा. काजी फरीद आलम, डा. कुलदीप कुमार पांडेय, प्रभाकर त्रिपाठी एवं अमरजीत यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में समाजसेवी मीरा राय ने लोकगायक विजयबहादुर सिंह यादव को अभिनंदन पत्र एवं अंगवस्त्र से सम्मानित किया।
प्रो. संजय कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में भू-मंडलीकरण पूंजीवाद का एक तर्क है। इसी तरह राष्ट्रवाद पूंजीवाद का राजनैतिक तर्क है। आधुनिकता पूंजीवाद का एक सांस्कृतिक तर्क है। वर्तमान संदर्भ में उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन का बनना राष्ट्रवाद की धारणा को तोड़ता है। अब यह दौर भू-मंडलीकरण का है। इसमें राष्ट्रवाद का तर्क गौण होता जा रहा है। प्रो. सानंद सिंह ने राष्ट्रवाद की समाजवादी दृष्टिकोण से व्याख्या की। कहा कि राष्ट्र को केवल भौगोलिक सीमा में नहीं बांधा जा सकता। अध्यक्षता कर रहे राघवशरण शर्मा ने कहा कि भारत एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में अनादि काल से संगठित रहा है। सांस्कृतिक प्रतीकों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा, आचार, व्यवहार आदि भिन्न होते हुुए भी लोक सांस्कृतिक राग उत्तर और दक्षिण, पूरब एवं पश्चिम एक समान था। राष्ट्रबोध के नाम पर अंग्रेजों ने बड़ी चतुराई से गुटबंदी को बढ़ावा दिया, जिससे हमारे सांस्कृतिक राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद दोनों कमजोर हुए। सत्र के समापन पर डा. पीएन सिंह ने आशीर्वचन दिया। द्वितीय सत्र में डा. यू कुंडला, डा. गोपाल ठाकुर, प्रो, संजीता वर्मा, डा. अविनाश पंकज, प्रो. ओंकारनाथ उपाध्याय ने विचार व्यक्त किए। पहले सत्र का संचालन रविंद्र श्रीवास्तव एवं दूसरे का अतुल ठाकुर ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री विजय मिश्र ने किया। उन्होंने संस्था की तरफ से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। लोककला कार्यक्रम में चंदन तिवारी, देवेंद्र धर्मेंद्र ओझा, विजय प्रसाद एवं दयाशंकर शास्त्री ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पुस्तक मेला एवं कला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इस अवसर पर डा. संजय चतुर्वेदी, डा. रामनारायण तिवारी, डा. जितेंद्रनाथ राय, डा. काजी फरीद आलम, डा. कुलदीप कुमार पांडेय, प्रभाकर त्रिपाठी एवं अमरजीत यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में समाजसेवी मीरा राय ने लोकगायक विजयबहादुर सिंह यादव को अभिनंदन पत्र एवं अंगवस्त्र से सम्मानित किया।
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