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गंगा के जलस्तर में बढोत्तरी से अटकी तटवर्ती इलाके के लोगों की सांस
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जमानिया। वर्तमान समय में गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों में दहशत व्याप्त हो गई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार पहली जुलाई से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। एक जुलाई को 54.380 मीटर, दो को 54.480 मीटर तथा शनिवार 11 जुलाई को जलस्तर 55.540 मीटर रहा। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार जलस्तर बढ़ने की रफ्तार अगर इसी तरह से बनी रही तो आने वाले दस दिन में गंगा का जलस्तर खतरे के चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर तक पहुंच सकता है।
जिले में खतरे का मध्य स्तर 63.105 मीटर और उच्च स्तर 65.220 मीटर है। जल का स्तर बढ़ने से लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी है। स्थानीय नगर का अधिकतर भाग कटान की भेंट चढ़ेगा। बता दें कि पूर्व की सपा सरकार की ओर से दो किलोमीटर से अधिक की बोल्डर बाइंडिंग का कार्य कराया गया है और तीन पक्का घाट बनाया जा चुका है ताकि कटान को रोका जा सके लेकिन अभी तक यह प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। गंगा क्षेत्र के राघोपुर बांड़, चितावनपट्टी बांड़, खिजिरपुर बांड़, मतसा बांड़, सब्बलपुर बांड़, रघुनाथपुर बांड़, देवरिया बांड़, देवरिया दियारा सहित कर्मनाशा के तटवर्ती इलाकों में गायघाट, धुस्का, दाउदपुर, डेवढ़ी, धरोहिया, रोहुणा आदि गांव के अधिक प्रभावित होने के आसार पैदा हो गए हैं। बढ़ते जलस्तर के साथ ही तहसील प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। अधिकारियों की लगातार कर्मचारियों के साथ बैठक हो रही है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने बताया कि गंगा और कर्मनाशा नदी के जल स्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और पूरी तरह से किसी भी आपदा के लिए प्रशासन पहले से तैयार है।
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जिले में खतरे का मध्य स्तर 63.105 मीटर और उच्च स्तर 65.220 मीटर है। जल का स्तर बढ़ने से लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी है। स्थानीय नगर का अधिकतर भाग कटान की भेंट चढ़ेगा। बता दें कि पूर्व की सपा सरकार की ओर से दो किलोमीटर से अधिक की बोल्डर बाइंडिंग का कार्य कराया गया है और तीन पक्का घाट बनाया जा चुका है ताकि कटान को रोका जा सके लेकिन अभी तक यह प्रयास ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। गंगा क्षेत्र के राघोपुर बांड़, चितावनपट्टी बांड़, खिजिरपुर बांड़, मतसा बांड़, सब्बलपुर बांड़, रघुनाथपुर बांड़, देवरिया बांड़, देवरिया दियारा सहित कर्मनाशा के तटवर्ती इलाकों में गायघाट, धुस्का, दाउदपुर, डेवढ़ी, धरोहिया, रोहुणा आदि गांव के अधिक प्रभावित होने के आसार पैदा हो गए हैं। बढ़ते जलस्तर के साथ ही तहसील प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। अधिकारियों की लगातार कर्मचारियों के साथ बैठक हो रही है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने बताया कि गंगा और कर्मनाशा नदी के जल स्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और पूरी तरह से किसी भी आपदा के लिए प्रशासन पहले से तैयार है।
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