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गंगा फिर उफनाई, खतरे का निशान पार करने को आतुर

Thu, 25 Aug 2022 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2022 11:54 PM IST
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Ganga roars again, eager to cross the danger mark
दो दिन तक जलस्तर में कमी के बाद गंगा एक बार फिर उफान पर है। विभिन्न डैम से पानी छोड़े जाने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह से नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसके चलते तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। बृहस्पतिवार की शाम को छह बजे जलस्तर 62.860 मीटर पर दर्ज किया गया। गंगा में दो सेमी प्रति घंटा बढ़ाव हो रहा है। जलस्तर में तेजी का यही क्रम रहा तो उम्मीद है कि देर रात तक गंगा जिले में खतरे के बिंदु 63.105 मीटर को पार कर जाएगी।
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करीब एक सप्ताह से गंगा चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से ऊपर बह रही थी। इसके चलते तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ गई थी। इस दौरान जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पानी घुसने लगा था। इसके बाद बीते दो दिनों से जलस्तर में कमी होने लगी थी और लोग राहत महसूस कर रहे थे। इसी बीच जबरदस्त बारिश के बाद राजस्थान के ढोलपुर डैम से 1831587 क्यूसेक तथा माता टाला डैम से 384954 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा एक बार फिर उफान पर है।
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शहर के ददरीघाट, कलेक्टर घाट आदि की ऊपरी सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। नवापुरा घाट पर भी पानी ऊपर दिख रहा है तथा बहाव भी काफी तेज था। कमोवेश इसी तरह की स्थिति कई ग्रामीण क्षेत्रों की भी है। सैदपुर, करंडा, जमानिया, सेवराई, रेवतीपुर, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल आदि ब्लाकों के कई गांवों में पानी घुसने लगा है। कठवामोड़ के पास नदी के उफान पर आ जाने से सैकड़ों बीघा फसल डूबी हुई है।
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आसपास के आधा दर्जन गांव पानी से घिर गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत शिविरों की स्थापना कर दी गई है। संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से चौकस है। जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। राजस्व कर्मियों की ओर से ध्वनि विस्तारक यंत्रों से प्रचार कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबी
गाजीपुर। बाढ़ से तटवर्ती क्षेत्र की सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई है। रेवतीपुर, सैदपुर, करंडा, मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, जमानिया क्षेत्र में बड़े पैमाने पर परवल, करेला, नेनुआ, लौकी आदि हरी सब्जियों के साथ ही अन्य फसलों की खेती की गई है।
मिर्च एवं टमाटर आदि फसलों की नर्सरी की रोपाई भी कई जगहों पर हो चुकी है। गंगा के उफनाने से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष आई बाढ़ में सभी फसल तबाह हो गई थी। अगर इस वर्ष भी बाढ़ आई तो किसानों की कमर ही टूट जाएगी। रेवतीपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के रामपुर, कल्याणपुर, नरायनापुर, नगदिलपुर, गोपालपुर, तिलवां, डेढ़गांवा आदि जगहों पर केला की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। नदी के जलस्तर में वृद्धि से संबंधित गांव में पानी घुसने की आशंका से फसल प्रभावित होने की उन्हें चिंता सताने लगी है।

गोमती भी उफान पर
औड़िहार। खतरा बिंदु छूने को बेताब गंगा का पानी अब धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ने लगा है। बाढ़ के चलते दर्जनों गांव के सैकड़ों बीघे में बोई गई फसलें जलमग्न हो गई हैं। दूसरी ओर गंगा के दबाव के चलते गोमती भी उफान पर है। अब नदी ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और वहां की बोई गई खरीफ की फसलों को जलमग्न कर दिया है। गंगा की बाढ़ से जहां रामपुर मांझा, मंझरिया, बंथरा, चकेरी, फुलवरिया, टोडरपुर के अलावा कोटघाट, कोल्हुआ टोला, आराजीगंज, जौहरगंज, औड़िहार, राम तवक्का, शादी-भादी, गोपालपुर, पटना के तटवर्ती इलाके में पानी ही पानी दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर गोमती की बाढ़ से कुसई, खरौना, गजाधरपुर, अमेहता, गौरी-गोरखा, तेतारपुर, गौरहट, मरबतपुर, बहुरा, गदनपुर, भुजाड़ी आदि गांव के लोग बाढ़ से सहमे हुए हैं। उप जिलाधिकारी ओमप्रकाश गुप्ता अपने अधीनस्थों के साथ बाढ़ पर सतर्क नजर बनाए हुए हैं। 27 छोटी-बड़ी नाव लगाकर मल्लाहों को भी सतर्क किया गया है।
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