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गंदगी से कराह रही पतित पावनी, नालों में नहीं लगी जाली

Tue, 19 Oct 2021 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Oct 2021 11:18 PM IST
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Ganga is moaning with dirt, there is no mesh in the drains
गाजीपुर। जिले में गंगा निर्मलीकरण की कोशिशों को पलीता लगाया जा रहा है। शहर क्षेत्र के छोटे-बड़े 29 नालों का पानी गंगा में सीधे गिराया जा रहा है। नालों पर जाली भी नहीं लगाई गई है। गंगा में प्रदूषण बढ़ने से जलचरों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।
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करीब एक वर्ष पूर्व जिला प्रशासन ने नगर पालिका को नालों में जाली लगाने का निर्देश दिया था। उन आदेश एवं निर्देश को ताक पर रखकर न तो नालों में जाली लगाई गई और न ही गंदे पानी को साफ करने की योजना बनाई गई। शहर का गंदा पानी बिना स्वच्छ हुए गंगा के पवित्र जल में मिलकर उसे प्रदूषित कर रहा है।
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नगर के 29 छोटे बड़े नाले गंगा को प्रदूषित करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जहां घाटों पर लोग अब नहाने से कतराने लगे हैं, वहीं गंगा को स्वच्छ बनाने का अभियान भी मूर्तरूप लेता नहीं दिख रहा है। नालों में जाली लगाने को लेकर पालिका प्रशासन अलग कोताही बरत रहा है। एक तरफ केंद्र एवं प्रदेश सरकार गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इसमें अपनी सहभागिता से दूर होते दिख रहे हैं।
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खासकर नवापुरा घाट, कलेक्ट्रेट घाट, ददरी घाट के पास नालों का पानी गंगा में गिर रहा है। मौधा: सैदपुर नगर पंचायत के शौचालयों और घरों से निकला हुआ गंदा पानी आठ नालों के जरिए पतित पावनी गंगा में गिरकर प्रतिदिन प्रदूषित कर रहा है। इस पर अब तक रोक लगाने की कोई पहल नहीं की गई है। हालांकि एनजीटी ने जिला प्रशासन को यह गाइडलाइन जारी की थी कि नगर पंचायत क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा में गिरने से पहले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए उसे साफ करने के बाद ही गिराया जाए। बीते दो सितंबर 2020 को तत्कालीन डीएम ओपी आर्य ने सैदपुर में गंगा में गिर रहे नालों का निरीक्षण करने के बाद इसकी जिम्मेदारी जल निगम के साथ ही नगर पंचायत को भी सौंपी थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन की तंद्रा अब तक नहीं टूट पाई है। पूरे नगर का फेंका गया कई टन कचरा और आसपास की दुकानों का अवशेष भी नाले के जरिए रोज गंगा में पहुंच रहा है।
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