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खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही है गंगा
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 17 Aug 2016 11:23 PM IST
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खतरे के निशान के पास पहुंचा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान एकाएक जलस्तर में तेजी से वृद्धि शुरू हो गई है। बुधवार की शाम चार बजे तक गंगा नदी खतरे के निशान 63.105 मीटर को पार करते हुए 63.110 मीटर पर पहुंच चुकी है। नदी का जलस्तर प्रति घंटा तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। तेजी से पानी बढ़ने के कारण एक बार फिर तटवर्ती इलाकों के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। मलसा, गरूआमकसूदपुर, भगीरथपुर, डुहियां, कासीमपुर, बहलोलपुर, ताडीघाट, मेदनीपुर, कालूपुर, युवराजपुर, रामपुर, पटकनियां, कल्यानपुर आदि तटवर्ती इलाके अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
पिछले एक माह से गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ाव और घटाव का सिलसिला जारी है। पांच दिन पहले लाल निशान पार कर चुकी नदी खतरे के निशान के नीचे आकर ठहर गई थी। इससे कई तटवर्ती इलाकों में पानी घुसने लगा था। साथ ही नाले के माध्यम से शहर के शास्त्री नगर में करीब तीन मकान बाढ़ के पानी से घिर गए थे। तीन दिन पहले गंगा खतरा के निशान के नीचे आकर ठहर गई थी, लेकिन मंगलवार की दोपहर 12 बजे से एक बार फिर से जलस्तर में बढ़ाव शुरू हो गया। बुधवार की शाम चार बजे गंगा खतरा के निशान को पार करते हुए पांच सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी। इससे खासकर तटवर्ती इलाकों के लोग बाढ़ की आशंका से डरे हुए हैं।
पिछले दिनों गंगा नदी के खतरा निशान पार करते ही कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए थे। इतना ही नहीं अभी भी कई मार्ग बाढ़ के पानी से डूबे हैं। अगर गंगा के जलस्तर में यही रफ्तार बना रहा तो किनारे के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस जाएगा। सुहवल संवाददाता के अनुसार गंगा में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रहे घटाव से जहां तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली थी। मंगलवार से एक बार फिर से जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने से बाढ़ की आशंका लोगों को परेशान करने लगी है।
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गंगा के तटवर्ती इलाकों में बसे लोग अभी भी अपना रैन बसेरा छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने में ही भलाई समझ रहे है। कब गंगा में फिर ऊफान हो जाय, ये कहा नहीं जा सकता। जानवरों को चारा के लाले पड़ गये है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भी अभी तक किसी तरह की सहायता मुहैया नहीं कराई गई है।, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों के समक्ष भोजन की विकट समस्या अब धीरे-धीरे उत्पन्न होने लगी है। तटवर्ती इलाकों मलसा, गरूआमकसूदपुर, भगीरथपुर, डुहियां, कासीमपुर, बहलोलपुर, ताडीघाट, मेदनीपुर, कालूपुर, युवराजपुर, रामपुर, पटकनियां, कल्यानपुर आदि इलाके अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
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पिछले एक माह से गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ाव और घटाव का सिलसिला जारी है। पांच दिन पहले लाल निशान पार कर चुकी नदी खतरे के निशान के नीचे आकर ठहर गई थी। इससे कई तटवर्ती इलाकों में पानी घुसने लगा था। साथ ही नाले के माध्यम से शहर के शास्त्री नगर में करीब तीन मकान बाढ़ के पानी से घिर गए थे। तीन दिन पहले गंगा खतरा के निशान के नीचे आकर ठहर गई थी, लेकिन मंगलवार की दोपहर 12 बजे से एक बार फिर से जलस्तर में बढ़ाव शुरू हो गया। बुधवार की शाम चार बजे गंगा खतरा के निशान को पार करते हुए पांच सेंटीमीटर ऊपर बहने लगी। इससे खासकर तटवर्ती इलाकों के लोग बाढ़ की आशंका से डरे हुए हैं।
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पिछले दिनों गंगा नदी के खतरा निशान पार करते ही कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए थे। इतना ही नहीं अभी भी कई मार्ग बाढ़ के पानी से डूबे हैं। अगर गंगा के जलस्तर में यही रफ्तार बना रहा तो किनारे के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस जाएगा। सुहवल संवाददाता के अनुसार गंगा में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रहे घटाव से जहां तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली थी। मंगलवार से एक बार फिर से जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने से बाढ़ की आशंका लोगों को परेशान करने लगी है।
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गंगा के तटवर्ती इलाकों में बसे लोग अभी भी अपना रैन बसेरा छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने में ही भलाई समझ रहे है। कब गंगा में फिर ऊफान हो जाय, ये कहा नहीं जा सकता। जानवरों को चारा के लाले पड़ गये है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भी अभी तक किसी तरह की सहायता मुहैया नहीं कराई गई है।, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों के समक्ष भोजन की विकट समस्या अब धीरे-धीरे उत्पन्न होने लगी है। तटवर्ती इलाकों मलसा, गरूआमकसूदपुर, भगीरथपुर, डुहियां, कासीमपुर, बहलोलपुर, ताडीघाट, मेदनीपुर, कालूपुर, युवराजपुर, रामपुर, पटकनियां, कल्यानपुर आदि इलाके अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।