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सैदपुर के 17 गांवों में मंडराने लगा बाढ़ का खतरा

Sat, 29 Aug 2020 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2020 10:45 PM IST
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Flood threat looms in 17 villages of Saidpur
गाजीपुर/औड़िहार। गंगा में आई बाढ़ के कारण पश्चिम से पूरब तक का डूब क्षेत्र तथा नदी किनारे का इलाका पानी से भरने लगा है। नदी नाले और खेतों के रास्ते अब आबादी की तरफ बढ़ने लगी हैं। जिला मुख्यालय अंतर्गत कलेक्टर घाट, स्टीमर घाट, ददरी घाट सहित दर्जनभर घाटों की सीढ़ियां डूबने लगी हैं। निचले इलकों में बाढ़ की आशंका को लेकर लोग चिंतित हैं। गंगा अपने रौद्र रूप की ओर अग्रसर हो रही हैं। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इतना ही नहीं गंगा समेत अन्य सहायक नदियां गोमती, गांगी, टोंस, मगई आदि का भी जलस्तर बढ़ने लगा है।
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औड़िहार संवाददाता के मुताबिक सैदपुर तहसील में गंगा नदी 1:30 से 2:00 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं। वर्तमान में नदी तलहटी से 74 मीटर ऊपर बह रही हैं। इनके बढ़ाव के चलते डूब क्षेत्र की फसलें बर्बाद होने लगी हैं। गंगा की बाढ़ से किनारे के लगभग 17 गांवों में धीरे- धीरे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। आलम यह है कि निचले इलाकों व नालों से होकर बाढ़ का पानी किनारे पर बोई गई सब्जियों एवं फसलों को नुकसान पहुंचाने लगा है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। फिर भी गंगा के किनारे के गांव औड़िहार, वराहरूप घाट, पटना, सादीभादी, राम तवक्का, जोहरगंज, कोल्हुआ टोला, पटना, फुलवारी, गायघाट, टोडरपुर, देवचंदपुर, चकेरी, रामपुर माझा, जेबल ,दुबैठा, आदि स्थानों के तराई क्षेत्र में बोई गई सब्जी की फसलें तथा रामतरोई, सरपुतिया, करेला, भिंडी, बोड़ा, सीताफल, लौकी, खीरा, चिचड़ा का अस्तित्व समाप्त होने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। इन गांव में हरे चारे, ज्वार बाजरे तथा मक्का की फसलों का नुकसान होने लगा है। दूसरी ओर औड़िहार के सन्निकट, पटना ग्राम में गोमती नदी सीधे आकर गंगा में मिलती हैं । अब गोमती भी गंगा के दबाव के चलते उफान लेने लगी है। गोमती के बाढ़ का खतरा किनारे के गांव पटना , हथौड़ा, कुसई खरौना, सिधौना, सूरजभान चक, नगरिया नाला, बहदिया, गौरी, तेतारपुर, गौरहट, बहुरा आदि पर मंडराने लगा है। तहसीलदार दिनेश कुमार ने बताया कि बाढ़ की विभीषिका के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। फिलहाल बाढ़ का कोई विशेष खतरा नहीं है। जरूरत पड़ने पर इससे निबटने के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है। बाढ़ पर नजर रखने के लिए अधीनस्थों को जगह -जगह लगाया गया है।
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अब बरियापार डैम से एक लाख 46 हजार क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा
भीमापार। पहाड़ों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश और अलग-अलग स्थानों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद मोक्षदायिनी गंगा का जलस्तर उफान पर है। खतरे के निशान के ऊपर बह रही गंगा में लोग बेखौफ़ होकर तेज गति से नौका संचालन कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी कोई रोकटोक नहीं है। बाढ़ अधिकारियों के अनुसार शनिवार को सुबह दस बजे से अब बांदा जिले के बरियापार डैम से भी एक लाख 46 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की शुरूआत हो चुकी है। यह पानी इस वर्ष में पहली बार केन नदी में छोड़ा गया है, जो यमुना में मिलकर प्रयागराज से गंगा में समाहित होगा और कुछ ही घंटों में लहुरीकाशी में भी अपना असर दिखाना शुरू कर देगा। जबकि हरिद्वार, नरोरा और कानपुर आदि बैराजों से 40 लाख 72 हजार 636 क्यूसेक पानी इसके पहले ही गंगा में डिस्चार्ज किया जा चुका है। तटवर्ती गांवों के लोग डिस्चार्ज किए गए इसी पानी को गंगा में आ रही बाढ़ की विभीषका का कारण बता रहे हैं। उधर सूत्रों के अनुसार अकेले कानपुर बैराज से 21 लाख 91 हजार 22 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा जा चुका है। इसके अलावा नरोरा बैराज से 11 लाख 756 और हरिद्वार से सात लाख 96 हजार 934 क्यूसेक पानी गंगा में डिस्चार्ज किया जा चुका है।
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