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Ghazipur News: हर 1.34 किमी. पर कमर को झटका दे रहे हैं बेतरतीब बने ठोकर
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एनएच 31 के अलावा कई राज्य मार्गों पर बना दिए गए हैं ऊंचे ठोकर
एक वर्ष पहले सीएम ने कमरतोड़ ब्रेकरों को हटाने का दिया था निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर । यों तो जिले से एनएच 31 के अलावा कई राज्य मार्ग गुजरे हैं। लेकिन इनपर चलने का अनुभव हर्गिज भी सुखद नहीं है। इन पर जगह-जगह बने कमरतोड़ स्पीड ब्रेकर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं। इन खतरनाक ब्रेकरों से गुजरते समय वाहन न सिर्फ डगमगा जाते हैं वहीं सवारी गाड़ियों में बैठे यात्रियों को जोर का झटका भी लगता है। रात के समय बने से स्पीड ब्रेकर और भी परेशान करते हैं। मानक के अभाव में कई बार ये चालकों को दिखाई नहीं देते जिससे हादसे में संभावना बनी रहती है। हाईवे पर ये हालात तब बने हुए हैं जब खुद मुख्यमंत्री की ओर से एक वर्ष पहले ही सड़कों पर कमरतोड़ ब्रेकर नहीं रखने का निर्देश दिया था। कई जगह तो मनमाने तरीके से कुछ ही दूरी में कई ऊंचे ब्रेकर बनाए दिए गए हैं। जगह-जगह बगैर मानकों के बने ये ब्रेकर सिर्फ सफर को कष्टदायक ही नहीं बना रहे हैं बल्कि यात्रियों की कमर भी तोड़ रहे हैं। बात करें तो कोटवां नारायनपुर से गाजीपुर तक 43 किमी की दूरी में कुल 32 ब्रेकर हैं जो ज्यादातर ग्रामीणों ने बनवाए हैं। यानी की औसतन हर 1.34 किमी. पर आपकी राह बाधित करने के लिए एक ब्रेकर बना हुआ है।
जिले से गुजरने वाले राजमार्ग खासकर एनएच 31 से अगर आपने सफर किया है तो खुद ही आप इनपर बने बेतरतीब स्पीड ब्रेकरों के झटकों से वाकिफ होंगे। हर कुछ किमी. पर बने ये ठोकर गुजरने वालों को खासा परेशान करते हैं। शायद ही ऐसा कोई ठोकर होगा जिससे आप बगैर झटका खाए गुजर जाएं।
करीब एक वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने रोड सेफ्टी को लेकर लखनऊ में हुई बैठक में कई निर्देश दिए थे। सीएम ने कहा था कि स्पीड ब्रेकर निर्माण करते समय लोगों की सुविधा का ध्यान भी रखें। स्पीड ब्रेकर टेबल टॉप हों, ताकि बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं, मरीजों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। खराब डिजाइनिंग की वजह से अक्सर लोग स्पीड ब्रेकर के किनारे से वाहन निकालने का प्रयास करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी होती हैं।
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इसके साथ ही स्पीड ब्रेकर को ‘कमर तोड़ू’ न बनाने की स्पष्ट हिदायत दी थी जो बीमार व्यक्तियों व गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक न हो । प्रदेश में जहां कहीं भी मानक के विपरीत स्पीड ब्रेकर बने हैं उन्हें तत्काल हटवा कर टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं। लेकिन आज भी एनएच 31 से लेकर अन्य राज्यमार्गो व शहरी क्षेत्र की सड़कों पर बने ऊंचे ब्रेकर ज्यों के त्यों हैं जो लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं। खासकर सवारी गाड़ियों के ब्रेकर से गुजरते समय यात्रियों को जोर का झटका लगता है। कई बार बाइक सवार ब्रेकर पार करते समय हादसे का शिकार होते हैं।
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43 किमी की दूरी में बने हैं 32 ब्रेकर
एनएच 31 पर नियमानुसार स्पीड ब्रेकर बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। केवल रेडियम पेंटिंग के साथ स्प्रिंग ब्रेकर लगाने का प्रावधान किया गया है। यह ब्रेकर गांवों के सामने व मोड़ के दोनों तरफ लगाए जाते हैं। इसके बावजूद एनएच 31 पर ऊंचे ब्रेकरों की भरमार है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोटवां नारायनपुर से गाजीपुर तक 43 किमी की दूरी में कुल 32 ब्रेकर हैं। ऐसे में वाहनों के संचालन में होने वाली दिक्कतों का अनुमान लगाया जा सकता है।
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केस- 01
एनएच 31 पर जगह-जगह ऊंचे ब्रेकर बने हुए हैं। अहिरौली गांव के पास तो 500 मीटर की दूरी में चार स्थानों पर तीन लेयर के ऊंचे ब्रेकर बनाए गए हैं। यह ब्रेकर वाहनों चालकों के लिए मुसीबत बनते हैं। इसके अलावा बाइक सवारों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
केस- 02
नगर क्षेत्र की सड़कों पर भी कई जगह ब्रेकर बने हुए हैं। महुआबाग में बने ऊंचे ब्रेकर के चलते वाहनों को सावधानी से पार करना पड़ता है।
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एनएच पर स्पीड ब्रेकर के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है। सड़क हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर निर्माण हुुआ था। गाजीपुर प्रशासन को ब्रेकर तोड़वाने को लेकर पत्र भेजा गया है। जल्द ही गाजीपुर क्षेत्र में भी ब्रेकर हटवाए जाएंगे।
- आर एस यादव, पीडी, एनएचएआई, वाराणसी।
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एक वर्ष पहले सीएम ने कमरतोड़ ब्रेकरों को हटाने का दिया था निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर । यों तो जिले से एनएच 31 के अलावा कई राज्य मार्ग गुजरे हैं। लेकिन इनपर चलने का अनुभव हर्गिज भी सुखद नहीं है। इन पर जगह-जगह बने कमरतोड़ स्पीड ब्रेकर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं। इन खतरनाक ब्रेकरों से गुजरते समय वाहन न सिर्फ डगमगा जाते हैं वहीं सवारी गाड़ियों में बैठे यात्रियों को जोर का झटका भी लगता है। रात के समय बने से स्पीड ब्रेकर और भी परेशान करते हैं। मानक के अभाव में कई बार ये चालकों को दिखाई नहीं देते जिससे हादसे में संभावना बनी रहती है। हाईवे पर ये हालात तब बने हुए हैं जब खुद मुख्यमंत्री की ओर से एक वर्ष पहले ही सड़कों पर कमरतोड़ ब्रेकर नहीं रखने का निर्देश दिया था। कई जगह तो मनमाने तरीके से कुछ ही दूरी में कई ऊंचे ब्रेकर बनाए दिए गए हैं। जगह-जगह बगैर मानकों के बने ये ब्रेकर सिर्फ सफर को कष्टदायक ही नहीं बना रहे हैं बल्कि यात्रियों की कमर भी तोड़ रहे हैं। बात करें तो कोटवां नारायनपुर से गाजीपुर तक 43 किमी की दूरी में कुल 32 ब्रेकर हैं जो ज्यादातर ग्रामीणों ने बनवाए हैं। यानी की औसतन हर 1.34 किमी. पर आपकी राह बाधित करने के लिए एक ब्रेकर बना हुआ है।
जिले से गुजरने वाले राजमार्ग खासकर एनएच 31 से अगर आपने सफर किया है तो खुद ही आप इनपर बने बेतरतीब स्पीड ब्रेकरों के झटकों से वाकिफ होंगे। हर कुछ किमी. पर बने ये ठोकर गुजरने वालों को खासा परेशान करते हैं। शायद ही ऐसा कोई ठोकर होगा जिससे आप बगैर झटका खाए गुजर जाएं।
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करीब एक वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने रोड सेफ्टी को लेकर लखनऊ में हुई बैठक में कई निर्देश दिए थे। सीएम ने कहा था कि स्पीड ब्रेकर निर्माण करते समय लोगों की सुविधा का ध्यान भी रखें। स्पीड ब्रेकर टेबल टॉप हों, ताकि बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं, मरीजों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। खराब डिजाइनिंग की वजह से अक्सर लोग स्पीड ब्रेकर के किनारे से वाहन निकालने का प्रयास करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी होती हैं।
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इसके साथ ही स्पीड ब्रेकर को ‘कमर तोड़ू’ न बनाने की स्पष्ट हिदायत दी थी जो बीमार व्यक्तियों व गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक न हो । प्रदेश में जहां कहीं भी मानक के विपरीत स्पीड ब्रेकर बने हैं उन्हें तत्काल हटवा कर टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं। लेकिन आज भी एनएच 31 से लेकर अन्य राज्यमार्गो व शहरी क्षेत्र की सड़कों पर बने ऊंचे ब्रेकर ज्यों के त्यों हैं जो लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं। खासकर सवारी गाड़ियों के ब्रेकर से गुजरते समय यात्रियों को जोर का झटका लगता है। कई बार बाइक सवार ब्रेकर पार करते समय हादसे का शिकार होते हैं।
43 किमी की दूरी में बने हैं 32 ब्रेकर
एनएच 31 पर नियमानुसार स्पीड ब्रेकर बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। केवल रेडियम पेंटिंग के साथ स्प्रिंग ब्रेकर लगाने का प्रावधान किया गया है। यह ब्रेकर गांवों के सामने व मोड़ के दोनों तरफ लगाए जाते हैं। इसके बावजूद एनएच 31 पर ऊंचे ब्रेकरों की भरमार है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोटवां नारायनपुर से गाजीपुर तक 43 किमी की दूरी में कुल 32 ब्रेकर हैं। ऐसे में वाहनों के संचालन में होने वाली दिक्कतों का अनुमान लगाया जा सकता है।
केस- 01
एनएच 31 पर जगह-जगह ऊंचे ब्रेकर बने हुए हैं। अहिरौली गांव के पास तो 500 मीटर की दूरी में चार स्थानों पर तीन लेयर के ऊंचे ब्रेकर बनाए गए हैं। यह ब्रेकर वाहनों चालकों के लिए मुसीबत बनते हैं। इसके अलावा बाइक सवारों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
केस- 02
नगर क्षेत्र की सड़कों पर भी कई जगह ब्रेकर बने हुए हैं। महुआबाग में बने ऊंचे ब्रेकर के चलते वाहनों को सावधानी से पार करना पड़ता है।
एनएच पर स्पीड ब्रेकर के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है। सड़क हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर निर्माण हुुआ था। गाजीपुर प्रशासन को ब्रेकर तोड़वाने को लेकर पत्र भेजा गया है। जल्द ही गाजीपुर क्षेत्र में भी ब्रेकर हटवाए जाएंगे।
- आर एस यादव, पीडी, एनएचएआई, वाराणसी।