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गंगा में डाल्फिन की गणना शुरू
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Tue, 06 Oct 2015 11:22 PM IST
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एसएन सिंह की अगुवाई में राजवारी स्थित गोमती नदी से मेरी गंगा मेरी
डाल्फिन गणना अभियान मंगलवार को शुरू हुआ।
मेरी गंगा मेरी डालफिन अभियान 5 अक्तूबर से 9 अक्तूबर तक मोटरवोट के माध्यम से गाजीपुर एवं बलिया में चलेगा। इस अभियान के माध्यम से एक जन जागरण चलाकर जनता में इन जीवों के द्वारा पर्यावरण में इनकी भूमिका का महत्व बताया जाएगा।
गंगा और उसकी सहायक नदियां जैसे यमुना, चंबल और घाघरा में सूसों के संख्या की गणना की जाएगी। डालफिन का महत्व लगभग 2200 वर्ष पहले सम्राट अशोक ने दर्शाया था।
भारत में वर्ष 1982 में डालफिन की कुल लगभग चार से पांच हजार के पास थी। वर्तमान समय में इसकी संख्या दो हजार के आस-पास ही रह गई है।
इन्हें भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के शेड्यूल में शामिल हो गई है। इस अभियान में लगी टीम की ओर से जगह-जगह गंगा के किनारे के गांवों में इसका महत्व भी बताया जाएगा। अभियान के तहत टीम के साथ कार्य करने वालों में आरपी यादव, अरुण कुमार उपाध्याय,
मेरी गंगा मेरी डालफिन अभियान 5 अक्तूबर से 9 अक्तूबर तक मोटरवोट के माध्यम से गाजीपुर एवं बलिया में चलेगा। इस अभियान के माध्यम से एक जन जागरण चलाकर जनता में इन जीवों के द्वारा पर्यावरण में इनकी भूमिका का महत्व बताया जाएगा।
गंगा और उसकी सहायक नदियां जैसे यमुना, चंबल और घाघरा में सूसों के संख्या की गणना की जाएगी। डालफिन का महत्व लगभग 2200 वर्ष पहले सम्राट अशोक ने दर्शाया था।
भारत में वर्ष 1982 में डालफिन की कुल लगभग चार से पांच हजार के पास थी। वर्तमान समय में इसकी संख्या दो हजार के आस-पास ही रह गई है।
इन्हें भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के शेड्यूल में शामिल हो गई है। इस अभियान में लगी टीम की ओर से जगह-जगह गंगा के किनारे के गांवों में इसका महत्व भी बताया जाएगा। अभियान के तहत टीम के साथ कार्य करने वालों में आरपी यादव, अरुण कुमार उपाध्याय,