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कंपनी को क्षतिपूर्ति देने का आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 30 Mar 2016 11:24 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : file photo
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क्षतिग्रस्त ट्रक को न बनवाने के एक मामले में उपभोक्ता फोरम ने मान ट्रक इंडिया कंपनी को नौ लाख रुपये क्षतिपूर्ति पीड़ित शादियाबाद थाना क्षेत्र के चौकड़ी गांव निवासी ट्रक मालिक मनोज कुमार यादव को देने का आदेश दिया है। दो माह के अंदर धनराशि न देने पर 9 प्रतिशत के वार्षिक ब्याज दर से भुगतान करने का आदेश दिया है।
वादी मनोज कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने बीते वर्ष 2012 में वाराणसी में स्थित मान ट्रक इंडिया लिमिटेड कंपनी से ट्रक खरीदा था। ट्रक खरीदते समय कंपनी के कर्मचारियों ने बताया था कि लोडिंग के समय ट्रक साढ़े तीन लीटर प्रति किलोमीटर और बिना लोडिंग के पांच लीटर प्रति किलोमीटर की दर से डीजल की खपत होगी लेकिन तीन वर्षों तक चले ट्रक का एवरेज कंपनी के दावे से कम रहा। इसी दौरान अचानक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों से ट्रक की मरम्मत कराने के लिए गुहार लगाई लेकिन कंपनी के कर्मचारियों ने इसे एक सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम में मुकदमा पंजीकृत कराया। पीड़ित ने बताया कि बीते 28 मार्च को न्यायालय ने कंपनी को क्षतिग्रस्त ट्रक का मुआवजा 9 लाख रूपये दो माह के अंदर देने का आदेश दिया है। साथ ही न्यायालय ने कंपनी को यह भी निर्देश दिया है कि निर्धारित अवधि पर मुआवजा नहीं देने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से मुआवजा भुगतान करना पड़ेगा।
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वादी मनोज कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने बीते वर्ष 2012 में वाराणसी में स्थित मान ट्रक इंडिया लिमिटेड कंपनी से ट्रक खरीदा था। ट्रक खरीदते समय कंपनी के कर्मचारियों ने बताया था कि लोडिंग के समय ट्रक साढ़े तीन लीटर प्रति किलोमीटर और बिना लोडिंग के पांच लीटर प्रति किलोमीटर की दर से डीजल की खपत होगी लेकिन तीन वर्षों तक चले ट्रक का एवरेज कंपनी के दावे से कम रहा। इसी दौरान अचानक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
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उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों से ट्रक की मरम्मत कराने के लिए गुहार लगाई लेकिन कंपनी के कर्मचारियों ने इसे एक सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम में मुकदमा पंजीकृत कराया। पीड़ित ने बताया कि बीते 28 मार्च को न्यायालय ने कंपनी को क्षतिग्रस्त ट्रक का मुआवजा 9 लाख रूपये दो माह के अंदर देने का आदेश दिया है। साथ ही न्यायालय ने कंपनी को यह भी निर्देश दिया है कि निर्धारित अवधि पर मुआवजा नहीं देने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से मुआवजा भुगतान करना पड़ेगा।
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