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कोर्ट का डंडा : तहसीलदार सहित पांच पर मुकदमा
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:58 PM IST
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जमानिया। कोतवाली क्षेत्र के सब्बलपुर खुर्द गांव में सस्ते गल्ले की दुकान के आवंटन में लापरवाही और अनियमितता को देखते हुए सीजेएम न्यायालय के आदेश पर मंगलवार की देर शाम पुुलिस ने तहसीलदार, सेकेट्री, लेखपाल, ग्राम प्रधान और कोटेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
सब्बलपुर गांव निवासी रामलाल राम ने दुकान के आवंटन में अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए। लेकिन जब अधिकारी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। तब उसने न्याय की गुुहार न्यायालय से लगाई। इस पर न्यायालय ने बीते 28 नवंबर को तहसीलदार जमानिया, सेक्रेट्री मनोज कुमार यादव, लेखपाल विजय सिंह यादव, ग्राम प्रधान अखिलेश उपाध्याय, कोटेदार अनिल कुमार के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। लेकिन हमेशा की तरह हिला-हवाली करने वाली पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया। वहीं आईजीआरएस में पुन: राम लाल ने शिकायत दर्ज की। इसके बाद देर शाम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। राम लाल का आरोप है कि बीते 3 अगस्त को गांव में सस्ते गल्ले की दुुकान के आवंटन के लिए खुली बैठक का आयोजन किया गया। इसमें ग्राम प्रधान और सेक्रेट्री द्वारा पूर्व से आरक्षण की सूचना ग्रामीणों को नहीं दी गयी थी। जिस पर ग्रामीण बैठक से उठ कर चले गए, वहीं बैठक में मौजूद ग्रामीणों का हस्ताक्षर रजिस्टर पर चालाकी से करा लिया गया था। इतना ही नही नियम को दरकिनार कर एक पिछड़ी जाति के अनिल को सस्ते गल्ले की दुकान का आवंटन कर दिया गया। जबकि कोटा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए सुरक्षित है। वहीं तहसील द्वारा खरवार जाति दिखाकर अनुसूचित जनजाति में जारी कर दिया गया। रामलाल राम ने पहले तो अधिकारीयो ं के समक्ष साक्ष्य रखे और फिर जब कार्यवाई नहीं हुई तो सीजेएम न्यायालय में गुहार लगाई। जिस पर कोर्ट ने 167, 419, 420, 467, 468, 471 तहसीलदार जमानिया, कोटेदार, ग्राम प्रधान, सेकेट्री, और लेखपाल पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया और रामलाल कोतवाली का चक्कर काटते रहे। जब एक माह बीत गया तो बीते 5 जनवरी को शिकायकर्ता ने आईजीआरएस के माध्यम से पुलिस अधिक्षक को ऑन लाईन शिकायत की गई। तब जाकर स्थानीय कोतवाली ने मुकदमा दर्ज किया। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि इस संबंध में उपजिलाधिकारी से वार्ता करने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है। साथ उपजिलाधिकारी सत्य प्रकाश मिश्रा ने बताया कि इस मामले में प्रति आवेदन प्राप्त हुआ है। इस पर कार्यवाई की जा रही है।
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सब्बलपुर गांव निवासी रामलाल राम ने दुकान के आवंटन में अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए। लेकिन जब अधिकारी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। तब उसने न्याय की गुुहार न्यायालय से लगाई। इस पर न्यायालय ने बीते 28 नवंबर को तहसीलदार जमानिया, सेक्रेट्री मनोज कुमार यादव, लेखपाल विजय सिंह यादव, ग्राम प्रधान अखिलेश उपाध्याय, कोटेदार अनिल कुमार के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। लेकिन हमेशा की तरह हिला-हवाली करने वाली पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया। वहीं आईजीआरएस में पुन: राम लाल ने शिकायत दर्ज की। इसके बाद देर शाम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। राम लाल का आरोप है कि बीते 3 अगस्त को गांव में सस्ते गल्ले की दुुकान के आवंटन के लिए खुली बैठक का आयोजन किया गया। इसमें ग्राम प्रधान और सेक्रेट्री द्वारा पूर्व से आरक्षण की सूचना ग्रामीणों को नहीं दी गयी थी। जिस पर ग्रामीण बैठक से उठ कर चले गए, वहीं बैठक में मौजूद ग्रामीणों का हस्ताक्षर रजिस्टर पर चालाकी से करा लिया गया था। इतना ही नही नियम को दरकिनार कर एक पिछड़ी जाति के अनिल को सस्ते गल्ले की दुकान का आवंटन कर दिया गया। जबकि कोटा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए सुरक्षित है। वहीं तहसील द्वारा खरवार जाति दिखाकर अनुसूचित जनजाति में जारी कर दिया गया। रामलाल राम ने पहले तो अधिकारीयो ं के समक्ष साक्ष्य रखे और फिर जब कार्यवाई नहीं हुई तो सीजेएम न्यायालय में गुहार लगाई। जिस पर कोर्ट ने 167, 419, 420, 467, 468, 471 तहसीलदार जमानिया, कोटेदार, ग्राम प्रधान, सेकेट्री, और लेखपाल पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया और रामलाल कोतवाली का चक्कर काटते रहे। जब एक माह बीत गया तो बीते 5 जनवरी को शिकायकर्ता ने आईजीआरएस के माध्यम से पुलिस अधिक्षक को ऑन लाईन शिकायत की गई। तब जाकर स्थानीय कोतवाली ने मुकदमा दर्ज किया। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि इस संबंध में उपजिलाधिकारी से वार्ता करने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है। साथ उपजिलाधिकारी सत्य प्रकाश मिश्रा ने बताया कि इस मामले में प्रति आवेदन प्राप्त हुआ है। इस पर कार्यवाई की जा रही है।
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