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फांसी लगाकर सफाई कर्मी ने दी जान
Updated Wed, 27 Sep 2017 11:23 PM IST
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जमानिया। नगर पालिका क्षेत्र के चौधरी मोहल्ला निवासी एक सफाई कर्मी ने मंगलवार की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के भेज दिया।
चौधरी मुहल्ला निवासी नथुनी रावत का पुत्र धर्मेंद्र रावत उर्फ मोनू (30) रेवतीपुर ब्लाक के त्रिलोकपुर गांव में सफाई कर्मचारी था। रोज की तरह मंगलवार की रात भी वह अपने कमरे में सोया, पत्नी संजू देवी दूसरे कमरे में सोई थी। बुधवार की सुबह करीब पांच बजे पत्नी मोनू को जगाने के लिए कमरे में पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। उसने दरवाजा खोलने के लिए कई बार आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। परिवार के लोग जब दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तो देखा कि मोनू का शव लूंगी के फंदे के सहारे पंखे से लटक रहा था। लोगों की मदद से परिजनों ने शव को नीचे उतारा। कोतवाल राजाराम ने बताया कि मृतक के पिता नथुनी रावत ने बताया कि धर्मेंद्र की मानसिक हालत ठीक नहीं थी।
पति धर्मेंद्र की मौत से पत्नी संजू रो-रोकर बेहाल था। वह रोते-रोते कभी पूरी तरह से खामोश हो जा रही थी, तो कभी अपने बच्चों अशोक (6), आकाश (5), विकास (3) और गुड्डी (एक वर्ष) के चेहरा देख दहाड़े मारकर चीखने-चिल्लाने लग रही थी। पत्नी संजू ने बताया कि तीन माह से वेतन नहीं मिल रहा था। इससे धर्मेन्द्र परेशान रहता था। पैसे के अभाव में परिवार चलाने में परेशानी होती थी, इसको लेकर परिवार वालों से धर्मेंद्र की कहासुनी के साथ ही नोक-झोंक भी होती थी।
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चौधरी मुहल्ला निवासी नथुनी रावत का पुत्र धर्मेंद्र रावत उर्फ मोनू (30) रेवतीपुर ब्लाक के त्रिलोकपुर गांव में सफाई कर्मचारी था। रोज की तरह मंगलवार की रात भी वह अपने कमरे में सोया, पत्नी संजू देवी दूसरे कमरे में सोई थी। बुधवार की सुबह करीब पांच बजे पत्नी मोनू को जगाने के लिए कमरे में पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। उसने दरवाजा खोलने के लिए कई बार आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। परिवार के लोग जब दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तो देखा कि मोनू का शव लूंगी के फंदे के सहारे पंखे से लटक रहा था। लोगों की मदद से परिजनों ने शव को नीचे उतारा। कोतवाल राजाराम ने बताया कि मृतक के पिता नथुनी रावत ने बताया कि धर्मेंद्र की मानसिक हालत ठीक नहीं थी।
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पति धर्मेंद्र की मौत से पत्नी संजू रो-रोकर बेहाल था। वह रोते-रोते कभी पूरी तरह से खामोश हो जा रही थी, तो कभी अपने बच्चों अशोक (6), आकाश (5), विकास (3) और गुड्डी (एक वर्ष) के चेहरा देख दहाड़े मारकर चीखने-चिल्लाने लग रही थी। पत्नी संजू ने बताया कि तीन माह से वेतन नहीं मिल रहा था। इससे धर्मेन्द्र परेशान रहता था। पैसे के अभाव में परिवार चलाने में परेशानी होती थी, इसको लेकर परिवार वालों से धर्मेंद्र की कहासुनी के साथ ही नोक-झोंक भी होती थी।
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