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...और गूंजती रही मृतकों के घर वालों की चीत्कार
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भांवरकोल (गाजीपुर)। रोज की तरह सुबह भी कबीरपुर गांव में शांति का माहौल था। इसी बीच करीब साढ़े छह बजे जैसे ही सड़क से उठा शोर गांव में पहुंच गया। एनएच किनारे पिकअप ने गांव के चार लोगों को टक्कर मारती हुई भाग निकली। हादसे के बाद चहुंओर अशांति फैल गई। जिससे लोग मौके की तरफ दौड़ पड़े। सड़क दुर्घटना में किशोर तथा युवक की मौत हो गई। इससे पूरा गांव शोक में डूब गया और मृतकों के घर कोहराम मचा हुआ है। गांव की शांत वातावरण में लोगों की चीख-पुकार गूंजने लगी।
इलाके के कबीरपुर गांव निवासी बृजकिशोर उपाध्याय (35) और रामेश्वर उर्फ राजू उपाध्याय (14) सुबह खेत के लिए घर से निकले थे। परिवार के लोग उनके अब-तब घर आने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच सुबह करीब साढ़े छह बजे जैसे ही उनके घर से खबर पहुंची कि पिकअप ने बृजकिशोर, रामेश्वर सहित अन्य लोगों को टक्कर मार दी है, परिजन बदहवास हो मौके की तरफ दौड़ पड़े। दुर्घटना में बृजकिशोर और रामेश्वर की मौत से घर में कोहराम मच गया। परिवार के लोग चीख-पुकार करने लगे। बृजकिशोर की पत्नी संगीता देवी सहित परिवार के अन्य लोग दहाड़े मार कर चीखने-चिल्लाने लगे। पत्नी बार-बार बिलखते हुए यह कह रही थी कि अब पुत्री मान्या और एक वर्षीय मुन्ना का पालन-पोषण कैसे करेगी। लोगों द्वारा लाख सांत्वना देने के बाद भी उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर राजू की मां अंजू देवी रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। दोनों परिवार को लोग दिलासा देने में जुटे रहे। पूरे दिन मृतक के परिजनों के रोने की आवाज और सिसकियां गांव के शांत वातावरण में तैरती रहीं। मकर संक्रांति पर्व के एक दिन पूर्व दुर्घटना के लिए लोग ऊपर वाले की दुहाई देते रहे।
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इलाके के कबीरपुर गांव निवासी बृजकिशोर उपाध्याय (35) और रामेश्वर उर्फ राजू उपाध्याय (14) सुबह खेत के लिए घर से निकले थे। परिवार के लोग उनके अब-तब घर आने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच सुबह करीब साढ़े छह बजे जैसे ही उनके घर से खबर पहुंची कि पिकअप ने बृजकिशोर, रामेश्वर सहित अन्य लोगों को टक्कर मार दी है, परिजन बदहवास हो मौके की तरफ दौड़ पड़े। दुर्घटना में बृजकिशोर और रामेश्वर की मौत से घर में कोहराम मच गया। परिवार के लोग चीख-पुकार करने लगे। बृजकिशोर की पत्नी संगीता देवी सहित परिवार के अन्य लोग दहाड़े मार कर चीखने-चिल्लाने लगे। पत्नी बार-बार बिलखते हुए यह कह रही थी कि अब पुत्री मान्या और एक वर्षीय मुन्ना का पालन-पोषण कैसे करेगी। लोगों द्वारा लाख सांत्वना देने के बाद भी उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर राजू की मां अंजू देवी रोते-रोते बेहोश हो जा रही थी। दोनों परिवार को लोग दिलासा देने में जुटे रहे। पूरे दिन मृतक के परिजनों के रोने की आवाज और सिसकियां गांव के शांत वातावरण में तैरती रहीं। मकर संक्रांति पर्व के एक दिन पूर्व दुर्घटना के लिए लोग ऊपर वाले की दुहाई देते रहे।
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