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कोरोना: 65 फीसदी ट्रेनें, तो 85 फीसदी कम हुए यात्री
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गाजीपुर। कोरोना संकट काल में विभिन्न रूटों पर ट्रेनों की संख्या घटने से यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि प्रतिदिन 3000 से 3500 की जगह अब 450 से 500 यात्री ही ट्रेनों में सफर कर रहे हैं। ऐसे में रेलवे स्टेशनों की आय पर भी व्यापक असर पड़ा है। ट्रेनों की संख्या पहले जहां 17 थी, अब केवल छह से सात ट्रेनें ही संचालित हो रही हैं। विभाग की माने तो अनारक्षित टिकटों की बिक्री से एक माह की कमाई करीब एक करोड़ थी। अब 18 से 20 लाख तक सिमट चुकी है।
वाराणसी- बलिया रेलखंड की बात की जाए तो सिटी रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाले सद्भावना एक्सप्रेस, लखनऊ-छपरा, बरौनी-गोदिया, गाजीपुर-कटरा, सोनपुर-अंबाला, छपरा-वाराणसी पैसेंजर, गाजीपुर-वाराणसी पैसेंजर, बलिया-वाराणसी पैसेंजर, गाजीपुर प्रयागराज पैसेंजर सहित एक दर्जन से ऊपर ट्रेनों का संचालन होता था। इस रूट से कई स्पेशल एवं साप्ताहिक ट्रेनें भी संचालित होती थीं। कोरोना संकट काल के बाद ट्रेनों की संख्या कम कर दी गई। अब सिर्फ आधा दर्जन एक्सप्रेस ट्रेन का ही संचालन हो रहा है। ट्रेनों में सिर्फ आरक्षित टिकटों से सफर करने की वजह से भी यात्रियों की संख्या सिमट गई है। कोरोना संकट काल से पहले सिटी रेलवे स्टेशन से बीते जनवरी, फरवरी व 22 मार्च तक प्रतिदिन साढ़े तीन हजार से चार हजार यात्रियों ने गतंव्य के लिए सफर किया था। जबकि वर्तमान समय में ट्रेनों की कमी व आरक्षण के चलते यह आंकड़ा प्रतिदिन 450 से 500 के बीच ही सिमट चुका है। आरक्षण नहीं मिल पाने की स्थिति में तो लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री टिकट बुक कराने में जुटे हैं, जबकि लखनऊ व कानपुर तक यात्रा करने वाले रोडवेज बसों का सहारा ले रहे हैं। यही नहीं पैसेंजर ट्रेनों का संचालन नहीं होने से निजी व सवारी वाहनों पर भार ज्यादा है।
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वाराणसी- बलिया रेलखंड की बात की जाए तो सिटी रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाले सद्भावना एक्सप्रेस, लखनऊ-छपरा, बरौनी-गोदिया, गाजीपुर-कटरा, सोनपुर-अंबाला, छपरा-वाराणसी पैसेंजर, गाजीपुर-वाराणसी पैसेंजर, बलिया-वाराणसी पैसेंजर, गाजीपुर प्रयागराज पैसेंजर सहित एक दर्जन से ऊपर ट्रेनों का संचालन होता था। इस रूट से कई स्पेशल एवं साप्ताहिक ट्रेनें भी संचालित होती थीं। कोरोना संकट काल के बाद ट्रेनों की संख्या कम कर दी गई। अब सिर्फ आधा दर्जन एक्सप्रेस ट्रेन का ही संचालन हो रहा है। ट्रेनों में सिर्फ आरक्षित टिकटों से सफर करने की वजह से भी यात्रियों की संख्या सिमट गई है। कोरोना संकट काल से पहले सिटी रेलवे स्टेशन से बीते जनवरी, फरवरी व 22 मार्च तक प्रतिदिन साढ़े तीन हजार से चार हजार यात्रियों ने गतंव्य के लिए सफर किया था। जबकि वर्तमान समय में ट्रेनों की कमी व आरक्षण के चलते यह आंकड़ा प्रतिदिन 450 से 500 के बीच ही सिमट चुका है। आरक्षण नहीं मिल पाने की स्थिति में तो लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री टिकट बुक कराने में जुटे हैं, जबकि लखनऊ व कानपुर तक यात्रा करने वाले रोडवेज बसों का सहारा ले रहे हैं। यही नहीं पैसेंजर ट्रेनों का संचालन नहीं होने से निजी व सवारी वाहनों पर भार ज्यादा है।
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