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अतिक्रमण इस कदर, सुबक रहा पूरा शहर

Sat, 29 Jun 2019 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jun 2019 12:15 AM IST
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civic animities
गाजीपुर। जिला मुख्यालय पर तेजी से बढ़ते अतिक्रमण के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोगों का शहर में चलना दूभर हो गया है। इसके चलते शहर आने वाले लोग मुख्य बाजार में जाने से कतराने लगे हैं। सब कुछ जानते हुए नगर पालिका और जिला प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में अतिक्रमण के शिकंजे में शहर कसता जा रहा है। इसकी चपेट में पूरा शहर आ चुका है। शहर की संकरी गलियों से लेकर मुख्य मार्गो पर आवागमन कर रहे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हर समय जाम में दोपहिया से लेकर चार पहिया तक फंसे रहते हैं। सालों से यह समस्या जस की तस बनी है। इस वजह से शहर की घनी आबादी में रहने वाले खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं। आम आदमी पर चलने वाला नियम-कानून का डंडा इन अतिक्रमणकारियों पर कभी नहीं चलता। नगरपालिका और जिला प्रशासन से मिली छूट के कारण अतिक्रमण करने वालों का हौसला बढ़ता जा रहा है। फुटपाथ दुकनदारों की मनमानी का खामियाजा आवागमन करने वाले आम राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।
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नगर के मिश्रबाजार, लालदरवाजा, प्रकाशटाकीज, चीतनाथ, नखास, महुआबाग, लंका, ओपियम फैक्ट्री सहित अन्य मार्गों पर दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। आलम यह है कि सड़क के किनारे के दुकानदार अपनी दुकानों को सड़क की पटरियों के साथ ही सड़क तक फैलाए हुए हैं। चीतनाथ, मिश्रबाजार और लंका पर ठेला-खोमचा वालों का पटरियों सहित सड़क पर कब्जा रहता है। इसकी वजह से सड़क संकरी हो जा रही है और आवागमन में अवरोध उत्पन्न हो रहा है। अतिक्रमण की वजह से इन मार्गों पर प्रतिदिन आवागमन करने वालों को जाम का सामना करना पड़ रहा है।
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अतिक्रमणकारियों के मनमानी का हाल यह है कि जाम लगने के दौरान भी वे सड़क पर रखे गए सामानों को नहीं हटाते है, जिससे आवागमन सुचारू हो सके। यदि जाम में फंसे लोग अतिक्रमण का विरोध करते है तो दुकानदार उनसे मारपीट पर अमादा हो जाते है। मिश्रबाजार, लंका, चीतनाथ और स्टेशन रोड और कचहरी पर ठेला-खोमचा वालों का कब्जा रहता है, जिससे आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है लोगों की रफ्तार थमती है। खास बात यह है कि ऐसे अतिक्रमणकारियों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भी नजर पड़ती है, लेकिन वह नियम-कानून का मजाक उड़ाने वाले दुकानदारों को नियम-कानून बताना मुनासिब नहीं समझते है, जिसका खामियाजा आवागमन करने वालों को भुगतना पड़ रहा है। अतिक्रमण के खिलाफ कभी-कभी अभियान चलाकर नगरपालिका अतिक्रमण हटाने का कोरम पूरा कर लेती है और कुछ दिनों बाद फिर से पहले जैसी स्थिति हो जाती है।
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