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नहीं चेते तो गर्मी में होगा पेयजल संकट
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:11 PM IST
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पानी पर खुलासा
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तापमान बढ़ने के साथ ही भू-स्तर गिरने से इस बार भी गर्मी में पेयजल संकट गहराएगा। वर्तमान में गंगा अपना पाट छोड़ने लगी हैं। कहीं-कहीं गंगा के बीच रेत के टीले अभी से दिखाई देने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन के चलते इस साल अपेक्षित बारिश नहीं हुई और न ही ठंडी पड़ी। ऐसे में इस बार गर्मी का प्रभाव भी अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। तापमान में वृद्धि और तल्ख धूप के चलते गर्मी ने दस्तक दे दी है लेकिन पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में काम शुरू नहीं किया जा सका है।
गंगा, गोमती, बेसो, मंगई, भैंसही, कर्मनाशा, उदंती आदि नदियों से घिरे गाजीपुर जिले में जल श्रोत नदियां, तालाब, मानसूनी बारिश है। बरसात के मौसम में उफनाने वाली इन नदियों में गंगा को छोड़ अन्य नदियां जलविहीन हो जाती हैं। गंगा भी पाट छोड़कर सिमट जाती हैं। भौगोलिक रूप से समृद्ध इस जिले में भी शहरीकरण, गांवों में भी बनते बहुमंजिले पक्के मकान और नई कालोनियों के विकास के चलते तमाम तालाबों पर कब्जे कर लिए गए हैं। जो पुराने तालाब बचे भी हैं, उनके संरक्षण पर न तो ध्यान दिया जा रहा है और न ही उनको सुंदर बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों का भी अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है।
गर्मी शुरू हो गई है लेकिन मनरेगा के तहत खडोदे गए तालाबों में पानी नहीं भरा गया है। गर्मी में तालाबों के सूखने के कारण गांवों में जानवरों को पिलाने के लिए पानी का घोर संकट हो जाता है। भूजल स्तर गिरने से हैंडपंप भी पानी का साथ छोड़ देते हैं। सरकारी स्तर पर लगाए गए हैंडपंपों की बोरिंग सौ से डेढ़ फीट गहरी है जबकि गर्मी में जलस्तर काफी गिर जाता है जिससे अधिकतर हैंडपंपों से पानी नहीं आता है। मौजूदा समय में जिले के सभी 16 ब्लाकों में सरकारी हैंडपंप खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं। कई हैंडपंप रीबोरिंग के लायक हैं लेकिन इन हैंडपंपों की मरम्मत या रीबोरिंग नहीं कराई गई है। अगर नगर पालिका, नगर पंचायतों और जल निगम की ओर से खराब हैंडपंप दुरुस्त नहीं कराए गए तो गर्मी में घोर पेयजल संकट होगा। दो दर्जन से अधिक नलकूपों में तकनीकी गड़बड़ी बताई जा रही है।
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पेयजल संकट शहर क्षेत्र में भी बना रहता है। गर्मी के दिनों में घंटों बिजली कटौती के चलते पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है जिसके चलते मुहल्लों में लगे हैंडपंपों पर पानी लेने के लिए कतार लग जाती है। शहर क्षेत्र में पेयजल योजनाओं पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। नगर क्षेत्र की आबादी दो लाख 73 हजार है लेकिन पेयजल आपूर्ति के सिर्फ दस हजार हैं। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए नगर पालिका की ओर से टाउनहाल और लंका में दो नए ट्यूबवेल लगाने की योजना प्रस्तावित है लेकिन यह कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। शहर के तड़बनवा, रूई मंडी के आधे से अधिक इलाके में पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी है जिसके चलते यहां की सत्तर फीसदी आबादी को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। शहर के चीतनाथ, गोलाघाट और महाजन टोली में एक-एक मिनी ट्यूबवेल लगाने का कार्य अभी लंबित है।शहर में साठ खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए नगर पालिका ने नगर निगम को लिखा है। इस बार गर्मी में पानी के संकट को दूर करने के लिए दो हजार नए हैंडपंप लगाए जाने हैं। नगर पालिका की बैठक में इसका प्रस्ताव पास हो चुका है।
नगर पालिका परिषद के चेयरमैन विनोद अग्रवाल ने कहा कि मांग के अनुरूप नागरिकों को पेयजल मुहैया कराया जाता है। गर्मी के मौसम में घंटों बिजली कटौती से पेयजल आपूर्ति बाधित होती है जिससे नागरिकों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ता है। इस समस्या तो दूर करने के लिए एक मोबाइल जेनरेटर की व्यवस्था की गई है। एक और मोबाइल जेनरेटर के लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा। वर्तमान में दो ट्यूबवेल पर जेनरेटर लगे हैं। अन्य ट्यूबवेल पर जेनरेटर लगाने के लिए जेनरेटर का टेंडर निकाला गया था लेकिन टेंडर मार्केट रेट से अधिक होने के कारण निरस्त कर दिया गया। फिर टेंडर निकालकर जेनरेटर की खरीद की जाएगी। कहा कि केंद्र के तेरहवें वित्त से प्रत्येक साल दो करोड़ रुपये मिलते हैं। इस धन से जलकल, सफाई और ईगवर्नेस का काम किया जाता है। इसी के तहत तीन ट्यूबवेल पास हुआ है।
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गंगा, गोमती, बेसो, मंगई, भैंसही, कर्मनाशा, उदंती आदि नदियों से घिरे गाजीपुर जिले में जल श्रोत नदियां, तालाब, मानसूनी बारिश है। बरसात के मौसम में उफनाने वाली इन नदियों में गंगा को छोड़ अन्य नदियां जलविहीन हो जाती हैं। गंगा भी पाट छोड़कर सिमट जाती हैं। भौगोलिक रूप से समृद्ध इस जिले में भी शहरीकरण, गांवों में भी बनते बहुमंजिले पक्के मकान और नई कालोनियों के विकास के चलते तमाम तालाबों पर कब्जे कर लिए गए हैं। जो पुराने तालाब बचे भी हैं, उनके संरक्षण पर न तो ध्यान दिया जा रहा है और न ही उनको सुंदर बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों का भी अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है।
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गर्मी शुरू हो गई है लेकिन मनरेगा के तहत खडोदे गए तालाबों में पानी नहीं भरा गया है। गर्मी में तालाबों के सूखने के कारण गांवों में जानवरों को पिलाने के लिए पानी का घोर संकट हो जाता है। भूजल स्तर गिरने से हैंडपंप भी पानी का साथ छोड़ देते हैं। सरकारी स्तर पर लगाए गए हैंडपंपों की बोरिंग सौ से डेढ़ फीट गहरी है जबकि गर्मी में जलस्तर काफी गिर जाता है जिससे अधिकतर हैंडपंपों से पानी नहीं आता है। मौजूदा समय में जिले के सभी 16 ब्लाकों में सरकारी हैंडपंप खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं। कई हैंडपंप रीबोरिंग के लायक हैं लेकिन इन हैंडपंपों की मरम्मत या रीबोरिंग नहीं कराई गई है। अगर नगर पालिका, नगर पंचायतों और जल निगम की ओर से खराब हैंडपंप दुरुस्त नहीं कराए गए तो गर्मी में घोर पेयजल संकट होगा। दो दर्जन से अधिक नलकूपों में तकनीकी गड़बड़ी बताई जा रही है।
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पेयजल संकट शहर क्षेत्र में भी बना रहता है। गर्मी के दिनों में घंटों बिजली कटौती के चलते पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है जिसके चलते मुहल्लों में लगे हैंडपंपों पर पानी लेने के लिए कतार लग जाती है। शहर क्षेत्र में पेयजल योजनाओं पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। नगर क्षेत्र की आबादी दो लाख 73 हजार है लेकिन पेयजल आपूर्ति के सिर्फ दस हजार हैं। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए नगर पालिका की ओर से टाउनहाल और लंका में दो नए ट्यूबवेल लगाने की योजना प्रस्तावित है लेकिन यह कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। शहर के तड़बनवा, रूई मंडी के आधे से अधिक इलाके में पाइप लाइन नहीं बिछाई जा सकी है जिसके चलते यहां की सत्तर फीसदी आबादी को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। शहर के चीतनाथ, गोलाघाट और महाजन टोली में एक-एक मिनी ट्यूबवेल लगाने का कार्य अभी लंबित है।शहर में साठ खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए नगर पालिका ने नगर निगम को लिखा है। इस बार गर्मी में पानी के संकट को दूर करने के लिए दो हजार नए हैंडपंप लगाए जाने हैं। नगर पालिका की बैठक में इसका प्रस्ताव पास हो चुका है।
नगर पालिका परिषद के चेयरमैन विनोद अग्रवाल ने कहा कि मांग के अनुरूप नागरिकों को पेयजल मुहैया कराया जाता है। गर्मी के मौसम में घंटों बिजली कटौती से पेयजल आपूर्ति बाधित होती है जिससे नागरिकों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ता है। इस समस्या तो दूर करने के लिए एक मोबाइल जेनरेटर की व्यवस्था की गई है। एक और मोबाइल जेनरेटर के लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा। वर्तमान में दो ट्यूबवेल पर जेनरेटर लगे हैं। अन्य ट्यूबवेल पर जेनरेटर लगाने के लिए जेनरेटर का टेंडर निकाला गया था लेकिन टेंडर मार्केट रेट से अधिक होने के कारण निरस्त कर दिया गया। फिर टेंडर निकालकर जेनरेटर की खरीद की जाएगी। कहा कि केंद्र के तेरहवें वित्त से प्रत्येक साल दो करोड़ रुपये मिलते हैं। इस धन से जलकल, सफाई और ईगवर्नेस का काम किया जाता है। इसी के तहत तीन ट्यूबवेल पास हुआ है।