{"_id":"6a4171ac7026e1cbce0e7a66","slug":"cattle-are-suffering-in-tin-sheds-spending-rs-95-lakh-every-month-yet-they-are-not-getting-green-fodder-and-clean-water-ghazipur-news-c-313-1-gzp1001-155008-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: टिन शेड में तप रहे गोवंश, 95 लाख रुपये हर महीने खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा हरा चारा और साफ पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: टिन शेड में तप रहे गोवंश, 95 लाख रुपये हर महीने खर्च, फिर भी नहीं मिल रहा हरा चारा और साफ पानी
विज्ञापन
मिर्जापुर ग्राम पंचायत के नागौरा स्थित गो-आश्रय केंद्र में सूखा भूसा खाते गोवंश। संवाद
गाजीपुर। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला का निर्देश है कि प्रत्येक गो आश्रय स्थल में हरे चारे की भी व्यवस्था की जाए, लेकिन, जिम्मेदार इस निर्देश पर अमल नहीं कर रहे हैं। रविवार को की गई पड़ताल में सामने आया कि गो आश्रय स्थल बदहाली के शिकार हैं।
गोबर के ढेर से लेकर कीचड़ तक गो आश्रय स्थलों में दिखा। इस गर्मी में गोवंशों को टिनशेड में तपाया जा रहा है। न हरा चारा मिल रहा न साफ पानी दिया जा रहा है। यहां तक की नाद में रखा पानी गर्म होने पर हटाया नहीं जा रहा।
जनपद में 60 आश्रय स्थलों में करीब 6337 गोवंश संरक्षित हैं। पशु पालन विभाग संरक्षित गोवंशों के आहार पर हर महीने 95 लाख रुपये खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद मवेशियों को आहार के रूप में केवल भूसा नसीब हो रहा है। उनके लिए हरा चारा का इंतजाम नहीं है। उनके लिए ताजे पानी का इंतजाम तक नहीं किया गया है। गोवंशों के लिए सुविधाओं का आंकड़ा विभाग के कागजों में सरपट दौड़ रहा है, लेकिन जमीन पर दावा हवा-हवाई नजर आ रहा है।
विज्ञापन
खतरे में गोवंश, जिम्मेदार बेपरवाह : नगौरा स्थित गो पशु आश्रय केंद्र के पास पानी के हौद के यहां कुत्ते घूमते दिखे। जो कि गोवंशों को कभी हमला कर घायल कर सकते हैं। इससे पता चलता है कि गो पशु आश्रय केंद्र के कर्मचारी किस कदर लापरवाह हैं।
अधिकतम पारा 40, 60 में से 30 स्थलों पर नहीं लगे पर्दे : जनपद का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। वहीं नियमानुसार गर्मी के दिन में गो आश्रय केंद्रों पर पर्दे की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन 50 प्रतिशत यानी 30 गो आश्रय केंद्रों में पर्दे ही नहीं लगाए गए हैं। जहां पर्दे लगाए गए हैं, उनको दोपहर के समय भी लटकाया नहीं गया है।
विज्ञापन
गोबर के ढेर से लेकर कीचड़ तक गो आश्रय स्थलों में दिखा। इस गर्मी में गोवंशों को टिनशेड में तपाया जा रहा है। न हरा चारा मिल रहा न साफ पानी दिया जा रहा है। यहां तक की नाद में रखा पानी गर्म होने पर हटाया नहीं जा रहा।
विज्ञापन
जनपद में 60 आश्रय स्थलों में करीब 6337 गोवंश संरक्षित हैं। पशु पालन विभाग संरक्षित गोवंशों के आहार पर हर महीने 95 लाख रुपये खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद मवेशियों को आहार के रूप में केवल भूसा नसीब हो रहा है। उनके लिए हरा चारा का इंतजाम नहीं है। उनके लिए ताजे पानी का इंतजाम तक नहीं किया गया है। गोवंशों के लिए सुविधाओं का आंकड़ा विभाग के कागजों में सरपट दौड़ रहा है, लेकिन जमीन पर दावा हवा-हवाई नजर आ रहा है।
विज्ञापन
खतरे में गोवंश, जिम्मेदार बेपरवाह : नगौरा स्थित गो पशु आश्रय केंद्र के पास पानी के हौद के यहां कुत्ते घूमते दिखे। जो कि गोवंशों को कभी हमला कर घायल कर सकते हैं। इससे पता चलता है कि गो पशु आश्रय केंद्र के कर्मचारी किस कदर लापरवाह हैं।
अधिकतम पारा 40, 60 में से 30 स्थलों पर नहीं लगे पर्दे : जनपद का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। वहीं नियमानुसार गर्मी के दिन में गो आश्रय केंद्रों पर पर्दे की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन 50 प्रतिशत यानी 30 गो आश्रय केंद्रों में पर्दे ही नहीं लगाए गए हैं। जहां पर्दे लगाए गए हैं, उनको दोपहर के समय भी लटकाया नहीं गया है।

मिर्जापुर ग्राम पंचायत के नागौरा स्थित गो-आश्रय केंद्र में सूखा भूसा खाते गोवंश। संवाद

मिर्जापुर ग्राम पंचायत के नागौरा स्थित गो-आश्रय केंद्र में सूखा भूसा खाते गोवंश। संवाद

मिर्जापुर ग्राम पंचायत के नागौरा स्थित गो-आश्रय केंद्र में सूखा भूसा खाते गोवंश। संवाद

मिर्जापुर ग्राम पंचायत के नागौरा स्थित गो-आश्रय केंद्र में सूखा भूसा खाते गोवंश। संवाद

मिर्जापुर ग्राम पंचायत के नागौरा स्थित गो-आश्रय केंद्र में सूखा भूसा खाते गोवंश। संवाद