{"_id":"5814ebc64f1c1b250ebc25b9","slug":"candle-lights-the-lamps-reduced","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोमबत्ती ने घटाई दीयों की रोशनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोमबत्ती ने घटाई दीयों की रोशनी
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
दीपावली पर भी मिट्टी के दीपकों की पूछ काफी कम रही। बाजार में दीयों की बिक्री नाममात्र ही रही है। पर्व को लेकर कुम्हार उत्साहित थे, लेकिन अब तक उन्हें मायूसी ही हाथ लगी है। उनका कहना है कि बदलते परिवेश में लोग मोमबत्ती और झालरों को पसंद कर रहे हैं। शनिवार को बाजार में मोमबत्ती की डिमांड सबसे अधिक रही। पर्व पर कोरम दीप जलाने के लिए दस फीसदी लोगों ने ही मिट्टी के दीये खरीदे। हालांकि उनको रविवार को मिट्टी के दिये की अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
दीपावली पर हर घर में रोशनी की जाती है। पहले लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ दीवार तथा छतों पर मिट्टी के दीपक रखते हैं। जिसमें सरसों तथा तिल का तेल डालकर रोशनी फैलाई जाती है। इसके लिए शाम से ही तैयारी होने लगती है। लेकिन अब घर में रोशनी के लिए दीये बहुत कम प्रयोग किए जा रहे हैं। इसके स्थान पर झालर, मोमबत्ती तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की खरीद की जा रही है। मिट्टी के दीपकों की शनिवार को मांग बहुत कम रही। इसका असर कुम्हार समुदाय पर पड़ रहा है। रौजा के कुम्हार बद्री प्रजपति ने कहा कि अब लोग दीये और दीयरी का प्रयोग केवल पूजा-पाठ तथा परंपरागत कार्यों में ही कर रहे हैं। मांग कम होने से इसका निर्माण भी कम कर दिया गया है। मिश्रबाजार में दीये की बिक्री करने वाले दूकानदार लीलावती ने बताया कि बड़ा दीया 60 रुपया सैकड़ा और छोटा दीया 50 रुपये सैकड़ा बिक रहा है। इस बार खरीददारों की संख्या में कमी आई है। सिर्फ पर्व पर कोरम पूरा करने के लिए महज दस फीसदी लोग ही मिट्टी के दीयों की खरीदारी कर रहे हैं।
दीपावली पर हर घर में रोशनी की जाती है। पहले लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ दीवार तथा छतों पर मिट्टी के दीपक रखते हैं। जिसमें सरसों तथा तिल का तेल डालकर रोशनी फैलाई जाती है। इसके लिए शाम से ही तैयारी होने लगती है। लेकिन अब घर में रोशनी के लिए दीये बहुत कम प्रयोग किए जा रहे हैं। इसके स्थान पर झालर, मोमबत्ती तथा अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों की खरीद की जा रही है। मिट्टी के दीपकों की शनिवार को मांग बहुत कम रही। इसका असर कुम्हार समुदाय पर पड़ रहा है। रौजा के कुम्हार बद्री प्रजपति ने कहा कि अब लोग दीये और दीयरी का प्रयोग केवल पूजा-पाठ तथा परंपरागत कार्यों में ही कर रहे हैं। मांग कम होने से इसका निर्माण भी कम कर दिया गया है। मिश्रबाजार में दीये की बिक्री करने वाले दूकानदार लीलावती ने बताया कि बड़ा दीया 60 रुपया सैकड़ा और छोटा दीया 50 रुपये सैकड़ा बिक रहा है। इस बार खरीददारों की संख्या में कमी आई है। सिर्फ पर्व पर कोरम पूरा करने के लिए महज दस फीसदी लोग ही मिट्टी के दीयों की खरीदारी कर रहे हैं।
विज्ञापन