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पिछले तीन विधानसभा चुनाव से बसपा ने नहीं खोला खाता, कांग्रेस को 1989 में मिली थी एक सीट
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गाजीपुर। कांग्रेस और बसपा जैसी पार्टियों की इस चुनाव में काफी फजीहत हुई है। जिले में पिछले तीन विधानसभा चुनावों से बसपा का खाता तक नहीं खुल पाया है। इस बार तो उसकी स्थिति और भी खराब रही है। कांग्रेस के टिकट पर 1989 के बाद कोई विधानसभा में नहीं पहुंच पाया। दोनों दलों ने इस बार भी इलाके में रसूख रखने वाले कई प्रत्याशी मैदान में उतारे थे लेकिन जीतना तो दूर उनमें कोई लड़ाई में भी नहीं आ पाया।
वर्ष 1985 में कांग्रेस का छह विधानसभा सीटों पर कब्जा था। जहूराबाद, दिलदारनगर, जमानिया, गाजीपुर सदर, जखनिया और सादात से कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। वर्ष 1989 में कांग्रेस ने सिर्फ जहूराबाद में जीत पाई। उस साल अधिकांश सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमा लिया था। वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन ने चुनाव लड़ा था। तब जहूराबाद, सैदपुर, जमानिया और जखनिया से बसपा जीती थी। अगले ही चुनाव में ( 1996) चुनाव में बसपा ने सिर्फ जखनिया ही जीत पाई। 2002 में तीन जहूराबाद और गाजीपुर सदर से बसपा ने जीत हासिल की। वर्ष 2007 में बसपा को छह सीटें मिलीं। जहूराबाद, दिलदारनगर, जमानिया, जखनिया, सादात और सैदपुर सीट पर हाथी का दबदबा कायम हो गया था। उसके बाद बसपा का जिले से वनवास शुरू हो गया। 2012 से 2022 तक तीन चुनावों बसपा संघर्ष करती पर सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा- बसपा गठबंधन के तहत गाजीपुर सीट बसपा को मिली थी। तब अफजाल अंसारी सवा लाख वोटों से जीत हासिल की थी और पूर्व मंत्री मनोज सिन्हा को हराया था। मगर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी किसी भी सीट से जीत नहीं सकी लेकिन उसे हर सीट पर उससे कहीं ज्यादा वोट मिले हैं, जितने से वहां हार जीत हुई है। पार्टी हर जगह तीसरे स्थान पर है। कई सीटों पर त्रिकोणात्मक मुकाबले हुए हैं। चुनाव में बसपा के प्रत्याशी कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले में रहे। जहूराबाद में पार्टी ने पूर्व मंत्री शादाब फातिमा को प्रत्याशी बनाया था। उनको 53144 वोट मिले लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहीं। मुहम्मदाबाद मे भाजपा प्रत्याशी माधवेंद्र राय को 32440 वोट मिले। जमानिया के बसपा प्रत्याशी परवेज खान को 53403, गाजीपुर से पूर्व विधायक राजकुमार गौतम को 33931, जंगीपुर के प्रत्याशी डॉ मुकेश सिंह को 47857, जखनिया से लड़ रहे विजय कुमार 51585 और सैदपुर सीट विनोद कुमार से बसपा प्रत्याशी को 44856 वोट मिले। हर सीट पर पार्टी तीसरे नंबर पर रही। पर प्रत्येक सीट पर बसपा को मिले मतों की संख्या हारजीत के अंतर से कहीं ज्यादा है।
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वर्ष 1985 में कांग्रेस का छह विधानसभा सीटों पर कब्जा था। जहूराबाद, दिलदारनगर, जमानिया, गाजीपुर सदर, जखनिया और सादात से कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। वर्ष 1989 में कांग्रेस ने सिर्फ जहूराबाद में जीत पाई। उस साल अधिकांश सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमा लिया था। वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन ने चुनाव लड़ा था। तब जहूराबाद, सैदपुर, जमानिया और जखनिया से बसपा जीती थी। अगले ही चुनाव में ( 1996) चुनाव में बसपा ने सिर्फ जखनिया ही जीत पाई। 2002 में तीन जहूराबाद और गाजीपुर सदर से बसपा ने जीत हासिल की। वर्ष 2007 में बसपा को छह सीटें मिलीं। जहूराबाद, दिलदारनगर, जमानिया, जखनिया, सादात और सैदपुर सीट पर हाथी का दबदबा कायम हो गया था। उसके बाद बसपा का जिले से वनवास शुरू हो गया। 2012 से 2022 तक तीन चुनावों बसपा संघर्ष करती पर सफलता नहीं मिली।
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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा- बसपा गठबंधन के तहत गाजीपुर सीट बसपा को मिली थी। तब अफजाल अंसारी सवा लाख वोटों से जीत हासिल की थी और पूर्व मंत्री मनोज सिन्हा को हराया था। मगर वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी किसी भी सीट से जीत नहीं सकी लेकिन उसे हर सीट पर उससे कहीं ज्यादा वोट मिले हैं, जितने से वहां हार जीत हुई है। पार्टी हर जगह तीसरे स्थान पर है। कई सीटों पर त्रिकोणात्मक मुकाबले हुए हैं। चुनाव में बसपा के प्रत्याशी कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले में रहे। जहूराबाद में पार्टी ने पूर्व मंत्री शादाब फातिमा को प्रत्याशी बनाया था। उनको 53144 वोट मिले लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहीं। मुहम्मदाबाद मे भाजपा प्रत्याशी माधवेंद्र राय को 32440 वोट मिले। जमानिया के बसपा प्रत्याशी परवेज खान को 53403, गाजीपुर से पूर्व विधायक राजकुमार गौतम को 33931, जंगीपुर के प्रत्याशी डॉ मुकेश सिंह को 47857, जखनिया से लड़ रहे विजय कुमार 51585 और सैदपुर सीट विनोद कुमार से बसपा प्रत्याशी को 44856 वोट मिले। हर सीट पर पार्टी तीसरे नंबर पर रही। पर प्रत्येक सीट पर बसपा को मिले मतों की संख्या हारजीत के अंतर से कहीं ज्यादा है।
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