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बिना सुरक्षा किट परिजनों को सुपुर्द किया जा रहा शव
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गाजीपुर। जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमितों की हो रही मौत से परिजनों की चित्कार जारी है। बिना सुरक्षा किट के शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया जा रहा है। यही नहीं सैनेटाइजेशन नहीं होने से संक्रमण फैलाव का भी खतरा साफ मंडराता दिख रहा है। स्वास्थ्य महकमा पूरी सतर्कता एवं एहतियात के साथ शव सुपुर्द करने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है।
कोरोना की दूसरी लहर इतनी भयावह हो चुकी है कि आमजन की थोड़ी लापरवाही उनके लिए काफी खतरनाक साबित होती दिख रही है। स्थिति यह है कि अब तक एक सप्ताह में 22 लोगों की मौत हो चुकी है। यही नहीं जिला अस्पताल उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों की मौत का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि सांस लेने में परेशानी होने पर आए मरीज आपात कक्ष में पहुंच रहे तो उनकी बिना कोविड जांच के उपचार शुरु कर दिया जा रहा है और आक्सीजन लेवल कम होने की अवस्था में उनकी मौत हो जा रही है। ऐसे में इन मरीजों का शव परिजन बिना सुरक्षा किट में पैक कर लेकर घर चले जा रहे हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
स्वास्थ्य महकमा कोरोना वार्ड में भर्ती मरीज की मौत का आंकड़ा जहां अपनी रिपोर्ट में दर्शा रहा है, जबकि उनके शव को सुरक्षा किट (बाडी पैक) में डालकर और सेनेटाइज करके उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। इस संबंध में कोरोना के नोडल एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि शव को बाडी पैक में बंदकर सुरक्षा के साथ सुपुर्द किया जा रहा है। वर्तमान समय में 25 बाडी पैक उपलब्ध है। शव सुपुर्द करने से पहले सैनेटाइजेशन भी किया जा रहा है।
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कोरोना की दूसरी लहर इतनी भयावह हो चुकी है कि आमजन की थोड़ी लापरवाही उनके लिए काफी खतरनाक साबित होती दिख रही है। स्थिति यह है कि अब तक एक सप्ताह में 22 लोगों की मौत हो चुकी है। यही नहीं जिला अस्पताल उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों की मौत का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि सांस लेने में परेशानी होने पर आए मरीज आपात कक्ष में पहुंच रहे तो उनकी बिना कोविड जांच के उपचार शुरु कर दिया जा रहा है और आक्सीजन लेवल कम होने की अवस्था में उनकी मौत हो जा रही है। ऐसे में इन मरीजों का शव परिजन बिना सुरक्षा किट में पैक कर लेकर घर चले जा रहे हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
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स्वास्थ्य महकमा कोरोना वार्ड में भर्ती मरीज की मौत का आंकड़ा जहां अपनी रिपोर्ट में दर्शा रहा है, जबकि उनके शव को सुरक्षा किट (बाडी पैक) में डालकर और सेनेटाइज करके उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। इस संबंध में कोरोना के नोडल एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि शव को बाडी पैक में बंदकर सुरक्षा के साथ सुपुर्द किया जा रहा है। वर्तमान समय में 25 बाडी पैक उपलब्ध है। शव सुपुर्द करने से पहले सैनेटाइजेशन भी किया जा रहा है।
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