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लोकतंत्र का दायित्व पहले: मां की तेरहवीं टालकर मतदाता पुनरीक्षण कार्य में पहुंचे गाजीपुर बीएलओ, कायम की मिसाल
Sun, 30 Nov 2025 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 30 Nov 2025 06:08 AM IST
सार
सैदपुर विधानसभा के भाग संख्या–222 के बीएलओ और रफीकपुर परिषदीय विद्यालय के शिक्षक लालधर सहाय ने ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है।
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बहरियाबाद के चकसदर गांव के लालधर सहाय
- फोटो : संवाद
विस्तार
जीवन में ऐसे पल आते हैं जहां इंसान टूट जाता है, लेकिन कुछ लोग ठीक उसी क्षण अपनी जिम्मेदारी को सबसे ऊपर रखकर एक मिसाल कायम कर जाते हैं। सैदपुर विधानसभा के भाग संख्या–222 के बीएलओ और रफीकपुर परिषदीय विद्यालय के शिक्षक लालधर सहाय ने ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है।
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बीते 22 नवंबर को उनकी 70 वर्षीय माता धनवती सहाय का बीमारी से निधन हो गया। 23 नवंबर को अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा, घर में मातम पसरा था, लेकिन इस गहरे शोक के बीच लालधर सहाय ने लोकतंत्र के प्रति अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा। वे दाह संस्कार कर सीधे अपनी बीएलओ की ड्यूटी पर निकल पड़े।
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इससे भी बड़ी बात यह कि उन्होंने 5 दिसंबर को होने वाली अपनी मां की तेरहवीं की तिथि को आगे बढ़ा दिया ताकि मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में किसी प्रकार की बाधा न आए। तेरहवीं अब 13 दिसंबर को होगी। लालधर ने बताया कि मां ने हमेशा कर्तव्य को पहले रखने की सीख दी थी, आज उसी सीख को निभा रहा हूं। उनकी यह बात सुनकर कई लोग भावुक हो जा रहे है। गांव हो या सैदपुर कस्बा हर जगह उनकी इस कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा हो रही है।
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बहरियाबाद क्षेत्र के चकसदर गांव के मूल निवासी लालधर सहाय परिवार के साथ सैदपुर में रहते हैं, जबकि उनकी मां बड़े बेटे लालचंद के साथ गांव में रहती थीं। निधन की सूचना मिलते ही लालधर गांव पहुंचे, संस्कार में भाग लिया और फिर अपनी जिम्मेदारी निभाने लौट आए।
मानवीय संवेदना और कर्तव्य का ऐसा संगम बिरले ही देखने को मिलता है। मतदाता पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगे एक बीएलओ का व्यक्तिगत शोक में भी अपने दायित्व से पीछे न हटना, क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गया है। शिक्षकों, सहकर्मियों और स्थानीय लोगों ने लालधर सहाय की निष्ठा को लोकतंत्र के सिपाही की संज्ञा देते हुए उनकी सराहना की है।