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राम के चरणों में गिरे भरत, प्रभु ने लगा लिया गले
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गाजीपुर के मुहल्ला हरिशंकरी से भगवान राम की शोभायात्रा बृहस्पतिवार की देर शाम धूमधाम से निकली। शोभायात्रा नगर के महाजन टोली, झुन्नूलाल चौराहा, आमघाट राजकीय महिला महाविद्यालय, ददरी घाट चौक, महुआबाग, पहाड़खां पोखरा होते हुए सकलेनाबाद पहुंची। इस दौरान लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद राम, सीता, लक्ष्मण सहित हनुमान, विभीषण, अंगद आदि बानरी सेनाओं के प्रमुख के साथ अयोध्या प्रस्थान की लीला का मंचन हुआ।
अयोध्या वापसी के दौरान भारद्वाज मुनि के आश्रम पर पुष्पक विमान से उतरकर राम, सीता, लक्ष्मण थोड़ी देर के लिये विश्राम करते हैं। इसी बीच भगवान हनुमान को संदेश देते हैं कि अयोध्या जाकर भरत को उनके आने की सूचना दें। भगवान राम की आज्ञा पाकर हनुमान अयोध्या जाते हैं। भरत भगवान राम के वियोग में बैठे थे।
हनुमान ब्राह्मण के भेष बनाक र उन्हें कहते हैं कि हे भरत ! आप के बड़े भ्राता राम लंका पर विजय प्राप्त करके पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या के लिये प्रस्थान कर चुके है। वे रास्ते में भारद्वाज मुनि के आश्रम पर विश्राम कर रहे है। उन्होंने मुझे यह सूचना आप तक पहुंचाने का आदेश दिया है। मैं आपके भाई श्रीराम का दूत हूं।
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उधर, हनुमान से भाई राम के भारद्वाज मुनि के आश्रम में होने की सूचना पर भरत अयोध्या वासियों के साथ प्रभु राम से मिलने के लिए आश्रम प्रस्थान कर देते हैं। भरत भाई शत्रुघ्न के साथ दौड़ते हुए जाकर राम के चरणों में गिर जाते हैं। वहीं राम अपने प्रिय भाई भरत को गले लगा लेते हैं।
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अयोध्या वापसी के दौरान भारद्वाज मुनि के आश्रम पर पुष्पक विमान से उतरकर राम, सीता, लक्ष्मण थोड़ी देर के लिये विश्राम करते हैं। इसी बीच भगवान हनुमान को संदेश देते हैं कि अयोध्या जाकर भरत को उनके आने की सूचना दें। भगवान राम की आज्ञा पाकर हनुमान अयोध्या जाते हैं। भरत भगवान राम के वियोग में बैठे थे।
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हनुमान ब्राह्मण के भेष बनाक र उन्हें कहते हैं कि हे भरत ! आप के बड़े भ्राता राम लंका पर विजय प्राप्त करके पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या के लिये प्रस्थान कर चुके है। वे रास्ते में भारद्वाज मुनि के आश्रम पर विश्राम कर रहे है। उन्होंने मुझे यह सूचना आप तक पहुंचाने का आदेश दिया है। मैं आपके भाई श्रीराम का दूत हूं।
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उधर, हनुमान से भाई राम के भारद्वाज मुनि के आश्रम में होने की सूचना पर भरत अयोध्या वासियों के साथ प्रभु राम से मिलने के लिए आश्रम प्रस्थान कर देते हैं। भरत भाई शत्रुघ्न के साथ दौड़ते हुए जाकर राम के चरणों में गिर जाते हैं। वहीं राम अपने प्रिय भाई भरत को गले लगा लेते हैं।