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बलिया के पत्रकारों की रिहाई समेत सात सूत्रीय मांगें उठाईं
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बलिया पेपर लीक मामले में गिरफ्तार तीनों पत्रकारों की रिहाई समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय पत्रकार संघ ने शनिवार को राज्यपाल को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि बलिया समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में सुनियोजित तरीके से नकल कराई जा रही है। ऐसे मामलों को पत्रकारों की ओर से उठाने पर उत्पीड़न की घटनाएं हो रही है। जो निंदनीय है।
संगठन के जिलाध्यक्ष महेशानंद श्रीवास्तव ने कहा कि बलिया के पत्रकार अजित ओझा, दिग्विजय सिंह एवं मनोज गुप्ता पेपर लीक प्रकरण को उजागर करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बलिया जिला प्रशासन द्वारा नकल माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय कलम के सिपाहियों का मुंह बंद करने की कोशिश हो रही है। इस कृत्य से पूरे प्रदेश के पत्रकारों में आक्रोश है।
पत्रकार संघ सात सूत्रीय मांग करता है कि नकल माफियाओं की जांच हो एवं पेपर लीक का खुलासा करने वाले पत्रकारों को जेल भेजने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ उक्त तीनों पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस हो। बलिया के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों की भूमिका की न्यायिक जांच कराई जाए एवं जांच की रिपोर्ट आने तक उन्हें निलंबित कर दिया जाए। प्रदेश में पत्रकार उत्पीड़न की घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। विभिन्न समाचार पत्रों, चैनलों, मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों को शासन स्तर से सूचीबद्ध किया जाए। उत्तर प्रदेश की प्रेस मान्यता नियमावली में संशोधन कर उसमें पत्रकारों की सुरक्षा के लिए उपबंध शामिल किया जाए। उत्तर प्रदेश में किसी भी पत्रकार को किसी प्रकरण में कथित रूप से संलिप्त पाए जाने की दशा में तब तक गिरफ्तारी न की जाए जब तक पुलिस विभाग के एक राजपत्रित अधिकारी स्तर से उसकी जांच पूरी न कर ली जाए।
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इस मौके पर विधिक सलाहकार वाराणसी मंडल अजय सिन्हा, जिला सचिव विशाल गुप्ता, वरिष्ट उपाध्यक्ष हृदय नारायन मिश्रा, जिला संयोजक सुरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष कमलेश उपाध्याय, विक्रम सिंह, दिनकर उपाध्याय, शक्ति सिंह, प्रशांत सिंह सहित अन्य लोग रहे।
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संगठन के जिलाध्यक्ष महेशानंद श्रीवास्तव ने कहा कि बलिया के पत्रकार अजित ओझा, दिग्विजय सिंह एवं मनोज गुप्ता पेपर लीक प्रकरण को उजागर करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बलिया जिला प्रशासन द्वारा नकल माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय कलम के सिपाहियों का मुंह बंद करने की कोशिश हो रही है। इस कृत्य से पूरे प्रदेश के पत्रकारों में आक्रोश है।
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पत्रकार संघ सात सूत्रीय मांग करता है कि नकल माफियाओं की जांच हो एवं पेपर लीक का खुलासा करने वाले पत्रकारों को जेल भेजने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ उक्त तीनों पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस हो। बलिया के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों की भूमिका की न्यायिक जांच कराई जाए एवं जांच की रिपोर्ट आने तक उन्हें निलंबित कर दिया जाए। प्रदेश में पत्रकार उत्पीड़न की घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। विभिन्न समाचार पत्रों, चैनलों, मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों को शासन स्तर से सूचीबद्ध किया जाए। उत्तर प्रदेश की प्रेस मान्यता नियमावली में संशोधन कर उसमें पत्रकारों की सुरक्षा के लिए उपबंध शामिल किया जाए। उत्तर प्रदेश में किसी भी पत्रकार को किसी प्रकरण में कथित रूप से संलिप्त पाए जाने की दशा में तब तक गिरफ्तारी न की जाए जब तक पुलिस विभाग के एक राजपत्रित अधिकारी स्तर से उसकी जांच पूरी न कर ली जाए।
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इस मौके पर विधिक सलाहकार वाराणसी मंडल अजय सिन्हा, जिला सचिव विशाल गुप्ता, वरिष्ट उपाध्यक्ष हृदय नारायन मिश्रा, जिला संयोजक सुरेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष कमलेश उपाध्याय, विक्रम सिंह, दिनकर उपाध्याय, शक्ति सिंह, प्रशांत सिंह सहित अन्य लोग रहे।