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Ghazipur News: मेडिकल कॉलेज में सादी पर्ची पर बाहर की दवाओं से अंदर हो रहा इलाज

Thu, 16 Apr 2026 01:38 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 01:38 AM IST
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At the Medical College, patients are being treated using external medicines prescribed on plain slips
सादी पर्ची पर लिखी गई दवाइयां। स्रोत-तीमारदार
गाजीपुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बार फिर सादी पर्ची का खेल शुरू हो गया है। सादी पर्ची पर बाहर की दवा व इंजेक्शन लिखे जा रहे हैं। यही नहीं, छोटी से बड़ी सर्जरी तक का सामान, दवा व इंजेक्शन के नाम पर तीमारदारों को जेब खाली करनी पड़ रही है। ओपीडी की पर्ची पर ऐसी दवाएं लिखी जा रही हैं, जो अस्पताल व जन औषधि केंद्र पर भी उपलब्ध नहीं रहती, ऐसे में तीमारदारों को बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ती है।
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शहर व ग्रामीण इलाकों के अलावा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जनपद से सटे अन्य जिलों और प्रांतों से भी मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं, जिनकी संख्या 3500 के पार हो जाती है। यही नहीं, प्रतिदिन विभिन्न बीमारियों से पीड़ित करीब 80 मरीज भर्ती भी हो रहे हैं। ऐसे में वार्डों में भर्ती मरीजों को बाहर से ही दवा खरीदनी पड़ रही है।
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फुल्लनपुर निवासी दीपक कुमार ने बताया कि बीते 10 मार्च को अपनी मां को उपचार के लिए डॉक्टर के पास ले गए थे। वहां चिकित्सक ने दवा तो पर्ची पर लिखी, साथ ही उस मेडिकल स्टोर के नाम व पते वाली पर्ची भी उपलब्ध कराई, जहां दवाइयां मिल सकेंगी।
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वहीं, लगभग एक सप्ताह पूर्व एक मित्र की मां को पथरी की शिकायत थी। उन्हें भर्ती कराया गया तो सर्जरी में प्रयुक्त होने वाले सामान, दवा व इंजेक्शन तक बाहर से मंगाए गए। अंकित राजभर ने बताया कि पड़ोसी को झटके की समस्या थी, जिन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थिति यह है कि एक दिन में दो से तीन बार स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सादी पर्ची पर दवा लिखकर बाहर से मंगाई जाती है। वार्ड में भर्ती अधिकांश मरीजों के तीमारदारों से बाहर से दवाएं मंगाई जा रही हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है।



सादी पर्ची पर दवा लिखने वाले डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की शिकायत मिलने पर उन्हें चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन मामले की जांच कराएगा। -प्रो.आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज अस्पताल, गाजीपुर

पड़ोसी अंशु राजभर को झटके की समस्या थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार कराया जा रहा है। इस दौरान कई बार सादी पर्ची पर दवा लिखकर मंगाई गई। निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी। - अंकित राजभर, जहूराबाद



हड्डी विभाग हो अथवा सर्जरी विभाग, यहां निश्चित तौर पर बाहर से ही इंजेक्शन व दवाएं मंगाई जाती हैं। मित्र की मां की पथरी का ऑपरेशन हुआ है। सभी दवाएं डॉक्टरों द्वारा बाहर से ही मंगाई गईं। - विशाल कुमार, बीकापुर
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