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Ghazipur News: सीएचसी पर इलाज के नाम पर घायलों की होती है मरहम-पट्टी, 60% मरीज होते हैं रेफर

Fri, 08 May 2026 11:50 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 11:50 PM IST
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At the CHC, the injured merely receive dressing under the guise of treatment
सड़क हादसे में घायल उदय प्रताप यादव को सीएचसी परप्राथमिक उपचार करते स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
गाजीपुर। जनपद के ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकीय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) संचालित हैं, लेकिन इनमें करीब 80 फीसदी अस्पताल रेफरल सेंटर बन गए हैं। शुक्रवार को पड़ताल में मिला कि यहां आने वाले गंभीर रूप से घायल मरीजों का सिर्फ मरहम-पट्टी किया जाता है। यहां करीब 60 प्रतिशत को रोजाना रेफर कर दिया जाता है। यदि एक दिन के आंकड़ों पर गौर करें तो 16 सीएचसी में प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंचते हैं। इनमें से करीब 60 प्रतिशत घायलों का मरहम-पट्टी कर मेडिकल कॉलेज या वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। वहीं, गंभीर बीमारियों के मरीज भी अन्यत्र उपचार कराने को विवश हैं। सिर्फ सामान्य बीमारी के मरीजों से ओपीडी रजिस्टर भरकर बेहतर उपचार का दावा किया जा रहा है। सैदपुर: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के लिए पहुंचे 56 मरीजों में से 10 मरीजों को रेफर कर दिया गया। इनमें अधिकांश मरीज सड़क दुर्घटना में घायल और गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। होलीपुर निवासी नरेश यादव ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल उदय प्रताप यादव को उपचार के लिए लाया गया था। यहां मरहम-पट्टी करने के बाद पैर फ्रैक्चर होने पर प्लास्टर के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि यहां अक्सर 10 से 15 मरीजों को वाराणसी अथवा अन्यत्र भेज दिया जाता है। मरदह : हालपुर निवासी राजू यादव और नोनरा निवासी संदीप सिंह ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गंभीर बीमारी और सड़क हादसे में घायल मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जाता है। बरही निवासी सुनील सिंह और नरवर की स्नेहलता ने बताया कि यहां सिर्फ सामान्य बीमारियों का उपचार होता है। गंभीर मरीजों को करीब 15 किमी दूर मऊ या 30 से 40 किमी दूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाना पड़ता है। कासिमाबाद : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बृहस्पतिवार को ओपीडी में 135 मरीज पहुंचे, जबकि आपातकक्ष में पांच मरीज आए। इनमें से तीन मरीजों को रेफर कर दिया गया। नसीरुद्दीनपुर निवासी कालिका सिंह ने बताया कि यहां ओपीडी में अधिकांश वायरल बुखार, सर्दी, जुकाम व सामान्य बीमारियों का ही उपचार होता है। गंभीर बीमारी व सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को 25 से 30 मिनट रुकने के बाद अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है। जखनिया : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे उपेंद्र कुमार ने बताया कि गंभीर बीमारी और सड़क दुर्घटना में घायलों को सिर्फ प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। इसके बाद मरीजों को आजमगढ़, मऊ अथवा वाराणसी जाना पड़ता है। कमोवेश यही हाल बाराचवर, गोड़ऊर, मुहम्मदाबाद, भदौरा और देवकली सहित अन्य सीएचसी का भी है, जहां से मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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