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अरघ कबूल करीं गगन विहारी, दीनानाथ
ब्यूरो/अमर उजाला/गाजीपुर
Updated Tue, 17 Nov 2015 11:41 PM IST
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‘अरघ कबूल करीं गगन बिहारी’। सूर्योपासना के पर्व डाला छठ पर मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने व्रती महिलाओं और आस्थावानों की टोली जलाशयों की ओर चली तो ऐसे ही भाव भरे गीतों से वातावरण गूंज उठा। घर, गलियां, नदी, तालाब, पोखर और गंगा घाट हर तरफ आस्था का रेला दिखाई दिया।
अस्ताचल की ओर बढ़ते गगन बिहारी सूरज देव को अर्घ्य देने के बाद ‘उगु न सुरुज देव भइले अरघ के बेर’ जैसे गीत के सहारे जागरण शुरू हो गया। सूर्योदय की प्रतीक्षा होने लगी। बुधवार को सुबह अघ्य देने के बाद 36 घंटे बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
छठ के मद्देनजर गंगा और नदियों के घाटों और पोखरे की सजावट की गई है। दोपहर बाद व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के सदस्यों का गंगा घाटों पर पहुंचने क्रम शुरू हो गया। चार बजते-बजते सभी गंगा घाट आस्थावानों से भर गए। बेदियों को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाई गई। ईख का मंडप बनाया गया। उसके बाद गंगा में खड़े होकर सुपेली में फल, पान की पत्ती, सुपारी, नारियल, अगरौटा आदि नैवेद्य का अर्पण सूर्यदेव को किया गया। सूर्य अस्त होने को हुए तो व्रती महिलाओं के साथ परिवार के सदस्यों ने छह बार दूध और गंगा जल से अर्घ्य दिया।
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कलेक्टर घाट, ददरीघाट, बड़ा महादेवा घाट, सिकंदरपुर घाट, चीतनाथ घाट, अंजही घाट, पोस्ताघाट, नवापुरा घाट, कोयलाघाट, गोलाघाट, स्टीमरघाय पत्थर घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अर्घ्य के बाद श्रद्धालु घर लौट आए और वहां जागरण शुरू हो गया। सुरक्षा के लिए सभी गंगा घाटों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। अर्घ्य के दौरान सुरक्षाकर्मी गंगा में भी भ्रमण करते रहे।
उधर,जमानिया के हरपुर, बडेसर, चक्काबांध, मतसा, सब्बलपुर, चितावनपट्टी, रघोपुर, देवरिया घाट, पाह सैय्यदराजा, चकमेदनी, धुस्का, ढेवढी गांवों और नगर के बलूआ घाट, मनान घाट, सतुआनी घाट, करपुरा घाट, कंकडवा घाट, चक्का बांध घाट, हरपुर घाट, मतसा घाट, देवरियां घाट, सब्बलपुर, पाह सैय्यदराजा मुहम्मदाबाद में बड़कीधारा, सुल्तानपुर, बलुआ, हरिहरपुर, गौसपुर घाटों और महादेवा शिव मंदिर पर स्थित पोखरे, सीताराम का पोखरंा, हनुमानगंज स्थित पोखरे के अलावा मंगई नदी के तट अर्घ्य दिया गया। दिलदारनगर में महिलाएं साष्टांग लेटकर घाटों और पोखरे तक पहुंचीं। करीमुद्दीनपुर, दुबिहा और ताजपुर डेहमा क्षेत्र के असावर, हरदासपुर, दुबिहा, नेवादा. दुल्लहपुर, बिरनो, जंगीपुर, मरदह, देवकली, सैदपुर, खानपुर, भीमापार, सादात, शादियाबाद, बहरियाबाद, करंडा, सहेड़ी, नंदगंज, गहमर, सुहवल, कासिमाबाद, बहादुरगंज आदि गांवों छठ पर्व की धूम रही।
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अस्ताचल की ओर बढ़ते गगन बिहारी सूरज देव को अर्घ्य देने के बाद ‘उगु न सुरुज देव भइले अरघ के बेर’ जैसे गीत के सहारे जागरण शुरू हो गया। सूर्योदय की प्रतीक्षा होने लगी। बुधवार को सुबह अघ्य देने के बाद 36 घंटे बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
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छठ के मद्देनजर गंगा और नदियों के घाटों और पोखरे की सजावट की गई है। दोपहर बाद व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के सदस्यों का गंगा घाटों पर पहुंचने क्रम शुरू हो गया। चार बजते-बजते सभी गंगा घाट आस्थावानों से भर गए। बेदियों को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाई गई। ईख का मंडप बनाया गया। उसके बाद गंगा में खड़े होकर सुपेली में फल, पान की पत्ती, सुपारी, नारियल, अगरौटा आदि नैवेद्य का अर्पण सूर्यदेव को किया गया। सूर्य अस्त होने को हुए तो व्रती महिलाओं के साथ परिवार के सदस्यों ने छह बार दूध और गंगा जल से अर्घ्य दिया।
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कलेक्टर घाट, ददरीघाट, बड़ा महादेवा घाट, सिकंदरपुर घाट, चीतनाथ घाट, अंजही घाट, पोस्ताघाट, नवापुरा घाट, कोयलाघाट, गोलाघाट, स्टीमरघाय पत्थर घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अर्घ्य के बाद श्रद्धालु घर लौट आए और वहां जागरण शुरू हो गया। सुरक्षा के लिए सभी गंगा घाटों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। अर्घ्य के दौरान सुरक्षाकर्मी गंगा में भी भ्रमण करते रहे।
उधर,जमानिया के हरपुर, बडेसर, चक्काबांध, मतसा, सब्बलपुर, चितावनपट्टी, रघोपुर, देवरिया घाट, पाह सैय्यदराजा, चकमेदनी, धुस्का, ढेवढी गांवों और नगर के बलूआ घाट, मनान घाट, सतुआनी घाट, करपुरा घाट, कंकडवा घाट, चक्का बांध घाट, हरपुर घाट, मतसा घाट, देवरियां घाट, सब्बलपुर, पाह सैय्यदराजा मुहम्मदाबाद में बड़कीधारा, सुल्तानपुर, बलुआ, हरिहरपुर, गौसपुर घाटों और महादेवा शिव मंदिर पर स्थित पोखरे, सीताराम का पोखरंा, हनुमानगंज स्थित पोखरे के अलावा मंगई नदी के तट अर्घ्य दिया गया। दिलदारनगर में महिलाएं साष्टांग लेटकर घाटों और पोखरे तक पहुंचीं। करीमुद्दीनपुर, दुबिहा और ताजपुर डेहमा क्षेत्र के असावर, हरदासपुर, दुबिहा, नेवादा. दुल्लहपुर, बिरनो, जंगीपुर, मरदह, देवकली, सैदपुर, खानपुर, भीमापार, सादात, शादियाबाद, बहरियाबाद, करंडा, सहेड़ी, नंदगंज, गहमर, सुहवल, कासिमाबाद, बहादुरगंज आदि गांवों छठ पर्व की धूम रही।