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गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अलर्ट जारी

Sat, 30 Jul 2022 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jul 2022 11:39 PM IST
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Alert issued in view of rising water level of Ganga
जमानिया तहसील क्षेत्र के पश्चिम ओर स्थित गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तराई के गांवों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। प्रशासन भी बाढ़ को लेकर चिंतित है। इसको लेकर शनिवार को नाविकों ग्राम प्रधान एवं नागरिकों के साथ तहसील सभागार में बैठक हुई। इसमें बाढ़ की स्थिति में अलर्ट रहने का निर्देश देते हुए वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई।
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तहसीलदार लालजी विश्वकर्मा ने कहा कि तहसील क्षेत्र दक्षिण ओर कर्मनाशा और पश्चिम ओर गंगा नदी से घिरा हुआ है। वर्तमान समय में कर्मनाशा नदी में पानी नहीं बढ़ रहा है। जबकि गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इसको देखते हुए कुल 41 बाढ़ चौकी, छह बाढ़ राहत केंद्र, 40 नाव, सात बाढ़ राहत शरणालय बनाए गए हैं। छह गोताखोर और 25 आपदा मित्रों को हर समय सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी चेतावनी बिंदु 63.105 मीटर से गंगा बहुत नीचे है लेकिन पहले से तैयार रहने से नुकसान कम होगा। बाढ़ राहत चौकियां एवं कंट्रोल रूम पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है जहां एक कर्मचारी की तैनाती की गई है। इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने सभी से प्रशासन का सहयोग करने की अपील की और सतर्क रहने का निर्देश दिया। इस अवसर पर कुलेश चौधरी रामबदन चौधरी बुद्धिराम चौधरी रामबली संपत मूलचंद चौधरी मुन्ना राजेश सत्तु आदि मौजूद थे।
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इनसेट
आठ हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल पर पड़ता है असर
जमानिया क्षेत्र में कुल 258 गांव हैं जिसमें से 85 गांव तराई क्षेत्र के हैं। लगभग हर वर्ष गंगा का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आती है। इससे करीब 70 हजार 653 परिवार की तीन लाख की आबादी प्रभावित होती है। हर वर्ष बाढ़ से 8055 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर भी असर होता है।
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तहसीलदार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
सेवराई। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों एवं आबादी के लोगों को आवश्यक राहत सामग्री का वितरण एवं सुरक्षा उपायों को दृष्टिगत रखते हुए तहसीलदार अमित शेखर ने विभिन्न राहत केंद्र एवं बाढ़ चौकियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को तय समय में अपनी तैयारियां पूरी कर लेने का निर्देश दिया। क्षेत्र के ग्राम बसूका, दुल्लहपुर, नसीरपुर का निरीक्षण किया। रेवतीपुर स्थित बाढ़ चौकी एवं रेवतीपुर स्थित नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज जिसे मॉडल बाढ़ राहत कैंप के लिए चिह्नित किया गया है कि जांच की गई। बताया कि सेवराई तहसील प्रशासन के द्वारा बाढ़ आने की आशंका को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली गई है। तहसील प्रशासन द्वारा दो बाढ़ राहत केंद्र एवं 15 बाढ़ चौकियां बनाई गई है। जिसमें प्रशासनिक तौर पर सभी जरूरी सुविधा मुहैया कराने का प्रयास किया गया है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर तटवर्ती इलाकों के लोगों को प्रशासनिक तौर पर दिए जाने वाले व्यवस्था एवं राहत कैंप आदि के बारे में जानकारी दी। बाढ़ आने के बाद भी लोगों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो इसके लिए प्रशासन द्वारा नाव एवं राहत पैकेट का भी बंदोबस्त किया गया है। राहत कैंप में लोगों को दो टाइम भोजन एवं स्वच्छ पेयजल एवं मनोरंजन के लिए टीवी का भी इंतजाम किया गया है। दैनिक दिनचर्या के लिए पास के सामुदायिक शौचालय सहित अन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसकी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करा दी गई है। तहसीलदार सेवराई अमित शेखर ने बताया कि बाढ़ की तैयारियों को लेकर स्थलिय निरीक्षण किया गया है। कर्मचारियों को जल्द से जल्द अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए बाढ़ राहत कैंप व बाढ़ चौकियों में सभी आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित करने का निर्देश दिया गया है।
गंगा का जलस्तर बढ़नेेे से सहमे तटवर्ती इलाके के लोग
मौधा। तमाम बंधों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी और पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बारिश के बाद क्षेत्र में गंगा का जलस्तर भी बहुत तेजी से बढ़ने लगा है। इससे तटवर्ती इलाके के ग्रामीण बाढ़ को लेकर सशंकित हो गए हैं। इसे लेकर क्षेत्र के खरौना, शादी-भादी, कुसमी कला, हथौड़ा और औड़िहार आदि दर्जनों गांव तो प्रभावित हो ही रहे हैैं। साथ ही सैदपुर नगर के सभी घाटों की सीढ़ियां गंगा के बढ़ते जलस्तर में समाने को आतुर होने लगी हैं। हालत यह है कि औड़िहार के वराहधाम स्थित आदित्य घाट की 52 में से 46 सीढ़ियां मोक्षदायिनी के बढ़ते जलस्तर में समा चुकी हैं। हर साल की त्रासदी झेल चुके तटवर्ती गांवों के रहवासी बाढ़ को लेकर सशंकित हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक दर्जनों एकड़ भूमि गंगा के बढ़ते जलस्तर की चपेट में जा चुकी है। सबसे अधिक परेशानी बाढ़ के पानी की हटने के बाद होती है। क्योंकि जलस्तर कम होते ही कटान की समस्या शुरू हो जाती है। वही गंदगी और कीचड़ से तमाम तरह की बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। लोगों की रोजी-रोटी छिन जाती है, और पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो जाता है।

जौहरगंज में बदला शव अंत्येष्टि का स्थल
मौधा। सैदपुर के जौहरगंज स्थित शमशान घाट पर भी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हालत यह हो गई है कि पिछले दो-तीन दिनों से शव अंत्येष्टि का काम गंगा के उपरी हिस्से में किया जाने लगा है। लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
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