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अकीदत के साथ अदा की गई जुमे की नमाज
गाजीपुर
Updated Fri, 19 Jun 2015 11:36 PM IST
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माह-ए-रमजान के पहले जुमे की नमाज शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अकीदत के साथ शुक्रवार को अदा की गई। बड़ी संख्या में रोजेदार मस्जिदों में पहुंचे। इमाम ने नमाज से पहले खुतबा बयान फरमाया।
इमाम ने खुतबे में रमजान की अहमियत बयान करते हुए बताया कि अल्लाह ताला माह-ए-रमजान में तौबा के दरवाजे खोल देते हैं। अगर बंदा रमजान की अहमियत को जान जाए, तो वह अल्लाह से दुआ करे कि हर माह रमजान का हो।
हमें चाहिए कि हम अल्लाह से दुआ करें कि अल्लाह रमजान के रौजों और तराबी के साथ-साथ सभी नेकियों को कबूल फरमाएं। शहर के जुडनशहीद, नखास, लालदरवाजा, महुआबाग, टाउनहाल, बरबरहना, गोराबाजार, शेखपुरा, सुजावलपुर,
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सैयदबाड़ा आदि मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा की गई। जमात में युवाओं के साथ ही बुजुर्ग और बच्चे भी काफी संख्या में शामिल थे। इसी प्रकार बहरियाबाद, शादियाबाद, मुहम्मदाबाद, बारा, दिलदारनगर, भदौरा, नोनहरा, बहादुरगंज,
नंदगंज, सैदपुर, जंगीपुर, बिरनो आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी रमजान माह के पहले जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। इस दौरान मस्जिदों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
किसी खास के आने की खबर आमतौर पर खुशगवार होती है और उसके स्वागत की तैयारियां भी बड़े पैैमाने पर की जाती हैं। अब यह अलग बात है कि आने वाला कौन है और इसकी तैयारियां कैसे की जाएं। हम बात कर रहे हैं
बाबरकत महीना रमजानुल मुबारक की। रमजान का आना न सिर्फ मुस्लिम महाशरे के लिए नहीं बल्कि दुनिया के हर फर्द के लिए खैरो बरकत लाता है। जोर शोर से तैयारियों के साथ मुस्लिम बंधुओं ने शुक्रवार को पहला रोजा रखा।
गुरुवार की रात तरावीह की नमाज अदा की गई, जो पूरे महीने चलेगी। नेकियों की बहार लाने वाला यह मुबारक महीना मुसलमानों के लिए न सिर्फ मगफिरत और जहन्नम से निजात (छुटकारा) का निमंत्रण लेकर आता है, बल्कि इस
महीने हमारे एखलाक और किरदार (संस्कार और चरित्र) की तरबियत भी होती हैै।
यह महीना वक्त की अहमियत का एहसास भी दिलाता हैै और हमारे अंदर बर्दाश्त की क्षमता भी पैदा करता है। इसके
अलावा अच्छाई-बुराई, झूठ-सच, पाप एवं पुण्य के बीच के अंतर को भी उजागर करके राहे हिदायत देता है और एक महीना किसी भी अच्छी आदत के आदि होने और खराब आदतें छोडने के लिए काफी होता है। बाबरकत महीना रमजान
में ही कुरान नाजिल हुआ। यह महीना तकवा, परहेजगारी, हमदर्दी, गंगुसारी, मुहब्बत व उलफत, खैरख्वाही, खिदमते खल्क, मानवता, एकता तथा अल्लाह एवं उसके रसूल से बेइन्तहां लौ लगाने का है। इसलिए इस महीने के स्वागत में
लोग अपने अंदर इन्हीं प्रवृतियों को पैदा करने की कोशिश करते हैं। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को रमजान की पहली तारीख को सहिफा अता किया गया।
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इमाम ने खुतबे में रमजान की अहमियत बयान करते हुए बताया कि अल्लाह ताला माह-ए-रमजान में तौबा के दरवाजे खोल देते हैं। अगर बंदा रमजान की अहमियत को जान जाए, तो वह अल्लाह से दुआ करे कि हर माह रमजान का हो।
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हमें चाहिए कि हम अल्लाह से दुआ करें कि अल्लाह रमजान के रौजों और तराबी के साथ-साथ सभी नेकियों को कबूल फरमाएं। शहर के जुडनशहीद, नखास, लालदरवाजा, महुआबाग, टाउनहाल, बरबरहना, गोराबाजार, शेखपुरा, सुजावलपुर,
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सैयदबाड़ा आदि मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा की गई। जमात में युवाओं के साथ ही बुजुर्ग और बच्चे भी काफी संख्या में शामिल थे। इसी प्रकार बहरियाबाद, शादियाबाद, मुहम्मदाबाद, बारा, दिलदारनगर, भदौरा, नोनहरा, बहादुरगंज,
नंदगंज, सैदपुर, जंगीपुर, बिरनो आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी रमजान माह के पहले जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। इस दौरान मस्जिदों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
किसी खास के आने की खबर आमतौर पर खुशगवार होती है और उसके स्वागत की तैयारियां भी बड़े पैैमाने पर की जाती हैं। अब यह अलग बात है कि आने वाला कौन है और इसकी तैयारियां कैसे की जाएं। हम बात कर रहे हैं
बाबरकत महीना रमजानुल मुबारक की। रमजान का आना न सिर्फ मुस्लिम महाशरे के लिए नहीं बल्कि दुनिया के हर फर्द के लिए खैरो बरकत लाता है। जोर शोर से तैयारियों के साथ मुस्लिम बंधुओं ने शुक्रवार को पहला रोजा रखा।
गुरुवार की रात तरावीह की नमाज अदा की गई, जो पूरे महीने चलेगी। नेकियों की बहार लाने वाला यह मुबारक महीना मुसलमानों के लिए न सिर्फ मगफिरत और जहन्नम से निजात (छुटकारा) का निमंत्रण लेकर आता है, बल्कि इस
महीने हमारे एखलाक और किरदार (संस्कार और चरित्र) की तरबियत भी होती हैै।
यह महीना वक्त की अहमियत का एहसास भी दिलाता हैै और हमारे अंदर बर्दाश्त की क्षमता भी पैदा करता है। इसके
अलावा अच्छाई-बुराई, झूठ-सच, पाप एवं पुण्य के बीच के अंतर को भी उजागर करके राहे हिदायत देता है और एक महीना किसी भी अच्छी आदत के आदि होने और खराब आदतें छोडने के लिए काफी होता है। बाबरकत महीना रमजान
में ही कुरान नाजिल हुआ। यह महीना तकवा, परहेजगारी, हमदर्दी, गंगुसारी, मुहब्बत व उलफत, खैरख्वाही, खिदमते खल्क, मानवता, एकता तथा अल्लाह एवं उसके रसूल से बेइन्तहां लौ लगाने का है। इसलिए इस महीने के स्वागत में
लोग अपने अंदर इन्हीं प्रवृतियों को पैदा करने की कोशिश करते हैं। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को रमजान की पहली तारीख को सहिफा अता किया गया।