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Ghazipur News: सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन, फिर फर्जी कॉल सेंटर से ठगी, तीन गिरफ्तार

Fri, 09 Oct 2026 12:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:16 AM IST
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Advertisement for overseas jobs on social media, followed by fraud via a fake call center; three arrested.
साइबर क्राइम थाना पुलिस द्वारा पकड़े गये फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगी करने के आरोपी। स्रोत- पुलि
गाजीपुर। फर्जी कॉल सेंटर के जरिये ठगी करने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी का आकर्षक विज्ञापन देकर बेरोजगारों को जाल में फंसाते थे। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इनके कब्जे से 3.54 लाख रुपये नकद, 23 सिम कार्ड, 13 एटीएम कार्ड, 10 मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर और दो चार पहिया वाहन बरामद किए हैं।
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अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन के सभागार में बताया कि गिरफ्तार आरोपी सिपाह जहूराबाद निवासी सोहन राम, सूर्य प्रकाश अरोरा और रजदेपुर निवासी फैजल खान उर्फ सन्नी हैं। तीनों संगठित तरीके से साइबर ठगी कर रहे थे।
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मजदूरों के नाम पर लेते थे खाते और सिम

एएसपी सिटी ने बताया कि मुख्य आरोपी सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रहकर रिक्शा चालकों, सिम बेचने वालों और अन्य जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके नाम पर सिम और म्यूल खाते हासिल करता था। इसके लिए उन्हें करीब एक से डेढ़ हजार रुपये दिए जाते थे। सिम और खाते की जानकारी अपने बेटे सूर्य प्रकाश अरोरा को भेजता था। इसके बाद फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी के विज्ञापन चलाए जाते थे। विज्ञापन में दिए नंबर पर बेरोजगार युवाओं के कॉल आते थे। सूर्य प्रकाश द्वारा संचालित फर्जी कॉल सेंटर में लड़कियां फोन रिसीव कर नौकरी का भरोसा दिलाती थीं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर पांच हजार रुपये लिए जाते थे और बायोडाटा व पासपोर्ट नंबर हासिल किया जाता था।
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फर्जी जॉब ऑफर और डमी टिकट से बढ़ाते थे भरोसा

अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. राकेश कुमार मिश्रा के अनुसार, विश्वास में लेने के बाद आरोपियों की ओर से कूटरचित जॉब ऑफर लेटर भेजकर और रकम मांगी जाती थी। सोहन राम डमी फ्लाइट टिकट बुक कराकर देता था, जिससे पीड़ितों को नौकरी और विदेश भेजने की प्रक्रिया वास्तविक लगती थी। इसके बाद म्यूल खातों और क्यूआर कोड के जरिये रकम मंगाई जाती थी। एएसपी सिटी ने बताया कि रकम सीएससी सेंटर संचालकों के खातों में क्यूआर कोड के माध्यम से मंगाकर सूर्य प्रकाश नकद और एटीएम से निकालता था। कुछ रकम के लालच में फैजल खान से भी रुपये निकलवाए जाते थे।

एक शिकायत के बाद सामने आया नेटवर्क

साइबर क्राइम थाने में फतेपुर सिंकदर के निवासी अभिव जयसवाल ने की शिकायत पर पांच अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायतकर्ता के सीएससी खाते में अगस्त से सितंबर के बीच करीब 15 लाख रुपये नकद निकाल लिए गए थे। इसके बाद खाते फ्रीज/लीन होने लगे। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से साक्ष्य जुटाए और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एएसपी डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बरामद सिम कार्ड, मोबाइल और अन्य दस्तावेज की जांच की जा रही है। आरोपियों ने कितने लोगों से ठगी की, इसका पता लगाया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट आई फोर सी, गृह मंत्रालय को भी भेजी जाएगी।

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गरीबों के खातों को बनाया ठगी का रास्ता

रिक्शा चालक और रेहड़ी वालों को रुपये का लालच देकर हासिल करते थे सिम व म्यूल खाते

गाजीपुर। साइबर ठगी के इस नेटवर्क में सबसे अहम कड़ी ऐसे लोगों के बैंक खाते और सिम थे, जिनके नाम पर लेनदेन होने के बाद ठगी की रकम को आगे बढ़ाया जाता था। अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. राकेश कुमार मिश्रा के अनुसार, मुख्य आरोपी सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रिक्शा चालकों, सिम बेचने वालों और अन्य जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके नाम पर सिम और म्यूल खाते हासिल करता था।

पुलिस के मुताबिक, इसके लिए संबंधित लोगों को करीब एक से डेढ़ हजार रुपये दिए जाते थे। इसके बाद सिम को कुरियर के माध्यम से गाजीपुर भेजा जाता था। यहां सूर्य प्रकाश अरोरा इसका इस्तेमाल फर्जी कॉल सेंटर और सोशल मीडिया के जरिये नौकरी के नाम पर ठगी में करता था।


ठगी की रकम सीधे आरोपियों के खातों में रखने के बजाय म्यूल खातों और क्यूआर कोड के माध्यम से सीएससी संचालकों के खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम नकद या एटीएम से निकाल ली जाती थी। पुलिस अब बरामद 23 सिम, 13 एटीएम और मोबाइल फोन की जांच कर रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के मामलों का पता लगाया जा सके।
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