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धर्म के मार्ग पर चल कर मिलेगा मोक्ष
Ghazipur
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। प्रेम का अभाव होने से अहंकार अपना घर बना लेता है। अहंकार से घृणा और द्वेष की भावना बलवती होने लगती है। प्रेम ही मानव जीवन की अमूल्य निधि है। मोक्ष पाना ही मानव जीवन का लक्ष्य है। विहंगम योग सबसे उत्तम साधना है तथा यह सिखाता है कि धर्म के मार्ग पर चल कर मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
यह बातें लंका मैदान में चल रहे सत्संग में सद्गुरु स्वतंत्रदेव ने कही। उन्होने कहा कि शरीर की पुष्टि तथा इंद्रियों की तृप्ति मानव जीवन का उद्देश्य नही हो सकता। अध्यात्म मानव जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। कहा कि अधिकांश लोगों का जीवन अविद्या तथा अंधकार में व्यतीत हो रहा है। लोगों को जड़ भक्ति से ऊपर उठकर चेतन पथ पर अग्रसर होने की आवश्यकता है। बताया कि विहंगम योग ही विशुद्ध चेतन भक्ति है। इसमें साधक सम्पूर्ण विकारों को त्याग कर आंतरिक शुद्ध स्वरूप की प्राप्ति करता है। इसी क्रम में संत प्रवर विज्ञान देव जी ने कहा कि यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठ कर्म है। अग्नि में हवि डालने से वह सूक्ष्म हो कर सूर्य तक फैल जाती है। अग्नि में डाला गया पदार्थ नष्ट नहीं होता बल्कि वह फैल जाता है। अग्नि का कार्य स्थूल पदार्थ को सूक्ष्म में परिवर्तित करना है। इससे वस्तु विस्तृत एवं गुणात्मक रुप से परिवर्तित होती है। इस मौके पर शुभमदेव जी, राजेश उपाध्याय, कृपाशंकर, दीपक, संतोष, विजयशंकर चतुर्वेदी, कामता प्रसाद, डा. अखंड प्रताप सिंह, नगीना पांडेय आदि मौजूद रहे।
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यह बातें लंका मैदान में चल रहे सत्संग में सद्गुरु स्वतंत्रदेव ने कही। उन्होने कहा कि शरीर की पुष्टि तथा इंद्रियों की तृप्ति मानव जीवन का उद्देश्य नही हो सकता। अध्यात्म मानव जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। कहा कि अधिकांश लोगों का जीवन अविद्या तथा अंधकार में व्यतीत हो रहा है। लोगों को जड़ भक्ति से ऊपर उठकर चेतन पथ पर अग्रसर होने की आवश्यकता है। बताया कि विहंगम योग ही विशुद्ध चेतन भक्ति है। इसमें साधक सम्पूर्ण विकारों को त्याग कर आंतरिक शुद्ध स्वरूप की प्राप्ति करता है। इसी क्रम में संत प्रवर विज्ञान देव जी ने कहा कि यज्ञ ही संसार में श्रेष्ठ कर्म है। अग्नि में हवि डालने से वह सूक्ष्म हो कर सूर्य तक फैल जाती है। अग्नि में डाला गया पदार्थ नष्ट नहीं होता बल्कि वह फैल जाता है। अग्नि का कार्य स्थूल पदार्थ को सूक्ष्म में परिवर्तित करना है। इससे वस्तु विस्तृत एवं गुणात्मक रुप से परिवर्तित होती है। इस मौके पर शुभमदेव जी, राजेश उपाध्याय, कृपाशंकर, दीपक, संतोष, विजयशंकर चतुर्वेदी, कामता प्रसाद, डा. अखंड प्रताप सिंह, नगीना पांडेय आदि मौजूद रहे।
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