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हाटकुक्ड को लेकर चढ़ाई आस्तीन
Ghazipur
Updated Tue, 17 Dec 2013 05:44 AM IST
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गाजीपुर। हाटकुक्ड योजना को एनजीओ को सौंपे जाने के विरोध में तथा पांच सूत्रीय मांगों के समर्थन में महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की ओर से सोमवार को सरजू पांडेय पार्क में धरना दिया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि अगर हमारी मांगों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो 31 दिसंबर को लखनऊ में विधानसभा के सामने प्रदर्शन किया जाएगा।
धरना सभा को संबोधित करते हुए मंडल संरक्षक जेसी तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार हाट कुक्ड योजना को एनजीओ के हवाले करने जा रही है। यह अनुचित है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे मंडल महासचिव फूलचंद ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाओं की सेवा 24 घंटे की है लेकिन उनकी पगार मात्र तीन हजार है। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष चंद्रप्रभा सिंह ने कहा कि कई स्थानों पर हाट कुक्ड एनजीओ को दे दिया गया है। वहां बच्चों को न तो समय से भोजन मिलता है और न ही ताजा भोजन मिलता है। प्रदेश सरकार शासनादेश के खिलाफ काम कर रही है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक आर्थिक एवं जातीय जनगणना कराने के डेढ़ साल बाद भी उसके पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया। सरकार अपने फायदे के लिए एनजीओ को योजनाएं बांट रही है। एनजीओ की ओर से विद्यालयों में वितरित किए गए मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की पोल खुल चुकी है। सरकार बच्चों को कुपोषण से मुक्त रखना चाहती है दूसरी तरफ कुपोषण लाने के लिए एनजीओ को न्योता दे रही है। यह व्यवस्था तत्काल बंद होनी चाहिए। कहा कि संगठन यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ने के लिए बाध्य होगा।
अध्यक्षता कर रहे कर्मचारी नेता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कर्मचारी यूनियन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की इस लड़ाई में उनके साथ है। धरना के अंत में मांगों से संबंधित पांच सूत्रीय पत्रक जिला प्रशासन को सौंपा गया। इस मौके पर जिला संरक्षक अशोक राय, रविकांत राजभर, सरस्वती मिश्र, माया राय, कमला यादव, सरोज श्रीवास्तव, कुंती, उषा जायसवाल, विद्या, हीरा, रतन देवी, दीपावली सिंह, मिथिलेश राय, प्रियंका राय, मीना राय, निर्मला, लाची, अमरनाथ दूबे, तिलकू कुशवाहा, संतोष यादव उपस्थित थे।
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धरना सभा को संबोधित करते हुए मंडल संरक्षक जेसी तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार हाट कुक्ड योजना को एनजीओ के हवाले करने जा रही है। यह अनुचित है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे मंडल महासचिव फूलचंद ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाओं की सेवा 24 घंटे की है लेकिन उनकी पगार मात्र तीन हजार है। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष चंद्रप्रभा सिंह ने कहा कि कई स्थानों पर हाट कुक्ड एनजीओ को दे दिया गया है। वहां बच्चों को न तो समय से भोजन मिलता है और न ही ताजा भोजन मिलता है। प्रदेश सरकार शासनादेश के खिलाफ काम कर रही है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक आर्थिक एवं जातीय जनगणना कराने के डेढ़ साल बाद भी उसके पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया। सरकार अपने फायदे के लिए एनजीओ को योजनाएं बांट रही है। एनजीओ की ओर से विद्यालयों में वितरित किए गए मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की पोल खुल चुकी है। सरकार बच्चों को कुपोषण से मुक्त रखना चाहती है दूसरी तरफ कुपोषण लाने के लिए एनजीओ को न्योता दे रही है। यह व्यवस्था तत्काल बंद होनी चाहिए। कहा कि संगठन यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ने के लिए बाध्य होगा।
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अध्यक्षता कर रहे कर्मचारी नेता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कर्मचारी यूनियन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की इस लड़ाई में उनके साथ है। धरना के अंत में मांगों से संबंधित पांच सूत्रीय पत्रक जिला प्रशासन को सौंपा गया। इस मौके पर जिला संरक्षक अशोक राय, रविकांत राजभर, सरस्वती मिश्र, माया राय, कमला यादव, सरोज श्रीवास्तव, कुंती, उषा जायसवाल, विद्या, हीरा, रतन देवी, दीपावली सिंह, मिथिलेश राय, प्रियंका राय, मीना राय, निर्मला, लाची, अमरनाथ दूबे, तिलकू कुशवाहा, संतोष यादव उपस्थित थे।
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