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सूबे के एक लाख शिक्षकों का नहीं कट रहा जीपीएफ
Ghazipur
Updated Sun, 08 Dec 2013 05:44 AM IST
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गाजीपुर। नई पेंशन नीति लागू होने के बाद भी जिला समेत प्रदेश के किसी भी शिक्षक का जीपीएफ नहीं कट रहा है। इससे शिक्षकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार शिक्षकों ने जीपीएफ के लिए आंदोलन भी किया, लेकिन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब शिक्षक आंदोलन की रूपरेखा बनाने की तैयारी में हैं।
वर्ष 2005 के बाद पूरे प्रदेश में एक लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की गई थी। इसमें सिर्फ अकेले गाजीपुर में 1700 से अधिक शिक्षक तैनात हैं। एक अप्रैल 2005 में नई पेंशन नीति लागू कर दी गई जिसके तहत सरकार अलग से शिक्षकों को पेंशन नहीं देगी। लेकिन शिक्षकों के वेतन से दस प्रतिशत कटौती करके जीपीएफ जमा कराया जाए। साथ ही दस प्रतिशत सरकार अपने कोष से शिक्षकों के जीपीएफ के खाते में जमा कराएगी। देखा जाए तो वर्ष 2005 से लेकर अब तक प्रदेश समेत जिले में शिक्षकों का जीपीएफ के तहत एक पैसे की भी कटौती नहीं हुई। यानी किसी भी शिक्षक का जीपीएफ खाता नहीं खोला गया। खाता नहीं खुलने से शिक्षकों के वेतन से कटौती नहीं हो पा रही है। इसको लेकर शिक्षक काफी परेशान हैं। जीपीएफ नहीं कटने से शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने पर पेंशन के नाम पर कुछ भी नहीं मिलेगा। इसके चलते शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार नई पेंशन नीति का सहारा लेकर शिक्षकों का शोषण कर रही है। हम लोग नई पेंशन नीति को स्वीकार भी नहीं करेंगे। यही नहीं शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दाखिल करके मांग किया है कि हम लोगों के नियुक्ति का विज्ञापन बेसिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2004 में जारी किया था। जबकि नियुक्ति पत्र वर्ष 2006 में मिला था। इसलिए पुरानी पेंशन नीति का ही लाभ दिया जाएगा। इसको लेकर सरकार भी असमंजस में है।
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वर्ष 2005 के बाद पूरे प्रदेश में एक लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की गई थी। इसमें सिर्फ अकेले गाजीपुर में 1700 से अधिक शिक्षक तैनात हैं। एक अप्रैल 2005 में नई पेंशन नीति लागू कर दी गई जिसके तहत सरकार अलग से शिक्षकों को पेंशन नहीं देगी। लेकिन शिक्षकों के वेतन से दस प्रतिशत कटौती करके जीपीएफ जमा कराया जाए। साथ ही दस प्रतिशत सरकार अपने कोष से शिक्षकों के जीपीएफ के खाते में जमा कराएगी। देखा जाए तो वर्ष 2005 से लेकर अब तक प्रदेश समेत जिले में शिक्षकों का जीपीएफ के तहत एक पैसे की भी कटौती नहीं हुई। यानी किसी भी शिक्षक का जीपीएफ खाता नहीं खोला गया। खाता नहीं खुलने से शिक्षकों के वेतन से कटौती नहीं हो पा रही है। इसको लेकर शिक्षक काफी परेशान हैं। जीपीएफ नहीं कटने से शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने पर पेंशन के नाम पर कुछ भी नहीं मिलेगा। इसके चलते शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।
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शिक्षकों का कहना है कि सरकार नई पेंशन नीति का सहारा लेकर शिक्षकों का शोषण कर रही है। हम लोग नई पेंशन नीति को स्वीकार भी नहीं करेंगे। यही नहीं शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दाखिल करके मांग किया है कि हम लोगों के नियुक्ति का विज्ञापन बेसिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2004 में जारी किया था। जबकि नियुक्ति पत्र वर्ष 2006 में मिला था। इसलिए पुरानी पेंशन नीति का ही लाभ दिया जाएगा। इसको लेकर सरकार भी असमंजस में है।
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