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500 से 25 कुंतल पर सिमटी मिर्च
Ghazipur
Updated Wed, 04 Dec 2013 05:43 AM IST
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भावरकोल। रोजाना भोर में ही लाखों का व्यवसाय कर लेने वाली क्षेत्र की पाताल गंगा की सब्जी मंडी करीब दो- तीन माह से बेरौनक है। इसका कारण पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण क्षेत्र में व्यापक स्तर पर बोई गई मिर्च, टमाटर आदि सब्जियां की तबाही है। यहां की सब्जी मंडी से आस-पास के प्रांतों के अलावा बंगलादेश और नेपाल तक भेजी जाती रही हैं। उत्पादन नहीं होने से अब इस मंडी में न तो किसान दिख रहे हैं और न ही बड़े व्यापारी।
क्षेत्र के बढ़नपुरा, नकटीकोल, रानीपुर, जसदेवपुर, मच्छटी, पखनपुरा, शेरपुर, कुंडेसरस कबीरपुर, मिलकपुरा, भावरकोल, सुखडेहरा, माचां, दोनपाह, लोचाइन, अवथही, सेमरा आदि गावों के हजारों एकड़ जमीन में टमाटर, मिर्चा, प्याज समेत हरी सब्जियों की खेती होती है। यहां के मंडी में इनकी जबरदस्त खपत है। दूर दराज से आने वाले व्यापारी किसानों से सीधे खरीद लेते है। अच्छी आमदनी के चलते तथा व्यापारियों के आने के कारण पातालगंगा की सब्जी मंडी का नाम दूर-दूर तक है। लेकिन इस बार बाढ़ आ जाने से किसानों की पहली नर्सरी पूरी तरह से नष्ट हो गई। इसके बाद हिम्मत कर कुछ किसानों ने दूसरी बार बुआई की तो उसे चक्रवात और बरसात ने ले लिया। इससे सब्जी के खेती पूरी तरह से बरबाद हो गई। अब माल नहीं होने से मंडी में व्यापारियों ने आना कम कर दिया है। इस समय तक इस मंडी में जहां करीब 5 सौ कुं तल तक मिर्च की आवक होती थी वह अब 25 कुं तल पर ही सिमट गई है। टमाटर का भी पता नहीं चल रहा है । क्षेत्रीय किसान विजयशंकर पांडेय ने बताया कि सब्जी का उत्पादन नहीं होने से यह मंडी इस बार बदहाल हो गई है। इस मंडी में भी व्यापारियों की सुविधा के लिए बिजली, पानी तथा ठहरने की व्यवस्था नहीं है। यहां मंडी समिति यूसुफपुर की ओर से शुल्क भी वसूला जाता है।
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क्षेत्र के बढ़नपुरा, नकटीकोल, रानीपुर, जसदेवपुर, मच्छटी, पखनपुरा, शेरपुर, कुंडेसरस कबीरपुर, मिलकपुरा, भावरकोल, सुखडेहरा, माचां, दोनपाह, लोचाइन, अवथही, सेमरा आदि गावों के हजारों एकड़ जमीन में टमाटर, मिर्चा, प्याज समेत हरी सब्जियों की खेती होती है। यहां के मंडी में इनकी जबरदस्त खपत है। दूर दराज से आने वाले व्यापारी किसानों से सीधे खरीद लेते है। अच्छी आमदनी के चलते तथा व्यापारियों के आने के कारण पातालगंगा की सब्जी मंडी का नाम दूर-दूर तक है। लेकिन इस बार बाढ़ आ जाने से किसानों की पहली नर्सरी पूरी तरह से नष्ट हो गई। इसके बाद हिम्मत कर कुछ किसानों ने दूसरी बार बुआई की तो उसे चक्रवात और बरसात ने ले लिया। इससे सब्जी के खेती पूरी तरह से बरबाद हो गई। अब माल नहीं होने से मंडी में व्यापारियों ने आना कम कर दिया है। इस समय तक इस मंडी में जहां करीब 5 सौ कुं तल तक मिर्च की आवक होती थी वह अब 25 कुं तल पर ही सिमट गई है। टमाटर का भी पता नहीं चल रहा है । क्षेत्रीय किसान विजयशंकर पांडेय ने बताया कि सब्जी का उत्पादन नहीं होने से यह मंडी इस बार बदहाल हो गई है। इस मंडी में भी व्यापारियों की सुविधा के लिए बिजली, पानी तथा ठहरने की व्यवस्था नहीं है। यहां मंडी समिति यूसुफपुर की ओर से शुल्क भी वसूला जाता है।
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