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जनपद में यूरिया की कमी से जूझ रहे किसान
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गाजीपुर/बहादुरगंज। रबी की फसलों की बुआई अपने अंतिम चरण में है, लेकिन उर्वरक की कमी के चलते किसानों के बुआई में परेशानी उठानी पड़ रही है। रबी की मुख्य फसल गेहूं के अतिरिक्त आलू, दलहन, सरसों, तीसी आदि की खेती जनपद में होती है। मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद, जमानिया और सैदपुर तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है, जिसकी बुआई नवंबर-दिसंबर में पूर्ण हो चुकी है। अब खेतों में यूरिया खाद देना जरूरी है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में अभी भी गेहूं की बुआई चल रही है, जिसमें डीएपी के साथ-साथ यूरिया की भी जरुरत पड़ती है। पहले से बोए गए गेहूं के खेत़ में भी सिंचाई के समय यूरिया का छिड़काव आवश्यक हो जाता है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यूरिया की कमी से किसान जूझ रहे हैं।
मुहम्मदाबाद विकासखंड में यूरिया की किल्लत कम है, लेकिन बाराचवर, रेवतीपुर, सैदपुर, जखनियां, बिरनो आदि विकास खंडों और जमानिया तहसील में यूरिया के साथ डीएपी का भी अभाव है।
जिले में सहकारी समितियों के साथ-साथ प्राइवेट दुकानों से भी उर्वरक मिलता है। जिले में कुल 182 सहकारी समितियां हैं, जिसमें से 16 सहकारी समितियां परिसमापन में हैं तथा 166 समितियों पर उर्वरक किसानों तक पहुंचाने का काम किया जाता है। उसमें से 148 सहकारी समितियां कृषकों को ऋण एवं नगद दोनों तरह से उर्वरक उपलब्ध कराती हैं। जबकि 18 सहकारी समितियां सिर्फ नगद उर्वरक बिक्री करती है। हमीद सेतु पर जाम एवं सेतु में आए दिन खराबी के कारण जमानिया तहसील में उर्वरक की आपूर्ति न होने से समितियों में खाद नहीं है।
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इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले माह 5200 मीट्रिक टन यूरिया जनपद को उपलब्ध कराई गई थी। जिसमें से 3800 एमटी समितियों पर भेजी जा चुकी है। मात्र 1400 एमटी यूरिया स्टाक में है, जिसे मांग के अनुसार भेजा जा रहा है। इसी प्रकार 2631 एमटी डीएपी आई थी, जिसमें से मात्र 350 एमटी बची है। जिले में इस समय गेहूं की सिंचाई चल रही है। सिंचाई के तुरंत बाद यूरिया का छिड़काव किया जाता है। यूरिया के लिए किसानों को सहकारी समितियों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
कोट
जिले में यूरिया का लक्ष्य 29884 एमटी निर्धारित है। जनवरी माह तक लक्ष्य 14753 एमटी के सापेक्ष 21560 मीट्रिक टन यूरिया जिले में उपलब्ध है। गंगा पार के क्षेत्रों में हमीद सेतु में आई खराबी तथा सड़कों की खराबी की वजह से लगने वाले जाम के कारण समितियों पर खाद पहुंचाने में कठिनाई आ रही है। जल्द ही इन समितियों पर यूरिया उपलब्ध करा दी जाएगी। मृत्युंजय कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
मुहम्मदाबाद विकासखंड में यूरिया की किल्लत कम है, लेकिन बाराचवर, रेवतीपुर, सैदपुर, जखनियां, बिरनो आदि विकास खंडों और जमानिया तहसील में यूरिया के साथ डीएपी का भी अभाव है।
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जिले में सहकारी समितियों के साथ-साथ प्राइवेट दुकानों से भी उर्वरक मिलता है। जिले में कुल 182 सहकारी समितियां हैं, जिसमें से 16 सहकारी समितियां परिसमापन में हैं तथा 166 समितियों पर उर्वरक किसानों तक पहुंचाने का काम किया जाता है। उसमें से 148 सहकारी समितियां कृषकों को ऋण एवं नगद दोनों तरह से उर्वरक उपलब्ध कराती हैं। जबकि 18 सहकारी समितियां सिर्फ नगद उर्वरक बिक्री करती है। हमीद सेतु पर जाम एवं सेतु में आए दिन खराबी के कारण जमानिया तहसील में उर्वरक की आपूर्ति न होने से समितियों में खाद नहीं है।
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इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले माह 5200 मीट्रिक टन यूरिया जनपद को उपलब्ध कराई गई थी। जिसमें से 3800 एमटी समितियों पर भेजी जा चुकी है। मात्र 1400 एमटी यूरिया स्टाक में है, जिसे मांग के अनुसार भेजा जा रहा है। इसी प्रकार 2631 एमटी डीएपी आई थी, जिसमें से मात्र 350 एमटी बची है। जिले में इस समय गेहूं की सिंचाई चल रही है। सिंचाई के तुरंत बाद यूरिया का छिड़काव किया जाता है। यूरिया के लिए किसानों को सहकारी समितियों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
कोट
जिले में यूरिया का लक्ष्य 29884 एमटी निर्धारित है। जनवरी माह तक लक्ष्य 14753 एमटी के सापेक्ष 21560 मीट्रिक टन यूरिया जिले में उपलब्ध है। गंगा पार के क्षेत्रों में हमीद सेतु में आई खराबी तथा सड़कों की खराबी की वजह से लगने वाले जाम के कारण समितियों पर खाद पहुंचाने में कठिनाई आ रही है। जल्द ही इन समितियों पर यूरिया उपलब्ध करा दी जाएगी। मृत्युंजय कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।