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गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना करने की बन रही नीति
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गाजीपुर। विकास भवन के सभागार में जिले के ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों/ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना के संबंध में शनिवार को बैठक हुई।
इस अवसर पर डीएम ने बताया कि बैठक में बताया गया कि गाय का दूध निकालकर उन्हें एवं उनके गोवंश को लावारिस छोड़ने वाले कृषकों/पशुपालकों का चिन्हांकन ग्राम स्तरीय, विभागीय कार्मिक, राजस्व विभाग के लेखपाल, पुलिस विभाग के चौकीदार, ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी द्वारा किया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि पशुपालकों/कृषकों के अपने पालतू पशु सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों तथा अन्य व्यक्तियों की निजी भूमि पर संचरण के लिए अगर छोड़ा जाता है तो पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन तथा नगर पालिका द्वारा उचित आर्थिक दंड की कार्रवाई सुसंगत अधिनियमों के अंतर्गत की जाएगी।
जिलाधिकारी के बालाजी ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निराश्रित एवं बेसहारा पशुओं की समस्या के निदान एवं संख्या में कमी लाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इस समस्या के निराकरण के लिए जिले के सभी ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना करनेे की नीति बनाई जा रही है। इस नीति का उद्देश्य निराश्रित/बेसहारा गोवंश को आश्रय उपलब्ध कराया जाना है, आश्रय स्थल पर रखे गए गोवंश के भरण पोषण की व्यवस्था करना, संरक्षित गोवंश को विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण एवं समुचित चिकित्सा व्यवस्था तथा नर गोवंश का बंध्याकरण करना, गोवंश से उत्पादित दूध, गोबर, कंपोस्ट आदि के विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थल को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाकर जन मानस को निराश्रित/बेसहारा गोवंश की समस्या से छुटकारा दिलाना है।
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इस अवसर पर डीएम ने बताया कि बैठक में बताया गया कि गाय का दूध निकालकर उन्हें एवं उनके गोवंश को लावारिस छोड़ने वाले कृषकों/पशुपालकों का चिन्हांकन ग्राम स्तरीय, विभागीय कार्मिक, राजस्व विभाग के लेखपाल, पुलिस विभाग के चौकीदार, ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी द्वारा किया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि पशुपालकों/कृषकों के अपने पालतू पशु सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों तथा अन्य व्यक्तियों की निजी भूमि पर संचरण के लिए अगर छोड़ा जाता है तो पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन तथा नगर पालिका द्वारा उचित आर्थिक दंड की कार्रवाई सुसंगत अधिनियमों के अंतर्गत की जाएगी।
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जिलाधिकारी के बालाजी ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निराश्रित एवं बेसहारा पशुओं की समस्या के निदान एवं संख्या में कमी लाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इस समस्या के निराकरण के लिए जिले के सभी ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना करनेे की नीति बनाई जा रही है। इस नीति का उद्देश्य निराश्रित/बेसहारा गोवंश को आश्रय उपलब्ध कराया जाना है, आश्रय स्थल पर रखे गए गोवंश के भरण पोषण की व्यवस्था करना, संरक्षित गोवंश को विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण एवं समुचित चिकित्सा व्यवस्था तथा नर गोवंश का बंध्याकरण करना, गोवंश से उत्पादित दूध, गोबर, कंपोस्ट आदि के विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थल को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाकर जन मानस को निराश्रित/बेसहारा गोवंश की समस्या से छुटकारा दिलाना है।
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