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महिलाओं को मिले उचित सम्मान : अनिल सोनकर
Sat, 05 Jan 2019 12:02 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jan 2019 12:02 AM IST
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नगर के आरटीआई मैदान में शुक्रवार को आयोजित ‘अमर उजाला’ अपराजिता अंतर्गत ‘महिलाओं का समाज में योगदान’ विषय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कि जिला प्रोवेशन अधिकारी अनिल सोनकर ने कहा कि समाज का विकास की कल्पना तब तक पूरी नहीं होगी, जब तक महिलाओं को उचित सम्मान न दिया जाए। वर्तमान में महिलाओं का समाज में बहुत बड़ा योगदान है। इनके विरुद्ध हिंसा और अत्याचार रोकना हर हाल में जरूरी है।
बेसिक शिक्षाधिकारी श्रवण यादव ने कहा कि महिलाओं के बिना परिवार और समाज की संरचना संभव नहीं है। अब पुरुष अपनी मानसिकता को बदलें और सदियों पुरानी रूढ़ियों से समाज में होने वाले नुकसान को दूर करे। महिला और पुरुष दोनों को अपने संकीर्ण विचारों को त्यागते हुए स्वच्छ समाज के निर्माण में तत्पर होना चाहिए। अपराजिता कार्यक्रम इस दिशा में एक सार्थक पहल कर रहा है, जो महिलाओं की खामोशी को आवाज देने का सकारात्मक प्रयास होगा।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद व्यास ने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज को अपना नजरिया बदलने के साथ ही उनके योगदान को और महत्व देना होगा। संगोष्ठी में 100 से अधिक महिलाओं ने शपथ पत्र भरा। आंगनबाड़ी कार्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष आशा पटेल ने कहा कि छात्राओं के लिए चाहे घर में पढ़ाई का मामला हो या घर से बाहर निकलने की आजादी का इस पर भी अभी तक पुरुषों की सोच सही नहीं है। इस सोच को बदलना जरूरी है। महिला सशक्तीकरण पुरुष और महिला की साझा जिम्मेदारी है। यह समाज का नैतिक दायित्व भी है। इस मौके पर मुख्य रूप से रेखा पासवान, आरती प्रजापति, गूंजा वर्नवाल, संजू यादव, सुनीता पांडेय आदि उपस्थित रहीं।
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बेसिक शिक्षाधिकारी श्रवण यादव ने कहा कि महिलाओं के बिना परिवार और समाज की संरचना संभव नहीं है। अब पुरुष अपनी मानसिकता को बदलें और सदियों पुरानी रूढ़ियों से समाज में होने वाले नुकसान को दूर करे। महिला और पुरुष दोनों को अपने संकीर्ण विचारों को त्यागते हुए स्वच्छ समाज के निर्माण में तत्पर होना चाहिए। अपराजिता कार्यक्रम इस दिशा में एक सार्थक पहल कर रहा है, जो महिलाओं की खामोशी को आवाज देने का सकारात्मक प्रयास होगा।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद व्यास ने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज को अपना नजरिया बदलने के साथ ही उनके योगदान को और महत्व देना होगा। संगोष्ठी में 100 से अधिक महिलाओं ने शपथ पत्र भरा। आंगनबाड़ी कार्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष आशा पटेल ने कहा कि छात्राओं के लिए चाहे घर में पढ़ाई का मामला हो या घर से बाहर निकलने की आजादी का इस पर भी अभी तक पुरुषों की सोच सही नहीं है। इस सोच को बदलना जरूरी है। महिला सशक्तीकरण पुरुष और महिला की साझा जिम्मेदारी है। यह समाज का नैतिक दायित्व भी है। इस मौके पर मुख्य रूप से रेखा पासवान, आरती प्रजापति, गूंजा वर्नवाल, संजू यादव, सुनीता पांडेय आदि उपस्थित रहीं।
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