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मानसून की बेरूखी से हजारों बीघे धान की फसल सूखने की कगार पर

Sat, 07 Oct 2017 11:23 PM IST
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:23 PM IST
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मानसून की बेरूखी से हजारों बीघे धान की फसल सूखने की कगार पर
गाजीपुर। मानसून की बेरुखी से परेशान किसानों ने अब इंद्र देव को खुश करने के लिए हवन-यज्ञ का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हाल ही में करीमुद्दीनपुर और रेवतीपुरक्षेत्र में हवन-यज्ञ तक किया गया। फिर भी इंद्रदेव प्रसन्न नहीं हुए। वैसे कुछ दिन पहले तक कहीं न कहीं बूंदाबांदी होती थी, लेकिन पिछले एक हफ्ते से एक भी बूंद पानी नहीं गिरा। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। नहरों के टेल तक पानी न आ पाने के कारण किसान परेशान हैं। खेती में हजारों रुपये खर्चा करने के बाद भी धान की फसलें सूख रही हैं। खेतों में दरारें पड़ रही हैं, जिसका सीधा असर पौधे पर पड़ रहा है। ऐसी दशा में हजारों बीघे की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
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शनिवार को पूरे दिन आसमान में बादलों का आना-जाना लगा रहा। किसान टकटकी लगाए रहे कि बारिश होगी। लेकिन बादल ललचा कर चले गए और बारिश के आसार दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहे हैं। कई इलाकों में दिन-रात ट्यूबवेल चलाने के बाद भी धान में पानी पूरा नहीं हो रहा है। कई दिनों बाद किसी तरह धान की सिंचाई हो पा रही है, जिससे धान में खरपतवार उग गए हैं। नहरों के टेल तक पानी न आ पाने के कारण धान की लहलहाती फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। परिश्रम और लागत से तैयार की गई फसलों को सूखते देख किसान परेशान हैं, लेकिन उनके सामने कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा। नहरों में उगी झाड़ी तथा किनारे उगी घास और पानी के कम बहाव के चलते टेलों तक पानी अभी तक नही पहुंच पाया है। ज्यादातर नहरें सूखी हुई हैं। बिजली न रहने से सरकारी नलकूपों का भी यही हाल है। इन सारी समस्याओं को लेकर किसान अपना दर्द बयां कर रहे हैं। हरदासपुर निवासी मनोज कुमार राय का कहना है कि बारिश न होने से धान की फसल में पानी पूरा करना मुश्किल हो रहा है। धान रोपाई के बाद खरपतवार नाशक का छिड़काव करना पड़ता है। दवा छिड़ने के बाद दो-तीन दिन तक पानी रहना बहुत जरूरी है, लेकिन पानी होना तो दूर जमीन भी गीली नहीं रह पा रही है। इसलिए खरपतवार निकालने के लिए मजदूरों को लगाना पड़ेगा।
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दुबिहां निवासी किसान नंदू कुशवाहा ने बताया कि जब से धान की रोपाई की है, उसी समय से ट्यूबवेल एक दिन भी बंद नहीं हुआ है। जब बिजली आती है ट्यूबवेल चलाया जाता है और बिजली चली जाने के बाद जनरेटर से ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। इसलिए किसानों को खर्चा कई गुणा बढ़ गया है। अगर इंद्र देव खुश नहीं हुए तो धान की फसल पकाने में किसानों को बहुत अधिक दिक्कत आएगी।
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कमसड़ी निवासी किसान हरिशंकर राय का कहना है कि बारिश न होने से हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं। लाख कोशिशों के बाद भी धान की फसल में पानी पूरा नहीं हो पा रहा है। अगर यही हालात रहे तो कुछ दिनों बाद हरे चारे की कमी होने शुरू हो जाएगी। भगवान से प्रार्थना है कि अब बारिश कर दे। असावर निवासी दंगल तिवारी का कहना है कि अपनी लहलहाती धान की फसल को सूखते देख मात्र आंसू बहाने के शिवाय किसानों के पास कोई चारा नहीं बचा है। मानसून ने धोखा दे दिया है और नहरों में माइनरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। जिले में हजारों बीघे धान की फसल सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। विभाग की इस लापरवाही व उदासीनता के चलते किसान निराश हैं।


धनाभाव की वजह से नहरों की साफ-सफाई न होने से टेल तक पानी पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो रही है। खेती का समय होने के कारण पानी की आवश्यकता बढ़ गई है। टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। - एसपी सिंह, अधिशासी अभियंता देवकली पंप कैनाल।
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