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Ghazipur News: 45 वर्ष की उम्र...देखी है बाहर लगी कतारें भीं और वीरानगी इस दौर की भी
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-हिंदी की 11 हजार, उर्दू की 16 हजार , अंग्रेजी की तीन हजार, पाण्डुलिपियां एक हजार और अन्य भाषाओं की हैं ढाई हजार से अधिक पुस्तकें
-कभी बैठने के लिए लोग नंबर का करते थे इंतजार, आज पुस्तकालय है वीरान
संवाद न्यूज एजेंसी
बहरियाबाद। मैं इस वर्ष 15 अगस्त को 45 वर्ष का हो जाऊंगा। मेरे रैकों में विभिन्न विद्याओं और कई भाषाओं की 34 हजार 631 पुस्तकें हैं। आपको बताऊं, एक समय हुआ करता था कि जब मेरे शांत कमरे की कुर्सियों पर बैठने के लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते थे। मेरा दरवाजा किताब पढ़ने वालों के लिए हमेशा खुला रहता है। पढ़ने वालों को देखकर में भी बेहद खिला-खिला रहता था। लेकिन आज यहां बीरानगी देखकर आंखें भर आतीं हैं। ...मैं कौन हूं ? ये तो बताया ही नहीं ...मैं बहरियाबाद इलाके का पुस्तकालय हूं जो इन दिनों वीरान सा पड़ा रहता है।
बहरियाबाद कस्बा में एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने 15 अगस्त सन् 1978 को चंद किताबों के पुस्तकालय की स्थापना की थी। दिन में 11 से शाम 5 बजे तक पुस्तकालय खुलता है। पुस्तकालय में इस समय 34 हजार 631 पुस्तकें है। जिनमें हिंदी की 11 हजार 317, उर्दू की 16 हजार 210, अंग्रेजी की 3152, पाण्डुलिपियां एक हजार सात और अन्य 2945 पुस्तकें हैं। कहने को 1264 सदस्य जुड़े हैं। लेकिन, अध्ययन करने वाले पाठकों की संख्या न के बराबर हो गई है।
पुस्तकालय के सचिव एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने कहते कि पूर्व के वर्षों की अपेक्षा वर्तमान में लोगों के अन्दर पुस्तकालयों के प्रति उदासीनता आई है, इसका बड़ा कारण है सोशल मीडिया है। अधिकांश जानकारी लोगों को सोशल मीडिया पर घर बैठे मिल जाती है। यही कारण है कि अब पुस्तकालय में पहले की तरह किताबें पढ़ने वालों का जमघट नहीं लगता। पुस्तकालय की समुचित व्यवस्था के लिए शासकीय सहायता व आधुनिकीकरण की व्यवस्था की आवश्यकता है।
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इस तरह की किताबें
इस पुस्तकालय में उर्दू में लिखित महाभारत जैसी पौराणिक किताब हैं, तो वहीं विश्व प्रसिद्ध शायर उमर खय्याम की रुबाईयों के चार खण्ड की पाण्डुलिपि प्रति मौजूद हैं। पौराणिक कहानियों पर आधारित देवकीनंदन खत्री कृत उपन्यास चंद्रकांता संतति भी मौजूद है, जिसे पढ़ने के लिए अनेक विदेशी जिज्ञासु विद्वानों ने हिन्दी भाषा सीखी।
इस पुस्तकालय में विश्व के नामचीन लेखकों के पुस्तकों के साथ ही स्थानीय लेखकों की पुस्तक भी उपलब्ध है, जिनमें काजी अशफाक अहमद की लिखी पुस्तक आशुफ्ता बयानी मेरी, देश-विदेश के के विद्वानों द्वारा प्रोफेसर मुशीरुलहक की शैक्षिक विद्वता पर आधारित संकलन प्रोफेसर मुशीरुलहक की विश्व व्यापी शैक्षिक सेवाएं को किताबी शक्ल प्रोफेसर डाक्टर शाह अब्दुस्सलाम ने दिया था, जो इस लाइब्रेरी में मौजूद है। एहतेशाम सिद्दीकी की रचना बाल साहित्य अनमोल कहानियां तथा इस्लाही कहानियां भी मौजूद हैं, जिस पर उर्दू अकादमी द्वारा इसी वर्ष उन्हें सम्मानित किया था।
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-कभी बैठने के लिए लोग नंबर का करते थे इंतजार, आज पुस्तकालय है वीरान
संवाद न्यूज एजेंसी
बहरियाबाद। मैं इस वर्ष 15 अगस्त को 45 वर्ष का हो जाऊंगा। मेरे रैकों में विभिन्न विद्याओं और कई भाषाओं की 34 हजार 631 पुस्तकें हैं। आपको बताऊं, एक समय हुआ करता था कि जब मेरे शांत कमरे की कुर्सियों पर बैठने के लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते थे। मेरा दरवाजा किताब पढ़ने वालों के लिए हमेशा खुला रहता है। पढ़ने वालों को देखकर में भी बेहद खिला-खिला रहता था। लेकिन आज यहां बीरानगी देखकर आंखें भर आतीं हैं। ...मैं कौन हूं ? ये तो बताया ही नहीं ...मैं बहरियाबाद इलाके का पुस्तकालय हूं जो इन दिनों वीरान सा पड़ा रहता है।
बहरियाबाद कस्बा में एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने 15 अगस्त सन् 1978 को चंद किताबों के पुस्तकालय की स्थापना की थी। दिन में 11 से शाम 5 बजे तक पुस्तकालय खुलता है। पुस्तकालय में इस समय 34 हजार 631 पुस्तकें है। जिनमें हिंदी की 11 हजार 317, उर्दू की 16 हजार 210, अंग्रेजी की 3152, पाण्डुलिपियां एक हजार सात और अन्य 2945 पुस्तकें हैं। कहने को 1264 सदस्य जुड़े हैं। लेकिन, अध्ययन करने वाले पाठकों की संख्या न के बराबर हो गई है।
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पुस्तकालय के सचिव एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने कहते कि पूर्व के वर्षों की अपेक्षा वर्तमान में लोगों के अन्दर पुस्तकालयों के प्रति उदासीनता आई है, इसका बड़ा कारण है सोशल मीडिया है। अधिकांश जानकारी लोगों को सोशल मीडिया पर घर बैठे मिल जाती है। यही कारण है कि अब पुस्तकालय में पहले की तरह किताबें पढ़ने वालों का जमघट नहीं लगता। पुस्तकालय की समुचित व्यवस्था के लिए शासकीय सहायता व आधुनिकीकरण की व्यवस्था की आवश्यकता है।
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इस तरह की किताबें
इस पुस्तकालय में उर्दू में लिखित महाभारत जैसी पौराणिक किताब हैं, तो वहीं विश्व प्रसिद्ध शायर उमर खय्याम की रुबाईयों के चार खण्ड की पाण्डुलिपि प्रति मौजूद हैं। पौराणिक कहानियों पर आधारित देवकीनंदन खत्री कृत उपन्यास चंद्रकांता संतति भी मौजूद है, जिसे पढ़ने के लिए अनेक विदेशी जिज्ञासु विद्वानों ने हिन्दी भाषा सीखी।
इस पुस्तकालय में विश्व के नामचीन लेखकों के पुस्तकों के साथ ही स्थानीय लेखकों की पुस्तक भी उपलब्ध है, जिनमें काजी अशफाक अहमद की लिखी पुस्तक आशुफ्ता बयानी मेरी, देश-विदेश के के विद्वानों द्वारा प्रोफेसर मुशीरुलहक की शैक्षिक विद्वता पर आधारित संकलन प्रोफेसर मुशीरुलहक की विश्व व्यापी शैक्षिक सेवाएं को किताबी शक्ल प्रोफेसर डाक्टर शाह अब्दुस्सलाम ने दिया था, जो इस लाइब्रेरी में मौजूद है। एहतेशाम सिद्दीकी की रचना बाल साहित्य अनमोल कहानियां तथा इस्लाही कहानियां भी मौजूद हैं, जिस पर उर्दू अकादमी द्वारा इसी वर्ष उन्हें सम्मानित किया था।