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आयुर्वेदिक अस्पताल में खल रहा है चिकित्सक का अभाव
Updated Sun, 17 Jun 2018 10:36 PM IST
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सेवराई (गाजीपुर)। तहसील क्षेत्र के नवली गांव का राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय इन दिनों औचित्यविहीन हो गया है। छह बेड के इस अस्पताल में करीब एक दशक से कोई चिकित्सक नहीं है। वार्ड ब्वाय और फार्मासिस्ट के सहारे यह अस्पताल सांस भले ले रहा है लेकिन मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इलाज के लिए 10 से 15 किमी दूर भदौरा या दिलदारनगर अथवा जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। लोगों ने जन प्रतिनिधियों और आला अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया लेकिन किसी स्तर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
एक तरफ सरकार जहां योग और आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार और उसके लाभ की जानकारी के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं अधिकारियों की उपेक्षा के कारण क्षेत्र का एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय दम तोड़ रहा है। चिकित्सक नहीं होने से दर्जनों गांवों के मरीजों को इस अस्पताल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के नवली, त्रिलोकपुर, गजरही, भिटुका, खडवल, महना, उतरौली आदि कई गांव के हजारों की आबादी के बीच एक राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थापना की गई। शुरू में इन गांव के सैकड़ों मरीज प्रतिदिन आयुर्वेदिक उपचार का लाभ उठाते थे। वर्ष 2004 के बाद इस चिकित्सालय पर चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई जिससे रोगियों को निराशा होने लगी। यहां एक वार्ड ब्वाय और एक फार्मासिस्ट तैनात है। ये रोजाना हॉस्पिटल खोलने की औपचारिकता पूरी करते हैं लेकिन चिकित्सक के न रहने से मरीज इधर आते ही नहीं। चिकित्सालय का भवन भी रखरखाव के अभाव में जर्जर हो गया है। मुख्य दरवाजा और खिड़कियां भी टूट गई हैं। परिसर में जगह-जगह बड़ी-बड़ी घास-फूस उग आई है। चिंता की बात यह है कि अस्पताल की खाली जगह पर कुछ लोग खेती भी करने लगे हैं। नवली गांव निवासी विश्वजीत सिंह, अमित पांडेय, आदित्य सिंह, विशाल आदि ने बताया कि चिकित्सक की कमी की बात कई बार जनप्रतिनिधियों को मौखिक तथा लिखित बताई गई लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। इस मामले को लेकर छात्र नेता विश्वजीत सिंह के नेतृत्व में युवाओं ने प्रदर्शन भी किया। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गिरीशचंद्र मौर्या ने बताया कि मामला संज्ञान में है। अभी जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। जल्द ही इस अस्पताल पर चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।
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एक तरफ सरकार जहां योग और आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार और उसके लाभ की जानकारी के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं अधिकारियों की उपेक्षा के कारण क्षेत्र का एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय दम तोड़ रहा है। चिकित्सक नहीं होने से दर्जनों गांवों के मरीजों को इस अस्पताल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के नवली, त्रिलोकपुर, गजरही, भिटुका, खडवल, महना, उतरौली आदि कई गांव के हजारों की आबादी के बीच एक राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थापना की गई। शुरू में इन गांव के सैकड़ों मरीज प्रतिदिन आयुर्वेदिक उपचार का लाभ उठाते थे। वर्ष 2004 के बाद इस चिकित्सालय पर चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई जिससे रोगियों को निराशा होने लगी। यहां एक वार्ड ब्वाय और एक फार्मासिस्ट तैनात है। ये रोजाना हॉस्पिटल खोलने की औपचारिकता पूरी करते हैं लेकिन चिकित्सक के न रहने से मरीज इधर आते ही नहीं। चिकित्सालय का भवन भी रखरखाव के अभाव में जर्जर हो गया है। मुख्य दरवाजा और खिड़कियां भी टूट गई हैं। परिसर में जगह-जगह बड़ी-बड़ी घास-फूस उग आई है। चिंता की बात यह है कि अस्पताल की खाली जगह पर कुछ लोग खेती भी करने लगे हैं। नवली गांव निवासी विश्वजीत सिंह, अमित पांडेय, आदित्य सिंह, विशाल आदि ने बताया कि चिकित्सक की कमी की बात कई बार जनप्रतिनिधियों को मौखिक तथा लिखित बताई गई लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। इस मामले को लेकर छात्र नेता विश्वजीत सिंह के नेतृत्व में युवाओं ने प्रदर्शन भी किया। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. गिरीशचंद्र मौर्या ने बताया कि मामला संज्ञान में है। अभी जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। जल्द ही इस अस्पताल पर चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।
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