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अकीदत के साथ मनाया गया बाबा गूदर शाह का 400वां उर्स
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:57 PM IST
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सैदपुर। क्षेत्र के बेलहरी स्थित तकिया बाबा गूदर शाह का 400वां उर्स पूरे अकीदत के साथ चांद की 15 तारीख 3-4 जनवरी को मनाया गया। गूदर शाह के आस्ताने से चादर एवं गागर उठा बाबा गूदर शाह के उर्स मुबारक पर हजारों जायरीनों ने मजार पर हाजिरी लगाई। उर्स का आगाज देर रात कुल शरीफ एवं फातेहा से हुआ।
गूदर शाह बाबा के आस्ताने पर गंगा जमुनी तहजीब देखने को मिली। हिंदू मुस्लिम दोनों वर्ग के लोगों ने बाबा के दर पर हाजिरी लगाई। असर की नमाज के बाद चादर पोशी की गई। इस मौके पर क़ुरआन खानी शाम को मिलाद हुई। उर्स मुबारक पर रात भर कव्वाली की महफ़िल सजी। शाम से लगायत देर रात तक हजरात उर्स में शरीक होकर फकीरों की दुआओं से अपनी झोली भरते रहे। आस्ताने के आसपास तमाम अस्थाई दुकानें लगी रही। गद्दीनसीन बाबा सदरंग शाह ने बताया कि गूदर शाह एक सूफी संत थे। आज भी परेशान लोग उनकी दर पर सुकून पाते हैं। यह जगह मस्तान शाह की तपोभूमि भी है। उर्स में राम गोपाल सिंह, पारसनाथ पांडेय, अतुल सिंह, चंदन यादव, रवि, राजा, साजिद खां, मुन्ना खां, लियाकत खां, आसिफ अंसारी, नेसार अहमद, हरिकेश सिंह, रमेश गुप्ता, अशरफ अली आदि उपस्थित थे। परंपराओं के अनुसार मजार पर उर्स के दिन पहली चादर गांव के जमींदार जंगबहादुर सिंह के परिवार का मुखिया देता है। इस क्रम में उर्स की पहली चादर पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामगोपाल सिंह ने चढ़ाकर उर्स की शुरुआत की।
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गूदर शाह बाबा के आस्ताने पर गंगा जमुनी तहजीब देखने को मिली। हिंदू मुस्लिम दोनों वर्ग के लोगों ने बाबा के दर पर हाजिरी लगाई। असर की नमाज के बाद चादर पोशी की गई। इस मौके पर क़ुरआन खानी शाम को मिलाद हुई। उर्स मुबारक पर रात भर कव्वाली की महफ़िल सजी। शाम से लगायत देर रात तक हजरात उर्स में शरीक होकर फकीरों की दुआओं से अपनी झोली भरते रहे। आस्ताने के आसपास तमाम अस्थाई दुकानें लगी रही। गद्दीनसीन बाबा सदरंग शाह ने बताया कि गूदर शाह एक सूफी संत थे। आज भी परेशान लोग उनकी दर पर सुकून पाते हैं। यह जगह मस्तान शाह की तपोभूमि भी है। उर्स में राम गोपाल सिंह, पारसनाथ पांडेय, अतुल सिंह, चंदन यादव, रवि, राजा, साजिद खां, मुन्ना खां, लियाकत खां, आसिफ अंसारी, नेसार अहमद, हरिकेश सिंह, रमेश गुप्ता, अशरफ अली आदि उपस्थित थे। परंपराओं के अनुसार मजार पर उर्स के दिन पहली चादर गांव के जमींदार जंगबहादुर सिंह के परिवार का मुखिया देता है। इस क्रम में उर्स की पहली चादर पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामगोपाल सिंह ने चढ़ाकर उर्स की शुरुआत की।
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