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Ghazipur News: 34 घंटे में 38 एमएम बारिश, दो डिग्री गिरा तापमान
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दुबिहा में खेत में गिरी धान की पकी फसल-स्रोत-संवाद
गाजीपुर। चक्रवात अर्नब का प्रभाव लगातार तीसरे दिन शुक्रवार को भी जिले में दिखा। शुक्रवार को 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की तेजी से हवाएं चलीं। तीसरे दिन कुल .05 एमएम(मिलीमीटर) बारिश हुई। लगातार बूंदाबांदी से अधिकतम तापमान में ढाई डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
जिले में 34 घंटे में 38 एमएम बारिश हुई। बीते दो दिनों की लगातार बूंदाबांदी व हवाओं के चलने के कारण किसानों की कमर टूट गई है। इसकी वजह से खेतों में खड़ी धान की करीब 35 फीसदी फसल खेतों में गिर गई है।
जनपद में एक लाख 29 हजार 532 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। उधर, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि चक्रवात का प्रभाव समाप्त होने पर सर्वे करा कर फसलों के नुकसान का आकलन कराया जाएगा और रिपोर्ट शासन काे भेजी जाएगी।
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जनपद में धान की खेती प्रमुखता से होती है। बहुत कम किसानों ने धान की कटाई की है। अगैती धान की खेती जिले में कम होती है। पिछैती धान की खेती अधिकांश किसान करते हैं।
अगैती धान की कटाई करने वाले ऐसे किसान जिन्होंने अपने फसल की कटाई करके खेत से ला दिए हैं, वह मौसम की मार से बच गए हैं। लेकिन, ऐसे किसान जिन्होंने फसल की कटाई करके खेतों में छोड़ा था, उनका सब कुछ बर्बाद हो गया।
पिछैती खेती करने वाले किसानों के धान की फसल खेत में लगातार बारिश व हवाओं के झोंकों के कारण पूरी तरह से गिर गई है। इससे किसान परेशान व निराश हैं।
बीते 28 अक्तूबर से जिले में अर्नब चक्रवात का असर दिख रहा है। पहले दिन आसमान में केवल बादल छाए रहे। दूसरे व तीसरे दिन लगातार बूंदाबांदी का दौर चला। खानपुर में क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिरकर बिछ गई है। वहीं, निचले इलाकों के खेतों में बारिश का पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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जिले में 34 घंटे में 38 एमएम बारिश हुई। बीते दो दिनों की लगातार बूंदाबांदी व हवाओं के चलने के कारण किसानों की कमर टूट गई है। इसकी वजह से खेतों में खड़ी धान की करीब 35 फीसदी फसल खेतों में गिर गई है।
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जनपद में एक लाख 29 हजार 532 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। उधर, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि चक्रवात का प्रभाव समाप्त होने पर सर्वे करा कर फसलों के नुकसान का आकलन कराया जाएगा और रिपोर्ट शासन काे भेजी जाएगी।
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जनपद में धान की खेती प्रमुखता से होती है। बहुत कम किसानों ने धान की कटाई की है। अगैती धान की खेती जिले में कम होती है। पिछैती धान की खेती अधिकांश किसान करते हैं।
अगैती धान की कटाई करने वाले ऐसे किसान जिन्होंने अपने फसल की कटाई करके खेत से ला दिए हैं, वह मौसम की मार से बच गए हैं। लेकिन, ऐसे किसान जिन्होंने फसल की कटाई करके खेतों में छोड़ा था, उनका सब कुछ बर्बाद हो गया।
पिछैती खेती करने वाले किसानों के धान की फसल खेत में लगातार बारिश व हवाओं के झोंकों के कारण पूरी तरह से गिर गई है। इससे किसान परेशान व निराश हैं।
बीते 28 अक्तूबर से जिले में अर्नब चक्रवात का असर दिख रहा है। पहले दिन आसमान में केवल बादल छाए रहे। दूसरे व तीसरे दिन लगातार बूंदाबांदी का दौर चला। खानपुर में क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिरकर बिछ गई है। वहीं, निचले इलाकों के खेतों में बारिश का पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।