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गंगा के बिना संस्कृति का संरक्षण असंभव
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:12 PM IST
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गाजीपुर। मां गंगा की दशा आज दयनीय हो गई है। केंद्र सरकार की सारी नीतियां असफल हो रही हैं। सरकार सिर्फ बयानबाजी कर रही है, कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। गंगा की साफ-सफाई और निर्मलता बनाए जाने का जबरदस्त ढिढोरा पीटा गया, लेकिन यह सब कागजों पर ही सीमित रहा। नमामि गंगे योजना और गंगा हरितिमा आदि योजनाएं सब अंधेरे में तीर चलाने जैसी रही। यह बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान की ओर से शनिवार को महादेवा घाट पर आयोजित गंगा का भविष्य विषयक परिचर्चा में राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने कही।
उन्होंने कहा कि नदियों का भूगोल बिगाड़कर उसके इतिहास को संरक्षित नहीं किया जा सकता। आज गंगा का अस्तित्व खतरे में आ गया है। इसे बचाने के लिए सभी को एक साथ जागरूक होकर काम करना पड़ेगा। पीजी कॉलेज के प्रो. श्रीकांत पांडेय ने कहा कि गंगा भारत की आत्मा तथा विश्व की धरोहर है। गंगा के बिना संस्कृति का संरक्षण असंभव है। हमारा दुर्भाग्य है कि मां गंगा पर ही सबसे अधिक राजनीति की जा रही है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि गंगा को अविरल करने की बात पूरी तरह से नारे में ही सिमट कर रह गई है। सरकार जो 2022 तक गंगा को साफ करने की बात कर रही है वह मात्र राजनीतिक प्रपंच ही दिखाई पड़ रहा है। कहा कि गंगा जिस तरह सिमटती जा रही है वह आगे आने वाले समय के लिए एक संकट दिखाई दे रहा है। घाटों को छोड़ कर गंगा परिवर्तित रुप में आ गई है। यह सब उनके साथ किए जा रहे छेड़छाड़ की ही नतीजा है। आगे सबको जागरूक होना पड़ेगा। इसके पूर्व संस्था के सदस्यों ने गंगा में गिरने वाले गंदे नालों का निरीक्षण किया तथा इस पर चिंता जताई। इस मौके पर गंगा मुक्ति अभियान के प्रभारी (बिहार प्रांत) डॉ. कमलाकर तिवारी, मनीष कुमार सिंह, अमित कुमार यादव, अरविंद कुमार राय आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि नदियों का भूगोल बिगाड़कर उसके इतिहास को संरक्षित नहीं किया जा सकता। आज गंगा का अस्तित्व खतरे में आ गया है। इसे बचाने के लिए सभी को एक साथ जागरूक होकर काम करना पड़ेगा। पीजी कॉलेज के प्रो. श्रीकांत पांडेय ने कहा कि गंगा भारत की आत्मा तथा विश्व की धरोहर है। गंगा के बिना संस्कृति का संरक्षण असंभव है। हमारा दुर्भाग्य है कि मां गंगा पर ही सबसे अधिक राजनीति की जा रही है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि गंगा को अविरल करने की बात पूरी तरह से नारे में ही सिमट कर रह गई है। सरकार जो 2022 तक गंगा को साफ करने की बात कर रही है वह मात्र राजनीतिक प्रपंच ही दिखाई पड़ रहा है। कहा कि गंगा जिस तरह सिमटती जा रही है वह आगे आने वाले समय के लिए एक संकट दिखाई दे रहा है। घाटों को छोड़ कर गंगा परिवर्तित रुप में आ गई है। यह सब उनके साथ किए जा रहे छेड़छाड़ की ही नतीजा है। आगे सबको जागरूक होना पड़ेगा। इसके पूर्व संस्था के सदस्यों ने गंगा में गिरने वाले गंदे नालों का निरीक्षण किया तथा इस पर चिंता जताई। इस मौके पर गंगा मुक्ति अभियान के प्रभारी (बिहार प्रांत) डॉ. कमलाकर तिवारी, मनीष कुमार सिंह, अमित कुमार यादव, अरविंद कुमार राय आदि मौजूद रहे।
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