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मॉडल बनने की दौड़ में शामिल पीएचसी पर नहीं है दर्द की दवा
Updated Fri, 19 Jan 2018 11:52 PM IST
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मॉडल बनने की दौड़ में शामिल पीएचसी पर नहीं है दर्द की दवा
जमानिया (गाजीपुर)।
क्षेत्र के लोगों को चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने के लिए स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मॉडल पीएचसी बनने की दौड़ में तो शामिल हो गया लेकिन यहां दर्द तक की भी दवा उपलब्ध नहीं है। मरीजों से जेनेरिक दवाओं को बेअसर बतलाकर चिकित्सक पेटेंट दवाइयों के नाम पर जमकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे इस पीएचसी पर तैनात चिकित्सकों द्वारा घर पर ही ओपीडी चलाई जाती है।
इधर ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार करते हुए घर वापस लौट जाते हैं। शुक्रवार को इलाज कराने पहुंचे मरीज सुबह से ही चिकित्सक का इंतजार करते रहे लेकिन चिकित्सक निर्धारित समय से अपने ओपीडी कक्ष में उपस्थित नहीं हुए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तीन चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें एक महिला चिकित्सक संविदा पर तैनात हैं। सुबह से ही मरीजों की भीड़ ओपीडी कक्ष के बाहर लगी रही लेकिन अपने निर्धारित समय पर न तो चिकित्सक थे और न ही कार्यालय में कोई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। जबकि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मॉडल पीएससी बनाने की तैयारी की जा रही है। यहां चिकित्सकों की कमी के साथ केंद्र में एंटीबायोटिक, पेरासिटामॉल, खांसी की दवा, एआरबी (रेबीज), दर्द तक की दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों का सहारा लेना पड़ता है। इलाज कराने पहुंचे सब्बलपुर निवासी शिवमूरत, महेवां निवासी सुभाष यादव, फुल्ली निवासी सुनील यादव, तियरी निवासी एसएन वर्मा आदि ने बताया कि बीते 15 दिनों से यहां जानवरों को काटने पर लगने वाली सुई नहीं है। इससे काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। अवधेश ने बताया कि डॉक्टरों के समय से मौजूद न रहने से स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर काटना पड़ता है। यहां तैनात डॉक्टर अपने कमरे पर ही ओपीडी चलाते हैं। कई बार तो आपातकालीन में चिकित्सक न होने से मरीजों की जान भी चली जाती है। चिकित्सक जेनेरिक दवाओं को बेअसर और कम पावर का बताकर बाहर की दवा लिखते हैं। इससे मरीजों को आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ता है।
इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी अनिल कुमार रत्नेश ने बताया कि वह छुट्टी पर चल रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. जीसी मौर्या ने बताया कि इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जमानिया (गाजीपुर)।
क्षेत्र के लोगों को चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने के लिए स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मॉडल पीएचसी बनने की दौड़ में तो शामिल हो गया लेकिन यहां दर्द तक की भी दवा उपलब्ध नहीं है। मरीजों से जेनेरिक दवाओं को बेअसर बतलाकर चिकित्सक पेटेंट दवाइयों के नाम पर जमकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे इस पीएचसी पर तैनात चिकित्सकों द्वारा घर पर ही ओपीडी चलाई जाती है।
इधर ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार करते हुए घर वापस लौट जाते हैं। शुक्रवार को इलाज कराने पहुंचे मरीज सुबह से ही चिकित्सक का इंतजार करते रहे लेकिन चिकित्सक निर्धारित समय से अपने ओपीडी कक्ष में उपस्थित नहीं हुए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तीन चिकित्सकों की तैनाती है। इसमें एक महिला चिकित्सक संविदा पर तैनात हैं। सुबह से ही मरीजों की भीड़ ओपीडी कक्ष के बाहर लगी रही लेकिन अपने निर्धारित समय पर न तो चिकित्सक थे और न ही कार्यालय में कोई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। जबकि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मॉडल पीएससी बनाने की तैयारी की जा रही है। यहां चिकित्सकों की कमी के साथ केंद्र में एंटीबायोटिक, पेरासिटामॉल, खांसी की दवा, एआरबी (रेबीज), दर्द तक की दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों का सहारा लेना पड़ता है। इलाज कराने पहुंचे सब्बलपुर निवासी शिवमूरत, महेवां निवासी सुभाष यादव, फुल्ली निवासी सुनील यादव, तियरी निवासी एसएन वर्मा आदि ने बताया कि बीते 15 दिनों से यहां जानवरों को काटने पर लगने वाली सुई नहीं है। इससे काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। अवधेश ने बताया कि डॉक्टरों के समय से मौजूद न रहने से स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर काटना पड़ता है। यहां तैनात डॉक्टर अपने कमरे पर ही ओपीडी चलाते हैं। कई बार तो आपातकालीन में चिकित्सक न होने से मरीजों की जान भी चली जाती है। चिकित्सक जेनेरिक दवाओं को बेअसर और कम पावर का बताकर बाहर की दवा लिखते हैं। इससे मरीजों को आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ता है।
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इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी अनिल कुमार रत्नेश ने बताया कि वह छुट्टी पर चल रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. जीसी मौर्या ने बताया कि इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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